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...तो अब ‘एक्ट आफ गॉड’ पर मिलेगा मुआवजा

Mon, 02 Jun 2014 05:30 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
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‘ओ माई गॉड’ फिल्म में दुकान के मुआवजे के लिए कांजीलाल मेहता को भले ही एक लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी थी लेकिन देहरादून जिला प्रशासन ‘एक्ट आफ गॉड’ पर खुशी से रिलीफ मनी देने को तैयार है।
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इस बाबत नियमावली खंगाली जा रही है कि इस मद में कितनी मुआवजा राशि पीड़ितों को दी जाए।

रविवार तड़के आए तूफान में इंद्रेशनगर में छह मकानों में पानी घुसा, दीवार गिरी और तीन कारें और पांच बाइक टूट गईं।

कार और बाइक के मालिक परेशान हैं कि यह एक्ट आफ गॉड है पता नहीं इंश्योरेंस वाले मुआवजा देते हैं कि नहीं। लेकिन अफसरों ने वादा किया है कि मुआवजा दिया जाएगा।

नियमावली तलाश कर रहे अधिकारी

जिलाधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने कहा कि एक्ट आफ गॉड पर मुआवजा तो देंगे लेकिन नियमावली की तलाश कर रहे हैं कि इस मद में कितनी धनराशि दी जाएगी।

फिलहाल इस बाबत रिलीफ देने की घोषणा तो कर दी गई है, मुआवजा राशि के बारे में बाद में फैसला लिया जाएगा। रविवार तड़के आए इस बारिश और तूफान ने एक मामला और पैदा कर दिया है।

बारिश का पानी घर में घुसने से जिसके अन्न और वस्त्र खराब हुए हैं, उन्हें कितना मुआवजा दिया जाना है। इस साल अभी ‘आपदा’ की मुआवजा राशि भी तय नहीं हुई है।
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धनराशि तय होने के पहले आ गई ‘आपदा’

तहसीलदार गुरदीप सिंह काला का कहना है कि हर साल ‘आपदा’ धनराशि तय होती है। लेकिन उनका कहना है कि इस बार धनराशि तय होने के पहले ‘आपदा’ आ गई है।

अगर पिछले साल के लिहाज से मुआवजा दिया जाएगा तो अन्न की खराबी के लिए दो हजार रुपए और इतनी ही धनराशि वस्त्रों की खराबी के लिए दी जाएगी।

लेखपालों को ‘आपदा’ प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे करने के लिए कहा गया है। उनकी रिपोर्ट के बाद प्रशासन अगला फैसला लेगा। हो सकता है कि सर्वे रिपोर्ट आने तक इस साल की मुआवजा धनराशि ही तय कर ली जाए।

क्या है एक्ट ऑफ गॉड
इंश्योरेंस की नियमावली में एक बिंदु है एक्ट आफ गॉड। इसमें आंधी, तूफान, आकाशीय बिजली वगैरह आदि घटनाओं को रखा गया है। इसका मतलब है कि यह कार्य ईश्वर करता है इसलिए इसमें मुआवजा देय नहीं होगा।
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