हिंदू धर्म के अधिकांश व्रत महिलाएं ही करती हैं, पर छठ पर्व में पूरा परिवार शामिल हो जाता है। छठ पर्व की शुरूआत महाभारत काल से मानी जाती है। पांडव जब वनवास काट रहे थे तो द्रोपदी ने कुल पुरोहित की आज्ञा प्राप्त होने पर युधिष्ठिर के साथ छठ व्रत पूजन किया था। सूर्यदेव ने प्रसन्न होकर युधिष्ठिर को अछूत ताम्रपात्र प्रदान किया। जिससे मुधर स्वादिष्ट भोजन हमेशा उपलब्ध रहता था। नारायण ज्योतिष संस्थान के विकास जोशी ने बताया कि द्रोपदी के व्रत पूजन से प्रसन्न होकर भगवान सूर्य (छठ माता) ने युधिष्ठिर को को राजपाट, धन दौलत, वैभव मान सम्मान, यश कीर्ति पुन: प्रदान किया।
छह पूजा कार्यक्रम पर एक नजर
- नहाय-खाय: छठ पर्व का प्रथम दिन नहाए खाय से शुरू होता है। नहाए-खाय आठ नवंबर को है।
- खरना : छठ व्रत का दूसरा दिन खरना नौ नवंबर को हैं। इस दिन पंचमी तिथि है। इसके बाद षष्ठी शुरू होगी।
- सायंकालीन अर्घ्य : छठ पर्व के तीसरे दिन कार्तिक शुक्ल पष्ठी को पूर्ण उपवास होता है। यह व्रत दस नवंबर को है।
- प्रात कालीन अर्घ्य : पष्ठी व्रत की पूर्णाहुति चतुर्थ दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होती है। 11 नवंबर को प्रातकालीन अर्घ्य दिया जाता है।