हरिद्वार अर्द्धकुंभ (2016) के पहले गंगा सफाई का काम पूरा हो जाएगा। केंद्रीय जलसंसाधन मंत्री उमा भारती राज्य सरकार को यह भी आश्वासन देकर गई हैं कि उनके मंत्रालय के स्तर पर लंबित मामलों का निस्तारण जल्द कर दिया जाएगा।
गंगा की सफाई को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ हुई बैठक में यह बात सामने आई कि उत्तराखंड में कई स्थानों पर गंगा में सीधा कचरा आ रहा है जिसकी रोक पर जल्द कार्ययोजना लागू होगी। गंगा को साफ रखने और उससे जुड़ी विभिन्न योजनाओं के लिए प्रदेश सरकार ने केंद्र को 9478 करोड़ रुपए का प्रस्ताव सौंपा है।
बुधवार को सचिवालय में उमा भारती और हरीश रावत की मौजूदगी में केंद्र्र और राज्य सरकार के अफसरों ने प्रस्तावों पर मंथन भी किया। बैठक में केंद्र सरकार के उपक्रम वाप्कोस और राज्य सरकार के बीच जल और ऊर्जा संसाधन, अवस्थापना विकास आदि परियोजनाओं को चिह्नित करने, उनकी योजनाएं बनाने के लिए करार हुआ।
उत्तराखंड सरकार ने बैठक में बाढ़ सुरक्षा के कार्य को जल्द से जल्द केंद्र से अनुमति देने पर जोर दिया। गंगा सफाई के लिए गंगा, यमुना और सहायक नदियों से लगे 132 कस्बों में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लान, मोबाइल कंप्रेशर गाड़ियां, गंगा नदी के किनारे पथ निर्माण का प्रस्ताव दिया गया। इसके लिए 7634 करोड़ रुपए की जरूरत बताई गई।
अर्द्धकुंभ से पहले ही गंगा की सफाई का काम होगा पूरा
730 स्थानों पर सामुदायिक शौचालयों को बनाने के लिए 219 करोड़ रुपए, 159 आधुनिक शवदाह गृहों के निर्माण के लिए 52 करोड़, बायोडाइजेस्टर सहित 1223 सचल शौचालयों के निर्माण के लिए 122 करोड़ रुपए, गंगा किनारे रह रहे लोगों की परंपराओं के अध्ययन के लिए 15 करोड़ रुपए का प्रस्ताव बनाया गया है।
बैठक में उमा भारती ने कहा कि अविरल और निर्मल धारा की परियोजनाओं को पीपीपी मोड में पूरा किया जाएगा। उन्होंने राज्य सरकार का पूरा सहयोग करने का इरादा जाहिर किया। बैठक के बाद मीडिया से उमा भारती ने कहा कि 2016 में अर्द्धकुंभ से पहले ही गंगा की सफाई का काम पूरा कर लिया जाएगा।
उनके मंत्रालयों के स्तर पर लंबित मामलों को जल्द ही निस्तारित किया जाएगा। बैठक में यह बात भी खुलकर सामने आई कि उत्तराखंड में भी गंगा में कई स्थानों पर कचरा जा रहा है। रुड़की, भगवानपुर, लंढौरा और हरिद्वार में कचरे के ट्रीटमेंट के लिए कामन एफ्यूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना पर जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बाढ़ नियंत्रण कार्योँ को शीघ्र ही स्वीकृति देने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा की सफाई के काम में प्रदेश सरकार केंद्र का पूरा सहयोग करेगी। इस बात पर भी सहमति बनी है कि बाढ़ सुरक्षा केकार्य के लिए दिल्ली में ही प्रदेश और संबंधित केंद्रीय अधिकारियों की बैठक हो जिससे तुरंत ही कार्ययोजना को लागू किया जा सके।
बाढ़ नियंत्रण का पैसा जल्द मिलने का किया आग्रह
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि गंगा की अविरलता पर कोई झगड़ा नही है। बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री से बाढ़ नियंत्रण केकार्यों के लिए जल्द पैसा देने का आग्रह किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ सुरक्षा कार्य के लिए समय से पैसा न मिलने के कारण सड़क निर्माण का सारा काम बिना सुरक्षा कार्य कराए ही पूरा करना पड़ा। इस बार अक्टूबर तक पैसा मिल जाता है तो सड़क निर्माण से पहले बाढ़ सुरक्षा का काम पूरा करा लिया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने सकारात्मक रुख दिखाया है और गंगा सफाई अभियान में उत्तराखंड को महत्व दिया है। प्रदेश सरकार की कोशिश होगी कि गंगा जैसी उत्तरकाशी में है, वैसी ही हरिद्वार में भी हो।
इको सेंसेटिव जोन पर सियासत
गंगोत्री इको सेंसेटिव जोन की गलत व्याख्या की बात करने वाली केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती अब इको सेंसेटिव जोन के व्यवहारिक पक्ष की समीक्षा की बात कर रही हैं। केंद्र सरकार ने दिसंबर 2012 में गंगोत्री इको सेंसेटिव जोन की अधिसूचना जारी की थी। क्षेत्रीय स्तर पर प्रदेश सरकार को दो साल का समय महायोजना तैयार करने के लिए दिया था।
2012 से जारी है इको सेंसेटिव विवाद
दिसंबर 2014 में यह समय पूरा हो रहा है और अभी महायोजना को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। सचिवालय में गंगा सफाई अभियान पर संयुक्त बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब उमा भारती ने कहा कि इको सेंसटिव जोन सैद्धांतिक रूप से सही है। पर इसके व्यवहारिक पक्ष में कुछ खामियां हैं।
इस खमियों को दूर करने के लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से वे खुद बात करेंगी। मंगलवार को केंद्रीय मंत्री का कहना था कि सेंसेटिव जोन की गलत व्याख्या की जा रही है। सेंसेटिव जोन के मामले में लोगों के हक हकूक का ध्यान रखा जाना चाहिए। इको सेंसेटिव जोन का विवाद दिसंबर 2012 में अधिसूचना के जारी होते ही सामने आ गया था।
तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने क्षेत्र के विकास कार्य ठप हो जाने का मुद्दा उठाते हुए इस अधिसूचना को रद्द करने की मांग भी की थी। इसके लिए बाकायदा विधानसभा से संकल्प पारित कर केंद्र को भेजा भी गया था। अब उमा भारती ने इसके व्यवहारिक पक्ष को नाकाफी बताकर एक तरह से सरकार को राहत भी है।
दूसरी तरफ उमा भारती सैद्धांतिक पक्ष को सही बताकर प्रदेश सरकार के सामने सेंसेटिव जोन की चुनौती को बरकरार रखे हुए हैं। इको सेंसेटिव जोन पर प्रदेश में भी एक राय नही है। जून 2013 की आपदा के बाद कई लोग इस अधिसूचना को जरूरी बता रहे हैं। पर्यावरणविद भी कह रहे हैं कि संवेदनशील क्षेत्र घोषित किए जाने से क्षेत्र को अनियोजित विकास से बचाया जा सकेगा।
एक वर्ग वह है जो संवेदनशील क्षेत्र के नाम पर स्थानीय लोगों के अधिकारों का हनन करने का आरोप लगा रहा है। अब हालात यह भी हैं कि क्षेत्र की अपेक्षाओं के अनुरूप विकास महायोजना तैयार करने के लिए राज्य सरकार के पास कुछ ही महीनों का समय है।
अभी तक महायोजना को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। हालांकि मानिटरिंग कमेटी इस मामले को लेकर दो बार बैठक कर चुकी है। अब महायोजना को अंतिम रूप दिया जाना है।