फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तरकाशी में बादल फटने से मची तबाही

Thu, 07 Aug 2014 10:54 PM IST
अमर उजाला, उत्तरकाशी
विज्ञापन
विज्ञापन
बुधवार देर रात बादल फटने से कामर एवं जामक गांव में भारी नुकसान हुआ है। क्षेत्र की पांच आरसीसी पुलिया और एक घराट सहित कई हेक्टेयर कृषि भूमि तबाह हो गई।
विज्ञापन


कामर गांव के पास छानी में फंसे छह लोगों को आपदा प्रबंधन दल ने रस्सियों के सहारे सुरक्षित निकाला। पुलिया एवं रास्ते तबाह होने से दर्जनों ग्रामीण मवेशियों समेत अब भी छानियों में फंसे हैं।

कामर गांव के ऊपर जंगल में बादल फटने से कामर गाड के साथ ही अन्य छोटे गदेरों में उफान आ गया। सूचना मिलते ही आपदा प्रबंधन का बचाव दल कामर गांव पहुंचा।

लोगों के पास सिर्फ दो दिन का राशन

दोनों ओर उफनते गदेरों के बीच एक छानी पर फंसे सात लोगों को सुरक्षित निकाला गया। उनके मवेशी अभी वहीं फंसे हैं। कामर गांव की घटकाणी गाड के दूसरी ओर की छानियों में 15 परिवार फंसे हैं।

जामक गांव की भदियारा, मकरती एवं ताला नामे तोक में भी करीब 50 ग्रामीण दो सौ से अधिक मवेशियों के साथ फंसे हैं।

कामर गांव के महावीर राणा ने बताया कि छानियों में फंसे ग्रामीणों के पास दो-तीन दिन का ही राशन है। गदेरों में आए उफान को देखकर जल्द रास्ते बहाल होने की उम्मीद नहीं है।

ऐसे में शीघ्र ग्रामीणों को सुरक्षित गांव पहुंचाने या उन तक रसद पहुंचाने के इंतजाम नहीं किए गए तो दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
विज्ञापन

गदेरे में उफान आने से बहे पुल, खेत

जामक गांव के विनोद चौहान, अरविंद गुसाईं, प्रमोद, सुनील, दलवीर ने बताया कि मनेरी भाली प्रथम चरण परियोजना की सुरंग पर बसे उनके गांव में वर्ष 1991 के भूकंप में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था। उनका कहना है कि रोज-रोज डर के साये में जीने और नुकसान उठाने से तो बेहतर है कि सरकार हमारे गांव को सुरक्षित स्थान पर विस्थापित कर दे।

अधिकारियों का कहना
कामर एवं जामक क्षेत्र में अतिवृष्टि से गदेरे में उफान आने से कुछ पुलिया, खेत आदि तबाह होने की सूचना है। छानियों में फंसे कुछ ग्रामीणों को आपदा प्रबंधन बचाव दल ने सुरक्षित निकाल लिया है। क्षेत्र में क्षति का आंकलन करने के लिए राजस्व की टीम भेज दी गई है।
-केके सिंह, एसडीएम भटवाड़ी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें