उत्तराखंड में उपचुनाव की हार को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की नाराजगी के बाद प्रदेश संगठन में नए समीकरण उभरने के संकेत मिल रहे हैं।
उपचुनाव के नतीजों ने सेंट्रल लीडरशिप को झटका दिया और सोमवार को दिल्ली में हुई बैठक से प्रदेश के क्षत्रप सकते में है।
नतीजों को लेकर पार्टी सुप्रीमो अमित शाह इतने नाराज होंगे, यह अंदाजा प्रदेश के नेताओं को भी नहीं था।
अब पार्टी में गुटबाजी नहीं चलेगी
दिल्ली की बैठक में इस बार एक बात तो साफ हो गई है कि नेता अभी तक पार्टी को जिस ढर्रे पर चलाते रहे, उसे बदलना होगा।
बैठक से यह संदेश भी साफ हो गया है कि अब गुटबाजी नहीं चलेगी और व्यक्ति विशेष की पसंद के बजाय पार्टी के निर्णय को सर्वोच्च प्राथमिकता माना जाएगा।
लेकिन इस बैठक में अमित शाह के तेवरों ने एक बात और स्पष्ट हो गई है कि वह मौजूदा प्रदेश संगठन से कतई खुश नहीं है।
रमेश पोखरियाल निशंक से नाराज हैं अमित शाह
चुनाव नतीजों को लेकर प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत व हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक से राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की नाराजगी का आभास पहले ही हो गया था।
बैठक में हरिद्वार के सांसद रमेश पोखरियाल निशंक से सीधे तौर पर नाराजगी जता दी गई।
और प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत को फटकार लगाना अप्रत्यक्ष रूप से खंडूडी कैंप को भी संदेश दे दिया गया।
किसी गुट को मान्यता मिलने की संभावना खत्म
ताकि निकट भविष्य में जब प्रदेश अध्यक्ष जैसे पदों को लेकर कोई निर्णय लिया जाए तो उस वक्त गुट या व्यक्ति विशेष की पसंद के बजाय संगठन को मजबूती देने वाले नेताओं को फ्रंट रनर के तौर पर देखा जाएगा।
यही वजह थी कि सोमवार की सुबह से ही प्रदेश अध्यक्ष को बदलने की चर्चाएं आम थी। अध्यक्ष पर तो अभी कहना जल्दबाजी है लेकिन यह तय माना जा रहा है कि किसी न किसी स्तर पर संगठन में बदलाव होगा।
और, इस बार जो समीकरण तैयार हो रहे हैं उनसे तो नहीं लगता कि किसी गुट विशेष को मान्यता मिलेगी।