प्रिंसिपल को संबोधित पत्र में डॉक्टर ने लिखा ‘मैक्स अस्पताल में कुछ मरीजों में कोरोना वायरस सकारात्मक पाए गए हैं। इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से विभाग में मास्क, सेनेटाइजर और कैप आदि की जरूरत है’। यह पत्र बुधवार रात से बृहस्पतिवार तक व्यापक स्तर पर वायरल हो गया।
इससे जहां स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया वहीं आम लोगों में भी खौफ पैदा हो गया। दून मेडिकल अस्पताल से सीएमओ, डीएम, स्वास्थ्य महानिदेशालय और सचिवालय तक में हड़कंप मचा रहा। एलआईयू और अन्य खुफिया एजेंसियां भी इसके बारे में रात से ही जानकारी जुटाती रही।
स्थिति यह हो गई थी कि दिल्ली, मुंबई और मुरादाबाद आदि शहरों व गांवों से लोग अपने परिचितों की कुशलक्षेम पूछते हुए एहतियात बरतने को कहने लगे। दोपहर करीब 12 बजे दून मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष सायना ने एक पत्र मीडिया को जारी किया। जिसमें बताया कि ‘फोरेंसिक मेडिसिन विभाग द्वारा कोरोना संक्रमण से संबंधित पत्र जो चार मार्च को जारी हुआ था, सोशल मीडिया मेें वायरल हो रहा है।
इस संबंध में संबंधित विभाग से स्पष्टीकरण के बाद यह पाया गया कि यह सूचना असत्य और निराधार हैं। इस पर डॉक्टर ने कहा कि उन्होंने भूलवश यह लिख दिया है। डॉक्टर हीरालाल ने प्रिंसिपल को लिखित माफीनामा भी दिया है। पत्र के ऊपरी हिस्से में कंप्यूटर से तो चार मार्च 2020 की तिथि अंकित है, लेकिन नीचे जहां साइन हैं, वहां दो जगह चार फरवरी 2020 दर्ज है।
उत्तराखंड नर्सेज सर्विसेज एसोसिएशन ने उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन की बेमियादी हड़ताल को नैतिक समर्थन देने का फैसला किया है। एसोसिएशन की प्रदेश महामंत्री कांति राणा ने समर्थन की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि राजकीय नर्सेज भी एसोसिएशन के धरना प्रदर्शन में शामिल होकर प्रमोशन में आरक्षण का विरोध करेंगी। लेकिन अति आवश्यक सेवाएं और कोरोना वायरस के हाई अलर्ट के कारण अभी नर्सेज अपनी सेवाएं बाधित नहीं करेंगी।
उन्होंने कहा कि यह आम जनमानस के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा संवेदनशील मामला है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि वह प्रमोशन पर लगी रोक को तत्काल प्रभाव से हटाए और गतिरोध को खत्म करे।