पीएमओ पहले ही मामले का संज्ञान ले चुका
इन कारणों से की गई वन अफसरों के खिलाफ कार्रवाई
- कॉर्बेट टाइगर रिजर्व पार्क के तहत कंडी रोड निर्माण, मोरघट्टी और पाखरों वन विश्राम गृह परिसर में भवनों का निर्माण, पाखरों वन विश्राम गृह के समीप जलाशय का निर्माण किया गया था। इसके अलावा पाखरों में प्रस्तावित टाइगर सफारी में वृक्षों के अवैध पातन किया था। जिस पर एनटीसीए के जांच दल ने कार्रवाई की आख्या प्रस्तुत की थी।
- टाइगर सफारी निर्माण के लिए मात्र 163 पेड़ काटे जाने थे, लेकिन अनुमति से कहीं अधिक पेड़ काट दिए गए।
- इसके अलावा कंडी रोड का निर्माण, मोरघट्टी और पाखरो वन विश्राम गृह परिसर में भवनों का निर्माण, जलाशय का निर्माण, टाइगर सफारी, वृक्षों का पातन के संबंध में वैज्ञानिक, प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति तक नहीं ली गई।
- यहां कंक्रीट का ढांचा खड़ा किया गया, जो अवैध था। हालांकि बाद में इस गिरा दिया गया था।
- पाखरो से कालागढ़ पेट्रोलिंग रोड के आसपास के क्षेत्र से बड़ी मात्रा में मिट्टी हटाई गई, जो भारतीय वन अधिनियम 1927 और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के प्राविधानों के विरूद्ध है।
- इस दौरान जेएस सुहाग को मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक का कार्यभार अतिरिक्त रूप में आवंटित था।
- ऐसे तमाम मामले और है, जिनकी परतें अभी खुलनी बाकी हैं।
निलंबित अधिकारियों ने जानबूझकर छुपाए तथ्य
प्रमुख सचिव वन रमेश कुमार कुमार सुधांशु की ओर से जारी निलंबन आदेश में साफ कहा गया है कि निलंबित किए गए वन अधिकारी वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की रक्षा करने के अपने कर्तव्यों में विफल रहे हैं। इसके अलावा वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास के विनाश किए जाने संबंधी तथ्यों को जानबूझकर राज्य सरकार से छिपाया गया, जो उनकी सत्यनिष्ठा को संदेहास्पद बनाता है।