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दो सांसद, तीन डीएम, पर भगवान भरोसे है तीर्थनगरी

Sun, 27 Apr 2014 06:57 PM IST
हेमवती नंदन भट्ट/ अमर उजाला, ऋषिकेश
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एक ऐसा शहर, जिसके दो सांसद और तीन डीएम ‘मालिक’ हों। जाहिर सी बात है दिमाग में एक खूबसूरत शहर की तस्वीर उभरेगी।
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हम बात कर रहे हैं योग की अंतरराष्ट्रीय राजधानी मानी जाने वाली तीर्थनगरी और तीर्थक्षेत्र मुनिकीरेती, स्वर्गाश्रम, तपोवन और लक्ष्मणझूला की।

हकीकत है बदरंग
दून, टिहरी और पौड़ी जिले के अंतर्गत आने वाले इस क्षेत्र का हरिद्वार और पौड़ी लोकसभा के सांसद प्रतिनिधित्व करते हैं। फिर भी यहां समस्याओं का अंबार है।

न चलने को साफ सुथरी सड़कें न पार्किंग। राहगीरों के लिए पीने का पानी नहीं तो गंगा तटों पर स्नानार्थियों के लिए सुरक्षा के इंतजाम नहीं। सड़कों पर घूमते आवारा पशु और बेलगाम यातायात पर्यटकों का स्वागत करते हैं।

अपनों के लिए कुछ नहीं कर पाए नेताजी
चुनाव के दौरान वोट की अपील के लिए ही प्रत्याशी यहां आते हैं। पिछली लोकसभा में पौड़ी क्षेत्र के स्वर्गाश्रम और मुनिकीरेती, जबकि हरिद्वार लोस में शामिल नगर क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी के सांसद रहे। राज्य ही नहीं केंद्र में अपनी सरकार होने के बावजूद नेताजी ‘अपनों’ के लिए कुछ नहीं कर पाए।
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चुनाव जीतने के बाद यदि कभी यहां आए भी तो उन्होंने वीवीआईपी तेवरों और पार्टी कार्यकर्ताओं के घेरे से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत से रूबरू होने की जहमत नहीं उठाई।
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सरकारी विभागों ने कई दफा समस्याओं के निराकरण को योजनाएं तैयार की, मगर सांसदों ने मंजूरी के लिए सरकार से पैरवी नहीं की। तीनों जिलों के जिलाधिकारियों का भी क्षेत्र के प्रति यही रवैया रहा।

इन परेशानियों से जूझते हैं सैलानी
गंगातटों पर अतिक्रमण और गंदगी की रोकथाम के उपाय नहीं।
नगर में तीर्थयात्रियों के आश्रय के लिए बनी 80 फीसदी धर्मशालाओं पर भूमाफिया के कब्जे, गरीब यात्री और भिक्षुक सड़कों पर रात गुजारते हैं।

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हर रोज क्षेत्र में आने वाले हजारों निजी और टैक्सी वाहनों के लिए एक भी स्थायी पार्किंग नहीं।
नगर के बाजार, दून मार्ग, रेलवे मार्ग, हरिद्वार हाईवे जैसी व्यस्त सड़कों पर दोनों ओर से स्थायी और अस्थायी अतिक्रमण।
रेलवे स्टेशन, बस अड्डा, त्रिवेणीघाट जैसे महत्वपूर्ण स्थलों पर सुरक्षा के कोई प्रबंध, प्लानिंग नहीं।

नगर की लंबित योजनाएं
तीन दशक से त्रिवेणीघाट से दूर बह रही गंगा की स्थायी जलधारा को घाट तक लाने की योजना
नगर पालिका परिसर में मल्टीस्टोरी कांप्लेक्स, पार्किंग प्रोजेक्ट आठ साल से लंबित
शहर और आसपास के लिए सीवर योजना का मास्टर प्लान

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आस्थापथ पर महत्वाकांक्षी एयर टैक्सी योजना
पर्यटन विकास के लिए संजय झील प्रोजेक्ट
मरीन ड्राइव का विस्तारीकरण और स्टील गार्डर ब्रिज

मुनिकीरेती में समस्याएं और लंबित योजनाएं
देसी-विदेशी योग साधकों के लिए सरकारी साधना स्थल और प्रचार प्रसार केंद्र नहीं
सैलानियों की गाइडेंस के लिए पर्यटन सूचना केंद्र और प्रशिक्षित गाइड नहीं
गंगा पर आठ साल से प्रस्तावित ब्रिज का निर्माण नहीं
पर्यटन विकास के लिए लाइट एंड साउंड शो थियेटर योजना अधर में
पौड़ी संसदीय क्षेत्र में पड़ने वाले मुनिकीरेती, तपोवन क्षेत्र में स्थायी पार्किंगों की कमी
सार्वजनिक स्टेंडपोस्ट, यूरीनल, टॉयलेट नहीं

स्वर्गाश्रम, नीलकंठ क्षेत्र का भी बुरा हाल
स्वर्गाश्रम-लक्ष्मणझूला तक सुविधा संपन्न गंगा घाटों का प्रोजेक्ट। गहरे गंगा तटों पर स्नानार्थियों के लिए अन्य सुरक्षात्मक उपाय भी नहीं
निकाय का दर्जा मिलने के दो साल बाद भी नगर पंचायत को नहीं मिल रही शासन से वित्तीय मदद, यात्री सुविधाएं जुटाने में दिक्कतें
तीर्थक्षेत्र में सार्वजनिक स्टेंडपोस्टों, अच्छी सड़कों का अभाव, सड़क से गंगा घाटों तक पथ प्रकाश की व्यवस्था नहीं
नीलकंठ क्षेत्र में यात्रियों की सुविधा के लिए बाईपास मार्ग, डबल स्टोरी पार्किंग, सामुदायिक भवन, सीसी ब्रिज योजनाएं आठ साल से लंबित

नीलकंठ का एकमात्र यातायात मार्ग का डेढ़ दशक से डामरीकरण नहीं हुआ, आठ साल पहले स्टेट हाईवे घोषित होने के बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी
यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था नहीं, यात्राकाल में दर्शन के बाद बैरंग लौटते हैं लोग
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