राजधानी देहरादून में चोरी की इस वारदात को देखने के बाद आप भी कहेंगे ऐसी चोरी के लिए बहुत हिम्मत चाहिए!
राजधानी के व्यस्ततम शिमला बाईपास तिराहा, तीन दीवारें, तीन घंटे का वक्त, दीवार पर पड़ते हथौड़ों का शोर और किसी भी पल पकड़े जाने का डर। लेकिन तमाम खतरों को धता बताकर चोरों ने दुस्साहसिक वारदात से राजधानी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती पेश कर डाली।
14-14 इंच की तीन दीवार (कुल 42 इंच) तोड़कर इलेक्ट्रानिक शॉप से चोर चार लाख रुपए का सामान ले उड़े। माना जा रहा है कि वारदात रविवार रात करीब ढाई से तीन घंटे में अंजाम दी गई।
चोरों ने जिस तरह रिस्क उठाया है, उसे देखकर पुलिस अधिकारी भी हैरान थे। लापरवाही सामने आने पर एसएसपी ने गश्ती दल के दो सिपाहियों को निलंबित कर दिया है। उधर, तीन संदिग्ध हिरासत में लिए गए हैं।
शिमला बाईपास तिराहे पर मनजीत सिंह का शॉपिंग कांप्लेक्स है। यहां मनजीत की अपनी फर्नीचर शॉप, नैनीताल बैंक की शाखा और तीसरी इलेक्ट्रॉनिक शॉप मनजीत के बेटे रवींद्र सिंह की है।
इस वारदात पर कड़ी नाराजगी
सोमवार सुबह नैनीताल बैंक में कर्मचारी पहुंचे तो मनजीत की दुकान से लगी दीवार में सुराख देख चौंक गए। कर्मचारियों ने तुरंत बैंक में रखे सामान, दस्तावेज, लॉकर आदि की जांच की लेकिन सब सुरक्षित निकला। मनजीत और रवींद्र भी पहुंच गए।
मनजीत की दुकान से भी कोई सामान नहीं चुराया गया था, लेकिन रवींद्र की दुकान खोली गई तो वहां रखे एलसीडी टीवी, दर्जनों मोबाइल, स्पीकर और अन्य इलेक्ट्रानिक सामान गायब था।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने मौके से फिंगर प्रिंट उठा लिए। एसएसपी अजय रौतेला ने रात्रि गश्त के कड़े निर्देशों के बीच हुई इस वारदात पर कड़ी नाराजगी जताई। गश्ती टीम के सिपाही ब्रजमोहन और दिनेश राणा को निलंबित कर दिया गया।
रवींद्र सिंह की ओर से चोरी का मुकदमा दर्ज कराया गया है। उधर, एसपी सिटी अजय सिंह का कहना है कि जिस तरह वारदात की गई, उससे इसमें परिचितों के शामिल होने की आशंका है। बताया कि तीन संदिग्ध हिरासत में लिए गए हैं।
चोरी गए उपकरण
चोरों ने दुकान से तीन एलसीडी, तीन लैपटॉप, 12 स्पीकर और 35 मोबाइल समेत करीब चार लाख कीमत के इलेक्ट्रानिक आइटम
कैसे तोड़े तीनों दीवार?
पहली दीवार
चोर सड़क से कांप्लेक्स के पास आठ फीट की दीवार फांद खाली प्लाट पर पहुंचे। दायीं ओर सबसे किनारे मनजीत सिंह की फर्नीचर शॉप में घुसने लायक जगह बनाने के लिए दुकान की दायीं दीवार को तोड़ा गया। सुराख से चोर भीतर दाखिल हुए, लेकिन दुकान से कोई सामान नहीं ले गए।
दूसरी दीवार
फर्नीचर शॉप की बायीं दीवार के दूसरी ओर नैनीताल बैंक की शाखा है। चोरों ने बैंक में घुसने के लिए इस दीवार को भी तोड़कर छेद कर दिया। दीवार के इस सुराख के सहारे चोर बैंक के टायलेट में निकले। लेकिन उन्होंने बैंक में भी कोई सामान नहीं छेड़ा।
तीसरी दीवार
बैंक की बायीं और रवींद्र की इलेक्ट्रानिक शाप की दायीं दीवार में सुराख किया गया। बैंक के टॉयलेट से बदमाश बाहर निकले और फिर दूसरी दीवार तोड़ी गई। बदमाश रवींद्र की दुकान में दाखिल हुए और फिर सामान समेटकर दीवारों पर किए वापस तीन सुराखों से ही होते हुए भाग निकले।
इंच-इंच की थी जानकारी
जिस तरह से वारदात को अंजाम दिया गया, माना जा रहा है कि चोरों को बैंक, फर्नीचर शॉप और इलेक्ट्रानिक शॉप के इंच-इंच की पूरी जानकारी थी। उन्हें मालूम था कि वे जहां दीवार तोड़ रहे हैं, वहां से दूसरी ओर खाली जगह पर ही निकलेंगे।
मनजीत की दुकान की दीवार में गलत जगह छेद करते तो बैंक में आलमारियों से जा टकराते। दीवार वहां तोड़ी गई, जहां से चोर बैंक के टॉयलेट में निकले। इसके बाद वे बैंक कार्यालय में आए और यहां रवींद्र की दुकान और बैंक के बीच बनी दीवार से सटाकर रखे एक भारी संदूक को हटाकर किनारे किया। इसके बाद दीवार तोड़ी और दुकान में उस जगह निकले, जहां मैकेनिक बैठता था। टॉयलेट से दीवार तोड़ी जाती तो दूसरी ओर बनाई गई शेल्फों में चोर उलझ जाते।
निशाना सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक शॉप
चोरों के निशाने पर सिर्फ रवींद्र सिंह की इलेक्ट्रॉनिक शॉप थी। यही वजह रही कि मनजीत की दुकान और बैंक में चोरी की कोई कोशिश नहीं की गई।
एक वजह यह भी मानी जा रही है कि भारी फर्नीचर चुराकर ले जाने में फंसने का डर था। वहीं, बैंक में कोशिश की जाती तो सेफ्टी अलार्म की वजह से चोर पकड़े जा सकते थे। इलेक्ट्रानिक आइटम आकार में छोटे होने से इन्हें चुराना आसान था।
सीसीटीवी की हार्ड डिस्क ले गए
चोरों को यह भी मालूम था कि मनजीत की दुकान और नैनीताल बैंक में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। पुलिस इन कैमरों की फुटेज खंगाल उनकी तस्वीरें हासिल कर लेती। ऐसे में उन्होंने यहां कोई सामान नहीं चुराया, लेकिन दोनों जगहों से सीसीटीवी की हार्ड डिस्क और कैमरों के बॉक्स उड़ा ले गए।
सुरक्षा की पूरी तस्दीक
माना जा रहा है कि चोरों ने वारदात से पहले पकड़े जाने की सभी संभावनाओं के खत्म होने की पूरी तस्दीक की। रवींद्र की दुकान तक पहुंचने के लिए मनजीत की दुकान चुनी गई जो कांप्लेक्स के दायीं ओर सबसे किनारे स्थित है। यहां जाने के लिए बहुत छोटा खाली प्लाट चुना गया जो सड़क के दूसरी ओर आठ फीट ऊंची दीवार के पार है। इससे यहां घुसे लोगों को देखा नहीं जा सकता। इसके अलावा यह भी तस्दीक की कि घटना के वक्त गश्ती दल सड़क पर नहीं है। चोरों को मालूम था कि गश्ती पुलिसकर्मी इस कांप्लेक्स के पास से किस वक्त निकलते हैं।
कहां सोया था गश्ती दल
वारदात के लिए करीब तीन घंटे तक चोर कांप्लेक्स में मौजूद रहे। इस दौरान मदद के लिए कांप्लेक्स के बाहर भी उनके साथी रहे होंगे। चोरी का सामान ले जाने के लिए वाहन का इस्तेमाल किया गया होगा। लेकिन इस दौरान मौके से गश्ती दल का न गुजरना सवाल खड़े करता है। वह भी तब, जबकि यह कांप्लेक्स आईएसबीटी चौकी से महज 300 मीटर दूर है।
एडीजी का निरीक्षण बेअसर
जिस वक्त वारदात हुई, एडीजी राम सिंह मीणा शहर में निरीक्षण पर निकले थे। नकरौंदा डकैती के बाद से एडीजी हर रात पुलिसकर्मियों को पुलिस को सक्रिय करने के लिए लगातार भ्रमण कर रहे हैं, लेकिन इसका कोई असर होता नहीं दिख रहा। खास बात यह है कि शिमला बाईपास तिराहे पर दिनभर पुलिस पिकेट रहती है, लेकिन रात में नहीं। रात को यहां पुलिस क्यों नहीं रहती, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।