लचर स्वास्थ्य सेवाओं के चलते उत्तराखंड के टिहरी में बच्चा जनने के बाद एक महिला की मौत हो गई। महिला के परिजनों ने डाक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में जमकर हंगामा किया और तीन घंटे तक डॉक्टरों को घेरे रखा।
मौके पर पहुंचकर सीएमओ और तहसीलदार ने किसी तरह लोगों को शांत कराया। सीएमओ ने कहा कि मामले की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सुनार गांव (चडोगी) निवासी राजेंद्र कोहली की पत्नी आशा (23) को बीती रात प्रसव पीड़ा हुई। रात 1.30 बजे परिजन उसे लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थत्यूड़ पहुंचे।
ऑपरेशन के बाद हुआ अत्यधिक रक्तस्राव
मंगलवार सुबह सात बजे बच्चा जनने के समय डाक्टरों ने महिला के पेट में चीरा मारा। शिशु का जन्म तो हो गया लेकिन महिला बेहोश हो गई और उसे अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा।
महिला की स्थिति बिगड़ने लगी तो डाक्टरों ने उसे देहरादून रेफर कर दिया। सुबह करीब नौ बजे देहरादून ले जाते वक्त महिला ने कोलूखेत में दम तोड़ दिया।
डॉ. का है कहना
गर्भवती महिला में पहले से ही खून की कमी थी। चिकित्सकों ने रात को ही उन्हें देहरादून ले जाने का सुझाव दिया था, लेकिन परिजनों ने जबरदस्ती की। सही बात जनता के सामने आए, इसके लिए विभाग की ओर से जांच भी की जाएगी।
-डॉ. एसपी अग्रवाल, सीएमओ टिहरी
पहले भी हुई हैं प्रसव के दौरान मौतें
केस-1
अगस्त 2011 में देवप्रयाग के खडोली की एक महिला को प्रसव के लिए हिंडोलाखाल लाया जा रहा था। खडोली गांव से हिंडोलाखाल की पैदल दूरी पांच किमी होने के कारण प्रसव पीड़ा से कराहते हुए महिला ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया था।
केस-2
पांच जनवरी 2013 को लचर स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में लंबगांव अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में गलियाखेत गांव के राजेंद्र की पत्नी कविता ने बच्चे को जन्म देने के बाद दम तोड़ दिया था।
केस-3
जनवरी 2012 के पहले सप्ताह में चौंदार की प्रसव पीड़िता को पहले परिजनों ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रतापनगर ले गए। बावजूद यहां पर उपचार की सुविधा नहीं होने कारण उसे देहरादून रेफर किया, जिसने चंबा के पास दम तोड़ा दिया था।
केस-4
बनाली गांव निवासी आजाद सिंह रावत की पत्नी नीलम को 21 मार्च 2014 को प्रसव पीड़ा हुई। परिजन उसे प्रतापनगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। बच्चा जनने के बाद अधिक रक्तस्राव के कारण महिला की मौत हो गई थी।