2020 से भारत में शुरू हुई कोविड महामारी के बाद देश भर में लॉकडाउन के दौरान निर्माण, यातायात फैक्टरी, मिलों में काम आदि के लगभग बंद रहने के चलते अधिकांश हिस्सों में वायु प्रदूषण में कमी आई थी, लेकिन नैनीताल स्थित आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान (एरीज) के शोध अध्ययन में अब तक की धारणा के बिल्कुल उलट बताया गया कि उत्तर भारत में इस अवधि में वायु प्रदूषण में खासी वृद्धि हुई थी। सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों और डाटा के विश्लेषण से वैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष निकाला है।
इस अध्ययन से खुलासा हुआ है कि मध्य-पश्चिमी भारत और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य प्रवृत्ति के विपरीत प्रदूषण में वृद्धि देखी गई। इन क्षेत्रों में सांस की समस्याओं संबंधी जोखिम बढ़ा है। इस दौरान के उपग्रह-आधारित अवलोकन में पश्चिमी-मध्य भारत, उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों और सुदूर हिमालयी क्षेत्रों तक में जहरीली गैसों, ओजोन, कार्बन मोनोऑक्साइड आदि के स्तर में 15 प्रतिशत तक की वृद्धि दिखाई दी। वैज्ञानिकों के अनुसार इनके स्तर में यह बढ़ोतरी उन क्षेत्रों के आसपास श्वसन संबंधी स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ा सकता है।
यह शोध करने वाले एरीज के वैज्ञानिक मनीष नाजा ने बताया कि समताप मंडल, स्ट्रेटोसफियर से लंबी दूरी और निचली सतह की ओर होने वाले परिगमन से लॉकडाउन के दौरान भी हिमालय जैसे दूरदराज के क्षेत्रों और उत्तर भारत में ओजोन सांद्रता में काफी वृद्धि देखी गई।
नाजा ने बताया कि इस अध्ययन में वर्ष 2018, 2019 और 2020 के लिए यूमेटसैट और नासा के उपग्रह अवलोकनों का उपयोग किया गया। डॉ. मनीष नाजा के निर्देशन में किया गया यह शोध प्रख्यात अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘एनवायरनमेंटल साइंस एंड पोल्यूशन’ के ताजा अंक में प्रकाशित हुआ है।
प्रदेश में तीन जनवरी से 15 से 18 साल के बच्चों का कोविड का टीकाकरण शुरू होगा। सचिव शिक्षा एवं स्वास्थ्य की ओर से इस संबंध में संयुक्त रूप से समस्त जिलाधिकारियों एवं मुख्य शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी किया गया है। आदेश में कहा गया है कि इन बच्चों को कॉवैक्सीन के टीके लगेंगे। सभी 15 से 18 वर्ष तक के बच्चों को जो प्राईवेट स्कूल, सरकारी स्कूल, केन्द्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे स्कूल, स्थानीय निकाय द्वारा चलाए जा रहे स्कूल, मदरसा, आदिवासी क्षेत्र के लिए चलाए जा रहे स्कूल, संस्कृत स्कूल में पढ़ रहे हैं, उनका कोविड-19 वैक्सीनेशन किया जाना है।
शिक्षा विभाग यह तय करे कि प्रत्येक 15 से 18 वर्ष के बच्चों का आईकार्ड, आधार कार्ड एवं मोबाइल नंबर वैक्सीनेशन प्रक्रिया के दौरान उपलब्ध रहे, जिससे पात्र बच्चों का पंजीकरण कोविन पोर्टल पर किया जा सके। स्कूल अपने जिले में पंजीकृत 15 से 18 वर्ष के बच्चों की लिस्ट जनपद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी को देना तय करें। इसके बाद जनपद द्वारा बच्चों की लिस्ट राज्य को उपलब्ध कराई जाएगी। आदेश में यह भी कहा गया है कि शिक्षा विभाग राष्ट्रीय कोविड-19 वैक्सीनेशन अभियान के लिए तीन जनवरी, 2022 से इस कार्यक्रम के लिए स्वास्थ्य विभाग से समन्वय स्थापित करें। जिला एवं खंड स्तर पर जिला मजिस्ट्रेट और उप जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में स्वास्थ्य समिति की बैठकें की जाएं, जिनमें शिक्षा विभाग के अधिकारियों को शामिल किया जाए।
इन्हें दी जाएगी एक और खुराक
प्रदेश में एहतियात के तौर पर उन स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों (एचसीडब्ल्यू) और फ्रंट लाइन वर्कर्स (एफएलडब्ल्यू) जिन्हें दोनों डोज प्राप्त हैं, ऐसे लाभार्थियों को 10 जनवरी 2022 से कोविड-19 वैक्सीन की एक और खुराक प्रदान की जाएगी। यह एहतियाती खुराक दूसरी खुराक देने की तारीख से 9 महीने यानी 39 सप्ताह पूरे होने पर दी जाएगी। दूसरी खुराक ले चुके 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के बीमार व्यक्तियों को डॉक्टर की सलाह पर खुराक प्रदान की जाएगी।
140,15,594 को मिली डोज
आदेश में कहा गया है कि प्रदेश में 28 दिसम्बर, 2021 तक 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग वाले नागरिकों में से 140,15,594 को कोविड वैक्सीन की डोज दी जा चुकी है, जिसमें 77,60,721 को प्रथम डोज एवं 62,54,873 को दूसरी डोज दी जा चुकी है।