प्रदेश में कोरोना संक्रमण की रफ्तार धीमी होने से कंटेनमेंट जोन की बंदिशों से भी मुक्ति मिल रही है। एक माह के भीतर कंटेनमेंट जोन की संख्या 450 से घटकर अब 57 पर आ गई है। अनलॉक-5 में कोरोना संक्रमण थमने से थोड़ी राहत मिली है।
अनलॉक-4 में कोरोना संक्रमित मामले तेजी से बढ़ने के कारण रोकथाम के लिए कंटेनमेंट जोन की संख्या बढ़ी थी। 28 सितंबर को प्रदेश में 450 कंटेनमेंट जोन बनाए गए थे। वहीं, वर्तमान में छह जिलों में कंटेनमेंट जोन की संख्या 57 रह गई है।
इसमें देहरादून जिले में 26, उत्तरकाशी में 14, पौड़ी में एक, हरिद्वार में पांच, नैनीताल में नौ, चंपावत में दो कंटेनमेंट जोन हैं। इनमें आवश्यक सेवाओं को छोड़कर बाकी सभी तरह की गतिविधियां प्रतिबंधित हैं। प्रभारी सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय का कहना है कि कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए जिलाधिकारी को कंटेनमेंट जोन घोषित करने का अधिकार है।
वर्तमान में पहले की तुलना में संक्रमित मामलों में कमी आई है। इससे कंटेनमेंट जोन की संख्या भी घटी है। उन्होंने कहा कि अभी कोरोना संक्रमण का खतरा कम नहीं हुआ है। लोगों को बचाव के लिए सतर्कता बरतने की जरूरत है।
राज्य में कोरोना काल के 224 दिनों में 55 हजार से ज्यादा संक्रमितों ने कोरोना को मात दी है। पहली बार रिकवरी दर 91 प्रतिशत पहुंच गई है। लेकिन लगातार संक्रमित मरीजों की मौतें बढ़ रही हैं। अब तक एक हजार से ज्यादा कोरोना संक्रमितों की मौत हो चुकी है।
प्रदेश में कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में रोजाना संक्रमितों की तुलना में ज्यादा मरीज ठीक होकर घर लौट रहे हैं। रिकवरी दर के ग्राफ में सुधार हो रहा है, जबकि मृत्यु दर नहीं थम रही है।
मौत की दर 1.64 प्रतिशत हो गई है। देहरादून जिले में 573, नैनीताल में 142, हरिद्वार में 121, ऊधमसिंह नगर में 91, पौड़ी में 29, अल्मोड़ा व उत्तरकाशी में नौ-नौ, बागेश्वर में आठ, चपांवत में छह, टिहरी व पिथौरागढ़ में पांच-पांच, रुद्रप्रयाग में दो, चमोली जिले में एक मरीज की मौत हुई है।