उत्तराखंड ही नहीं पूरे देश अब लड़कियां, महिलाएं और बच्चे सुरक्षित नहीं हैं। पिछले दिनों उत्तराखंड में घटी इन घटनाओं को पढ़कर आपका दिल भी रो पड़ेगा।
उत्तराखंड में दो अलग-अलग मामलों में अदालत ने मासूमों को अपनी हवस का शिकार बनाने वाले दो लोगों को सजा सुनाई तो सुना दी लेकिन उन मासूमों की आत्मा पर लगा ये जख्म शायद ही वह कभी भूल पाएंगी।
एक बलात्कारी को 15 साल तो दूसरे को 10 साल कैद की सजा सुनाई गई है। वहीं, रामनगर में किशोरी को अगवा कर उससे दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने दो युवकों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। उधर, पौड़ी में भी किशोरी से बलात्कार का मामला सामने आया है।
विशेष न्यायाधीश (पाक्सो) प्रीतू शर्मा की अदालत ने कथित बाबा संतोष गिरि को मासूम से दुष्कर्म और उसके भाई से कुकर्म करने का दोषी करार देते हुए 15 साल कैद और 10 हजार रुपए जुर्माना ठोका है। जुर्माना नहीं भरने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष के डीजीसी नरेंद्र सिंह नेगी के मुताबिक उत्तराखंड के रामनगर के एक गांव में नेपाली परिवार रहता है। नेपाली के पड़ोस में ही कथित बाबा संतोष गिरी झोपड़ी बनाकर रहता था। संतोष गिरि मूलरूप से बागेश्वर जिले के बाली का रहने वाला है।
बाबा के खिलाफ दर्ज रिपोर्ट में कहा गया कि चार साल की बच्ची को संतोष गिरि बहलाकर-फुसलाकर अपनी झोपड़ी में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। मासूम ने घटना की जानकारी अपनी दादी को दी। इसके बाद मासूम बच्ची के भाई ने खुलासा किया कि संतोष ने उसके साथ भी कुकर्म किया था।
मामले में रामनगर पुलिस ने 14 सितंबर 2014 को धारा 376(2) (ई), 377, 6 पाक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने बच्चों के बयान के आधार पर संतोष गिरि को गिरफ्तार कर लिया। मुकदमे की विवेचना उपनिरीक्षक स्वेता नेगी ने की। अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद संतोष को दुष्कर्म और कुकर्म का दोषी पाया।
अदालत ने धारा 376 (2) के तहत 15 साल की सजा और 10 हजार रुपए अर्थदंड, धारा 377 के तहत 10 वर्ष की सजा और पांच हजार रुपए अर्थदंड, 6 पाक्सो एक्ट के तहत भी 10 वर्ष की सजा और पांच हजार रुपए का अर्थदंड सुनाया। 10 हजार रुपए अर्थदंड नहीं देने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।