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टीका ही बचाएगा अभियान: एग्जाम के चलते वैक्सीन लगवाने से हिचक रहे अभिभावक, चिकित्सकों की सलाह- पहले जीवन रक्षा, फिर परीक्षा

Fri, 25 Mar 2022 06:18 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

प्रदेश में 12 से 14 साल तक की उम्र के बच्चों को कोरोना का टीका लगाने की विधिवत शुरुआत 16 मार्च को हुई थी। आजकल परीक्षाएं चल रही हैं, ऐसे में उन्हें इस बात का डर है कि अगर बच्चे को बुखार आया तो परीक्षा प्रभावित हो सकती है। डॉक्टर ऐसे अभिभावकों को समझा रहे हैं कि सबसे पहले जीवन की रक्षा है, उसके बाद बाकी सब परीक्षा हैं।
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बच्चों को लगा कोरोना का टीका - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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परीक्षाओं के कारण कई अभिभावक अपने 12 से 14 साल तक के बच्चों को टीका लगाने में हिचक रहे हैं। वहीं बच्चों में कोरोना का टीका लगवाने केा लेकर उत्साह नजर आ रहा है। प्रदेश में 12 से 14 साल तक की उम्र के बच्चों को कोरोना का टीका लगाने की विधिवत शुरुआत राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस पर 16 मार्च को देहरादून के जिला राजकीय गांधी शताब्दी अस्पताल में हुई। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. तृप्ता बहुगुणा ने राजकीय जिला अस्पताल के गांधी शताब्दी परिसर से इस टीकाकरण अभियान की शुरूआत की।

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 बच्चे को बुखार आया तो परीक्षा हो सकती है प्रभावित
16 मार्च को को जिले में 12 से 14 साल तक की आयु वर्ग के 855 बच्चों को कोरोना का कोर्बेबैक्स टीका लगाया गया था। तब कुछेक सरकारी अस्पतालों में ही इस आयु वर्ग के बच्चों के लिए टीकाकरण केंद्र बनाए गए थे। धीरे-धीरे अस्पतालों में भीड़ बढ़ने लगी तो बच्चों की सहूलियत और भीड़ के चलते उनमें कोरोना संक्रमण की संभावना को देखते हुए केंद्रों की संख्या बढ़ाई गई।

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वर्तमान में ऋषिकेेष एम्स, राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल, जिला कोरोनेशन व गांधी शताब्दी अस्पताल, सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों समेत 63 केंद्रों पर इस आयु वर्ग में भी टीकाकरण हो रहा है। इसके अलावा विभिन्न स्कूलों में भी टीके लगाए जा रहे हैं। कई अभिभावकों ने बातचीत में बताया कि वह अपने बच्चों को कोरोना से बचाने के लिए टीके का सुरक्षा कवच देना चाहते हैं।

आजकल परीक्षाएं चल रही हैं, ऐसे में उन्हें इस बात का डर है कि अगर बच्चे को बुखार आया तो परीक्षा प्रभावित हो सकती है। डॉक्टर ऐसे अभिभावकों को समझा रहे हैं कि सबसे पहले जीवन की रक्षा है, उसके बाद बाकी सब परीक्षा हैं। डॉक्टर यह भी बता रहे हैं कि जरूरी नहीं कि टीका लगने से बुखार आएगा ही। अगर बुखार आता भी है तो डॉक्टर की सलाह पर बुखार की दवा ले सकते हैं। इसके अलावा परीक्षा में अगर एक दिन का अंतराल भी है तो उस दिन टीका लगा लें। 

सरकारी अस्पतालों में पूछ रहे अभिभावक 

कई अभिभावक बच्चों को टीकाकरण लगाने के लिए सरकारी अस्पतालों से जानकारी ले रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में चूंकि पहले से विभिन्न आयु के वर्गों के लिए टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं, उनमें भी बच्चों को टीका लग रहा है। ऐसे में बच्चों को टीका लगाने के लिए टीकाकरण केंद्रों के बारे में पता करने में दिक्कत नहीं हो रही है।

संस्थान के बच्चों के लिए स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से विशेष टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। 12 साल से अधिक उम्र के 68 बच्चों को ‘कोर्बेक्स’ टीके के पहली डोज और 17 साल से अधिक उम्र के बच्चों को कोविशील्ड की दोनों डोज लगाई जा चुकी है। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखने हुए संस्थान के सभी शिक्षक, कर्मचारी पूरी तरह से वैक्सिनेटेड हैं। -अमित शर्मा,  प्रधानाचार्य, एनआईईपीवीडी

कोरोना टीका लगाने के लिए मैं बहुत उत्साहित था। बीते बुधवार को ‘कोर्बेक्स’ टीके की पहली डोज लगाई। बच्चों के लिए स्कूल भी पूरी तरह से खुल गए हैं। ऐसे में टीकाकरण अभियान बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने में मदद करेगा। - दक्ष भारद्वाज, 13 वर्षीय

मैंने कोविड की दोनों डोज लगा ली है। कोविड टीके का बेसब्री से इंतजार था। स्कूल भी पूरी तरह से खुल गए हैं। टीका लगाने के बाद मैं ख़ुद को कोरोना से सुरक्षित महसूस कर रही हूँ। 12 साल से अधिक उम्र के सभी बच्चों को टीका लगवाना चाहिए। -मीशा जुयाल, 15 वर्षीय

 कोरोना वैक्सीन लगाने के लिए मैं बहुत उत्साहित हूँ। मुझे इसका बेसब्री से इंतजार था। मैं आज ही कोरोना टीके की पहली डोज लगाऊँगा। - एहसान गुप्ता, 15 वर्षीय।

 कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए टीकाकरण बहुत जरूरी है। मैंने कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लगवा ली है। जितना जल्दी सभी लोग अपना वैक्सिन ले लेंगे उतना जल्दी ही हमारा देश कोरोना मुक्त होगा। -मालती, 17 वर्षीय
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सभी बच्चों की स्थिति सामान्य 

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. दिनेश चौहान ने बताया कि टीके से बच्चों पर किसी तरह का कोई दुष्प्रभाव का अब तक कोई मामला सामने नहीं आया है। इसलिए सभी को चाहिए कि वह कोरोना से बचाव को टीके का सुरक्षा कवच लगा लें। डॉ. चौहान ने आमजन से अपील की है कि इस आयु वर्ग के बच्चों को भी टीका लगाने के लिए लोग अधिक से अधिक संख्या में आगे आएं।

पहले दिन 855 को, बृहस्पतिवार को 1581 को लगे टीके 

जिले में पहले दिन यानि 16 मार्च को 12 से 14 साल तक की आयु वर्ग के 855  बच्चोीं को कोरोना के टीके लगे थे। जबकि, बृहस्पतिवार को इस आयु वर्ग में 1581 बच्चों को कोरोना के टीके लगे। डॉ. चौहान ने बताया कि शुक्रवार (आज) के लिए 65 टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं। लगभग एक हफ्ते में दो दिन होली की छुट्टी भी रही। इसके बावजूद इस अवधि में जिले में 12 से 14 साल के आयु वर्ग में 7712 बच्चों को कोरोना के टीके लग चुके हैं। परीक्षाएं संपन्न होने के बाद इसमें और तेजी आएगी।

टीका ही बचाएगा अभियान
पूरे देश के साथ उत्तराखंड में भले ही कोरोना की तीसरी लहर का संक्रमण कम हो चुका है लेकिन टीके और मास्क की भूमिका अब भी इसकी रोकथाम में अहम हथियार हैं। मास्क जहां संभावित चौथी लहर के संक्रमण का प्रसार रोकने में मददगार साबित होगा, वहीं टीका कोरोना से बचाव में सुरक्षा कवच बनेगा।

कोरोना संक्रमण कम होने के चलते कई लोग भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क कम पहन रहे हैं। साथ ही कोरोना के टीके लगाने में भी कई लोग कोताही बरत रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना का संक्रमण भले ही देश में कम हो गया है लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। इसलिए भीड़भाड़ में मास्क जरूर पहने और टीका भी अवश्य लगा लें।

कोरोना के स्टेट कोऑर्डिनेटर एवं राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एनएस खत्री ने बताया कि लोगों को मास्क को रूटीन हिस्सा बना लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि दुनिया के कई हिस्सों में कोरोना के मामले फिर बढ़ने लगे हैं। ऐसे में अपने देश में फिर से कोरोना संक्रमण बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे में सभी को आवश्यक रूप से कोरोना का टीका लगवा लेना चाहिए। अब स्कूल भी खुल गए हैं। ऐसे में 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों को भी कोरोना का टीका जरूर लगवाएं। 
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