हर्रावाला में हादसे के बाद सिपाही राकेश दर्द से कराह रहे थे। सूचना पर वहां चीता पुलिसकर्मी भी पहुंचे, लेकिन उन्हें उठाने के बजाय वीडियो बनाने लगे। यही नहीं, बार-बार उनसे खुद उठने के लिए कह रहे थे। यह वीडियो जब वायरल हुई तो डीजीपी ने एसपी ट्रैफिक को मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
सिपाही के शरीर पर बाहरी चोट के निशान नहीं थे। केवल सिर में अंदरूनी चोट आई थी। ऐसे में चीता पुलिसकर्मी खुद उठने के लिए कहने लगे। वीडियो जिस समय की है, तब घटनास्थल पर इमरजेंसी वाहन नहीं आया था। यदि पुलिसकर्मी उन्हें उठाकर अपने साथ बाइक से अस्पताल ले जाते तो हो सकता था कि समय पर उपचार मिलने से सिपाही राकेश राठौर की जान बच जाती।
वीडियो सामने आने के बाद डीजीपी ने इसे गंभीरता से लिया है। उन्होंने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने एसपी ट्रैफिक देहरादून अक्षय प्रह्लाद कोेंडे को वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, घटना का समय, पुलिस का रिस्पांस टाइम, वीडियो की सत्यता आदि परखने के निर्देश दिए हैं। एंबुलेंस कितनी देर में पहुंची, इस बात की भी जांच की जाएगी।
पुलिस में इनाम की भी है व्यवस्था
डीजीपी अशोक कुमार ने पदभार संभालते ही हादसों में मदद पहुंचाने वालों के लिए पुरस्कार की घोषणा की थी। यदि कोई समय रहते किसी घायल को अस्पताल पहुंचाता है और उसकी जान बच जाती है तो उसे इनाम दिया जाता है। इस घटना से पुलिस के उन प्रयासों को भी धक्का लगा है, जब पुलिसकर्मी किसी घायल या मजबूर की मदद करते हैं।
बटुआ सड़क पर मिले तो खिंचवाते हैं फोटो
पुलिसकर्मी अक्सर अपने छोटे-मोटे प्रयासों को भी खूब प्रसारित करते हैं। किसी का बटुआ सड़क पर मिले और उसे वापस किया जाए तो सोशल मीडिया पर तस्वीर डालकर वाहवाही लूटी जाती है। किसी वृद्ध को पीठ पर बैठाकर सड़क पार कराई तो अपनी तारीफों के कसीदे पढ़े जाते हैं, लेकिन इस घटना ने उन मददगार पुलिसकर्मियों की छवि को भी धूमिल कर दिया।
मामला बेहद गंभीर है। यदि संवेदनहीनता साबित होती है तो संबंधित कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच एसपी ट्रैफिक देहरादून को दी गई है। उनसे जल्द रिपोर्ट मांगी गई है।
-अशोक कुमार, डीजीपी