पंचायत चुनाव जून माह में होने से प्रदेश सरकार रणनीतिक रूप से भले ही राहत महसूस करे पर चार धाम यात्रा इन चुनावों के आड़े आएगी।
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चार धाम यात्रा पर इस बार वैसे भी खास फोकस है, लिहाजा चुनाव कराना राज्य निर्वाचन आयोग के लिए टेड़ी खीर साबित हो सकता है। जून माह में मौसम के मिजाज पर भी निर्भर करेगा कि पंचायत चुनाव किस तरह से निपटेंगे।
चार माह तक चलेगी यात्रा
प्रदेश में चार मई से चार धाम यात्रा शुरू हो रही है और यह यात्रा कम से कम चार माह तो चलती ही है। ऐसे में मौसम की मेहरबानी रही तो जून माह में चार धाम यात्रा भी अपने चरम पर होगी।
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जुलाई माह बरसात का है और प्रदेश में बदलते मौसम के चलते बरसात अब अगस्त और सितंबर तक पहुंच जा रही है। इस स्थिति को देखते हुए भी जून माह में प्रदेश में चार धाम यात्रा का दबाव बढ़ जाता है।
प्रशासन होगा यात्रा में व्यस्त
चार धाम यात्रा के दौरान जिला स्तर की मशीनरी पूरी तरह से यात्रा में व्यस्त होती है लिहाजा पंचायत चुनाव को साथ-साथ कराना इन पर भारी पड़ सकता है। दूसरी ओर 2013 की जून माह की आपदा के कारण इस बार चार धाम यात्रा पर सरकार का भी विशेष फोकस है।
ऐसे में सरकार भी यात्रा से कोई समझौता करना नहीं चाहेगी। यात्रियों के पंजीकरण से लेकर अन्य व्यवस्थाओं को बनाने में सरकारी मशीनरी को अतिरिक्त काम भी चार धाम यात्रा के दौरान करना पड़ेगा।