राज्य में उपजे वित्तीय संकट से लेकर मंत्रिमंडल विस्तार तक कई राजनीतिक समस्याओं से घिरे मुख्यमंत्री हरीश रावत जल्द ही विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर सकते हैं। सूत्रों की मानें तो चौतरफा समस्याओं से घिरे मुख्यमंत्री रावत यह कदम शीघ्र उठाने जा रहे हैं। दूसरी ओर मुख्यमंत्री के दोपहर बाद अचानक दिल्ली जाने के बाद विधानसभा भंग करने की सिफारिश की आशंकाओं को और बल मिला है।
राजनीतिक हलकों से लेकर नौकरशाही तक में यह चर्चा आम रही कि मुख्यमंत्री रावत पार्टी पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को बजट समेत तमाम राजनीतिक समस्याओं से अवगत कराने और आलाकमान की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर सकते हैं।
पार्टी से जुड़े आला सूत्रों का कहना है कि विनियोग विधेयक को लेकर सरकार के सामने अजीबोगरीब संकट हैं। सरकार यदि विशेष विधानसभा सत्र बुलाकर वित्त विधेयक को नए सिरे से पास कराना चाहे तो उसके सामने एक बार फिर फ्लोर टेस्ट जैसी स्थिति खड़ी जाएगी।
सियासी संकट में मदद की वसूली की तैयारी
हरीश रावत
- फोटो : अमरउजाला
उधर, सियासी संकट के दौरान तमाम मोर्चों पर अहम भूमिका निभाने वाले पूर्व मंत्री नवप्रभात समेत दर्जन भर कांग्रेसी विधायकों को मंत्री बनाने को लेकर मुख्यमंत्री पर खासा दबाव है। सूत्रों की मानें तो पूर्व नवप्रभात के अलावा कभी भाजपा सांसद सतपाल महाराज खेमे में शामिल रहे पूर्व मंत्री राजेंद्र भंडारी, विधानसभा उपाध्यक्ष अनुसूइया प्रसाद मैखुरी, डॉ. जीतराम, गणेश गोदियाल समेत दर्जन भर विधायक मंत्री बनने की दौड़ में शामिल है। इन सभी दावेदारों के अपने-अपने तर्क भी है।
भाजपा सरकार में मंत्री रह चुके विधायक राजेंद्र भंडारी का दावा है कि वे दो बार विधायक रहने के साथ ही वरिष्ठ नेता है। जबकि विधायक डॉ. जीतराम आर्य के लिए राजस्व एवं सिंचाई मंत्री यशपाल आर्य खुले तौर पर मंत्री बनाने की मांग कर चुके हैं।
सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री रावत बजट सत्र बुलाकर नई मुसीबत नहीं मोल लेना चाहते। अदालत के आदेश पर 10 मई को हुए फ्लोर टेस्ट और हाल ही में संपन्न राज्यसभा चुनाव के बाद मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए हर कोई मुख्यमंत्री के साथ अपने-अपने अंदाज में राजनीतिक सौदेबाजी कर रहा है।
मंत्री बनाने की जिद पर अड़े कई विधायक
हरीश रावत
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सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि मंत्री बनने की दौड़ में शामिल विधायक मुख्यमंत्री से आश्वासन ही नहीं, विधानसभा सत्र से पहले मंत्री बनाए जाने की जिद पर अड़ गए हैं। ऐसे में तमाम राजनीतिक झंझावतों के बीच मुख्यमंत्री रावत विधानसभा भंग करने की सिफारिश राज्यपाल से कर दें तो कोई ताज्जुब नहीं।
एक धड़ा सरकार चलाने के पक्ष में
सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जहां मंत्रियों, विधायकों का एक धड़ा इस पक्ष में है कि विधानसभा भंग कर तमाम परेशानियों से मुक्ति पा ली जाए, वहीं एक गुट ऐसा भी है जो इस बात का पक्षधर है कि विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर बजट पारित कराया जाए और सरकार का कार्यकाल पूरा किया जाए। लेकिन वर्तमान में राज्य में जो वित्तीय और राजनीतिक संकट खड़ा है, इसे देखते हुए यही लगता है कि अब यह सरकार ज्यादा दिन चलने वाली नहीं।