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Coronavirus in Uttarakhand : विधानसभा सत्र में उतरने से पहले ही कोरोना से पक्ष विपक्ष पस्त 

Wed, 23 Sep 2020 10:38 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • संख्या बल में कम कांग्रेस को लगा ज्यादा बड़ा धक्का
  • सरकार के राज्यमंत्री व विधायक भी निकले कोरोना संक्रमित
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indira hridayesh
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विस्तार
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कोरोना संक्रमण के कारण तीन दिन से एक दिन में सिमट चुके विधानसभा सत्र में उतरने से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष के इरादे और मंसूबे पस्त हो चुके हैं। सबसे बड़ा झटका विपक्ष को लगा है।

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Corona in Uttarakhand: विधानसभा सत्र पर और गहराया कोरोना का संकट, दो मंत्री और दो विधायक संक्रमित

लंबे समय के बाद हो रहे सत्र में विपक्ष सरकार की घेराबंदी की रणनीति बना चुका था। लेकिन ऐन दो दिन पहले नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश और उनके बाद उपनेता करन माहरा के पॉजिटिव पाए जाने से सदन में उसकी रणनीति अब उतनी आक्रामक और धारदार नहीं रह पाएगी। 
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अपने तरकश में ज्वलंत मुद्दों के कई पैने तीर लेकर सदन में उतरने जा रहे उपनेता करन माहरा के अरमानों पर फिर गया। वह खुद कोरोना की जद में आ चुके हैं। राज्यमंत्री डॉ. धनसिंह रावत के कोरोना पॉजिटिव होने से सत्तापक्ष को भी झटका लगा है। कोरोना के बढ़ते मामलों की चिंता के बीच मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक के पास कुछ खास करने के लिए नहीं है।

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19 विधेयकों को हर हाल में पारित कराना

सरकार का एक मात्र ध्येय 19 विधेयकों को हर हाल में पारित कराना है। दूसरी ओर विपक्ष के मंसूबे बेशक घेराबंदी करने के हैं। सदन में वह मुद्दों को उठाने के अपने धर्म को निभाने में पीछे भी नहीं हटेगा। उसके करीब पांच सदस्य अपनी आवाज को बुलंद करने की कोशिश करेंगे। लेकिन संख्या बल में ज्यादा सत्ता पक्ष के शोर में उनकी आवाज असरदार रह पाएगी, इसमें संदेह है।

पिछले एक हफ्ते के दौरान जिस तेजी के साथ विधानसभा सत्र को लेकर बार बार बदलाव हुए हैं, उससे इसकी पारंपरिक खूबी खो सी गई है। तीन दिन का सत्र एक दिन में होने, स्थान तय न हो पाने, सदस्यों के वर्चुअल जुड़ने जैसे निर्णयों के बीच बेशक बुधवार को सत्र होगा। लेकिन वैसा नहीं जैसा आज तक होता आया है। विधानसभा में सत्र का आयोजन किसी उत्सव सरीखा ही होता रहा है।

पहली बार ऐसा लग रहा है कि सत्र कराना चूंकि जरूरी है, इसलिए ये मजबूरी का सत्र बन गया है। बाहरी तौर पर सत्ता पक्ष और विपक्ष बेशक सत्र में सक्रिय भागीदारी की बातें कर रहे हैं। लेकिन कोविड-19 महामारी से पैदा हुए विकट हालातों के बीच सत्र के आयोजन के प्रति सदस्यों में वैसा आकर्षण नहीं रहा है।

रही सही कसर सदस्यों के कोविड संक्रमण की चपेट में आ जाने से पूरी हो गई है। इससे न भाजपा अछूती है न कांग्रेस। ऐसे हालातों में सत्र केवल एक अनुष्ठान बन गया है, जिसमें सरकार और विपक्ष दोनों को आहुतियां डालनी है।
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