वीरू की पत्नी फातमा और बेटा वंश एवं बेटी वंशिका ने परिवार की कमान संभाल ली है। फातमा अखबार की रद्दी से लिफाफे बना रही है। दस साल का बेटा वंश और 12 साल की बेटी वंशिका लिफाफे को बाजार में बेच रही हैं। कर्फ्यू में मेडिकल स्टोर और गिनती की दुकानें खुल रही हैं।
भाई-बहन थैले में लिफाफे का गड्डियां लेकर पैदल घूमकर लिफाफे बेच रहे हैं। वंशिका बताती है, तीस रुपये में एक गड्डी बेचते हैं। मेडिकल स्टोर वाले ही खरीद रहे हैं। बाकी दुकानें कम खुल रही हैं, इसमें भी खरीदने को तैयार नहीं हैं।
वंशिका बताती है, पूरे दिन घूमने पर दो सौ रुपये तक के लिफाफे बिक जाते हैं। इसी से राशन खरीदते हैं। कई दिन 100 रुपये की भी बिक्री नहीं होती है और एक वक्त का खाना खाकर गुजारा करते हैं। वंशिका बताती है पिता को काम नहीं मिला तो कई दिन भूखे सोए।
इसके बाद ही मां फातमा ने लिफाफे बनाने शुरू किए। मां के साथ लिफाफे बनाने में रात को वो भी मदद करते हैं। पिता वीरू मजदूरी की तलाश में दिन में उधर-उधर भटकते हैं और रात में लिफाफे बनाने में मदद करते हैं। वंशिका बताती है कर्फ्यू में कबाड़ियों की दुकानें बंद होने से लिफाफे बनाने के लिए रद्दी भी बमुश्किल मिल रही है। कई लोगों से रद्दी मांग रहे हैं। वंश स्कूल स्कूल नहीं जाता है, जबकि वंशिका सरकारी स्कूल में 5वीं में पढ़ती है।