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#Ladengecoronase : खुद और परिवार कोरोना के साये में, फिर भी मरीजों की सेवा में जुटे दिन-रात, तस्वीरें

Fri, 30 Apr 2021 02:15 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

 कोई खुद तो किसी का परिवार कोरोना के साये में जी रहा है। किसी की पत्नी अस्पताल में भर्ती है तो कोई संक्रमित होने की वजह से घर में आइसोलेशन में रह रहे हैं।
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कोरोना योद्धा - फोटो : अमर उजाला
कोविड अस्पताल राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉक्टर से लेकर कर्मचारी योद्धाओं के रूप में कोरोना मरीजों की सेवा में जुटे हुए हैं। कोई खुद तो किसी का परिवार कोरोना के साये में जी रहा है। किसी की पत्नी अस्पताल में भर्ती है तो कोई संक्रमित होने की वजह से घर में आइसोलेशन में रह रहे हैं।

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इन कोरोना योद्धाओं को घर परिवार की चिंता के साथ ही अस्पताल में आने वाले एक-एक मरीज की सेहत की भी चिंता है। अमर उजाला ऐसे ही कुछ कोरोना योद्धाओं के बारे में पाठकों को जानकारी दे रहा है।

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स्टाफ के संक्रमित होने और जरूरी स्टाफ कम करने की वजह से 12 घंटे तक भी कार्य करना पड़ रहा है। फिर भी पूरी शिद्दत के साथ अपने कार्य में जुटे हुए हैं। उनकी लोगों से अपील है कि जांच के लिए सैंपल देने में धैर्य न खोएं। सोशल डिस्टेंसिंग रखते हुए मास्क पहने रखें और अपनी बारी आने पर ही सैंपल जांच के लिए दें।
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दीक्षा सती - फोटो : अमर उजाला
दीक्षा सती दून अस्पताल में स्टाफ नर्स हैं। वह कोरोना काल में ही संविदा पर अस्पताल में नौकरी पर लगी थीं। वह अपने साथी स्टाफ नर्स के साथ कोरोना संक्रमित वार्ड में चार-चार घंटे मरीजों को दवाइयां देने से लेकर उनका मनोबल बढ़ाने का कार्य कर रही हैं। उनका कहना है कि कई संक्रमित मरीज ठीक होकर भी घर जा रहे हैं। इसलिए संक्रमित मरीजों को डरने की नहीं बल्कि अपने अंदर दृढ़ इच्छाशक्ति लाने की आवश्यकता है।
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राकेश कुमार - फोटो : अमर उजाला
राकेश कुमार उपनल के माध्यम से दून अस्पताल में सफाई कर्मी के रूप में तैनात हैं। घर में छोटे बच्चे हैं, इसलिए रात को 1:30 बजे ड्यूटी समाप्त होने के बाद भी घर नहीं जा पाते। उनका कहना है कि वह रात को अस्पताल में ही बिताते हैं। कभी दोपहर की भी शिफ्ट होती है।

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corona virus - फोटो : PTI
कई बार बिना किट के महज फेस शील्ड, मास्क और सर्जिकल मोजे पहनकर मरीज की सेवा में तत्काल दौड़ पड़ते हैं। राकेश ने बताया कि उनके घर में भी चार छोटे बच्चे हैं इसलिए वह घर जाने के बाद नहा धोकर और हाथ पैरों को सैनिटाइजेशन करने के बाद ही घर में घुसते हैं।
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विजय कुमार - फोटो : अमर उजाला
विजय कुमार मरीजों को भर्ती करने से लेकर संक्रमित शवों को अंतिम संस्कार तक कराने के लिए भेजने को सुबह से शाम तक ज्यादातर मोर्चरी में शवों के बीच नजर आते हैं। जब भी किसी शव को परिजनों को सौंपना हो या मृतक के बारे में विस्तार से पता लगाना विजय मोर्चरी से लेकर डॉक्टरों और जनसंपर्क कार्यालय के स्टाफ तक दौड़ते नजर आते हैं।
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अमित जोशी - फोटो : अमर उजाला
अमित जोशी, लैब टेक्नीशियन अमित जोशी ने बताया कि वह सैंपल केंद्र से लेकर लैब तक में सैंपल कलेक्शन का कार्य कर रहे हैं। इस दौरान उन्हें कोरोना मरीजों के बीच में भी रहना पड़ता है।
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