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केदारनाथ आपदा: लाशों पर पैसा खाते रहे अफसर

Sat, 30 May 2015 08:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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केदारनाथ आपदा के दौरान रुद्रप्रयाग में अफसरों के होटल में रहने-खाने का बिल 25 लाख रुपये। एक कमरे का किराया 6750 रुपये। आधा किलो दूध 194 रुपये। यही नहीं आपदा आई जून 2013 में लेकिन आपदा के पुनर्निर्माण कार्य इससे पहले ही निपटा दिए गए।
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अलग-अलग विभागों से दी गई यह सूचनाएं राज्य सूचना आयोग को भी हजम नहीं हुईं। इसीलिए राज्य सूचना आयुक्त अनिल शर्मा ने आपदा बचाव और राहत कार्यों के बहाने हुई धांधली की विस्तृत जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी या सीबीआई से कराने को कहा है। आयुक्त ने मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव को अपने निर्णय के आदेश की प्रति भेजते हुए मामला सीएम के संज्ञान में लाकर जांच कराने को कहा है।

राज्य सूचना आयुक्त अनिल शर्मा ने एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा निर्णय लिया। शिकायतकर्ता भूपेंद्र कुमार, जिलाध्यक्ष, नेशनल एक्शन फोरम फॉर सोशल जस्टिस, देहरादून ने मामले की शिकायत आयोग में की थी।
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जून 2013 में दैवी आपदा के बाद राहत एवं बचाव कार्यों के लिए क्षेत्रों में गए अफसरों ने क्या किया और अवस्थापना से जुड़े कार्यों से लेकर राहत राशि वितरण में किस तरह से अनियमितता हुई। सूचना के अधिकार में जिलों से मिली सूचनाओं में विरोधाभास है।

कागजों में आपदा से पहले शुरू कर द‌िए राहत कार्य

उदाहरण के तौर पर जल संस्थान, डीडीहाट के ईई ने एक निर्माण कार्य 28 दिसंबर 2013 को शुरू और 16 नवंबर 2013 को खत्म दिखाया है। एक अन्य सूचना भी चौंकाने वाली है।

आपदा 16 जून को आई, लेकिन काम 22 जनवरी को शुरू हो गया था। ऐसे दो दर्जन से भी ज्यादा मामले हैं, जिनमें ऐसा फर्जीवाड़ा हुआ है। पांचों प्रभावित जनपदों चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, बागेश्वर, पिथौरागढ़ से जो सूचनाओं से संबंधित कागजात शिकायतकर्ता ने आयोग में प्रस्तुत किए हैं। बागेश्वर और कपकोट में 12,00,000 रुपये बांटने में गड़बड़ी की गई।

यह भी हुई धांधली
-चमोली में 23 जून को डीजल पेट्रोल के बिलों में घपला सामने आया। अधिकतर जिन वाहनों में ईंधन डाला दर्शाया गया वे स्कूटर या थ्री-व्हीलर निकले। एक स्कूटर में एक बार में 30 लीटर तक तेल भरवाया गया।
-चमोली के पीडी ने 3 दिन तक एक ही दुकान से 1800 रेनकोट खरीदे, लेकिन कागजों में दुकान का पता ही संदिग्ध है। कर्णप्रयाग में डेढ़ महीने पहले ही भुगतान दर्शा दिया गया।

-डेक्कन हेलीकाप्टर सेवा के उत्तरी क्षेत्र के प्रबंधक दीप के शर्मा ने 24 जून 2013 को चार दिन के हेलीकॉप्टर के बिल 98,08090 रुपये के प्रस्तुत किए। ये सारे बिल संदिग्ध हैं।
-आपदा पीड़ितों को सरकारी गेस्ट हाउस में 15 दिन तक ठहरने का बिल 4 लाख रुपये बनाया गया।

...मर गई थी सिस्टम की आत्मा

यह जनहित का मामला था, आपदा ने प्रदेश को बहुत आघात पहुंचाया। लेकिन सरकारी सिस्टम ने स्थिति को ज्यादा खराब किया। यह ऐसा मामला है, जिसमें मानवता तार तार होती दिखी। यह किसी भी व्यक्ति के अंतर मन को झकझोर देने वाली घटनाएं हैं। यह घटना इस बात को साबित करती हैं कि जब लोग मर रहे थे तब सरकारी सिस्टम की आत्मा भी मर गई थी।
-अनिल शर्मा, राज्य सूचना आयुक्त

आयुक्त की तीसरी सिफारिश
राज्य सूचना आयुक्त अनिल शर्मा ने सीबीआई जांच की सिफारिश करने की हैटट्रिक पूरी कर ली है। इससे पहले वे एनआरएचएम के तहत दवा खरीद घोटाले में सीबीआई जांच की सिफारिश कर चुके हैं।

इसके बाद सूचना आयुक्त ने हरिद्वार कुंभ 2010 में हुई अनियमितताओं की सीबीआई जांच की सिफारिश की। दोनों ही मामलों में सरकार ने उनकी सिफारिश को स्वीकार करते हुए सीबीआई जांच की स्वीकृति दी है।

पीड़ित भूखे, अफसर खाते रहे मटन-चिकन

जून 2013 में आई दैवीय आपदा के दौरान अधिकारियों/कर्मचारियों के होटल में रहने तथा खाने के बिल चौंकाने वाले हैं। एक तरफ आपदा पीड़ित दाने-दाने को मोहताज हो गए थे, वहीं आपदा राहत कार्यों के लिए प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे अधिकारी महंगे होटलों में मटन-चिकन का स्वाद ले रहे थे।

एक दिन में 900 रुपये का खाना
आपदा के दौरान राहत बचाव कार्य में गए अधिकारियों ने रुदप्रयाग में जमकर खाना खाया। एक अधिकारी ने रोजाना 900 रुपये की डाइट ली। बिल में एक व्यक्ति का एक समय का नाश्ता 250 रुपये में आया। दोपहर का लंच 300 रुपये और ड‌िनर का खर्चा 350 रुपये रोजाना दर्शाया गया है।

पीड़ितों का खाना भी डकार गए
जिला कार्यालय उत्तरकाशी से आपदा पीड़ितों को खाना खिलाने के नाम पर लाखों रुपये के फर्जी बिलों का भुगतान हुआ है। बिलों की सत्यता पर इसलिए सवाल खड़ा होता है क्योंकि 17 जून से 26 जून 2013 तक के जो बिल उपलब्ध कराए गए हैं, वह आपदा आने से पहले 16 जून को ही बना दिए गए थे। जबकि, आपदा 23 जून 2013 को आई थी। चमोली जनपद से मिले होटलों के बिल तो आपदा से एक महीने पहले के हैं।
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6750 एक दिन का होटल किराया, 194 में 1/2लीटर दूध

आपदा में पीड़ितों की मदद करने गए अधिकारियों के लिए यह अभियान दरअसल पिकनिक से कम नहीं था। उस दौरान अधिकारियों/कर्मचारियों के रहने-खाने के लिए होटल को 25,19,000 का भुगतान किया गया। एक अधिकारी के होटल में एक दिन ठहरने का 6750 रुपये का खर्च दिखाया गया।

आधा किलो दूध 194 रुपये
आपदा राहत कार्यों के दौरान जनपद बागेश्वर में ठहरे अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी खूब मौज उड़ाई। अधिकारियों ने मटन चिकन के साथ अंडे और गुलाब जामुन भी खूब खाए। हद तो यह है कि बिल में आधे किलो दूध की कीमत 194 रुपये दिखाई गई। जनपद उत्तरकाशी में जहां भारी तबाही हुई, वहां भी अधिकारियों ने खूब दावत उड़ाई। यह हाल अन्य जनपदों का भी है।
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