कोविशील्ड से कोवाक्सिन का खराब होने का प्रतिशत दोगुना है। अभी तक खराब हुई डोज में कोविशील्ड की 2.4 और कोवाक्सिन की 4.8 प्रतिशत डोज खराब हुई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कोविशील्ड शुरू से ही लग रही है। कई बार कोविशील्ड की पहली डोज लगवाने वाले लोग भी दूसरी डोज लगवाने के लिए कोवैक्सीन केंद्र पर पहुंच जाते हैं। वयल खोलने के बाद ही इसकी जानकारी होती है और डोज बेकार हो जाती है।
जनप्रतिनिधियों के दबाव में भी हो रही बर्बाद
यह भी देखने में आया कि जनप्रतिनिधियों के दबाव के चलते वैक्सीन बेकार हो रही है। कई जनप्रतिनिधि अपनी राजनीति चमकाने के लिए अपने क्षेत्रों में कैंप लगवा रहे। बताया जाता है कि दो लोगों के आने पर ही यह लोग वायल खुलवा लेते हैं। चार घंटे के अंतराल में यह जनप्रतिनिधि दस लोगों को टीकाकरण केंद्र पर नहीं ला पाते और डोज बेकार हो जाती है।
टीकाकरण में लगी टीमों को सख्त निर्देश दे दिए गए हैं कि जब तक पर्याप्त लोग न हों वैक्सीन की वायल को न खोलें। कर्मचारियों को किसी के दबाव में नहीं आने को कहा गया है। अब दस आदमी होने पर ही डोज लगाई जा रही है।
- डॉ. एसके झा, सीएमओ हरिद्वार