बुधवार को हाईकोर्ट ने प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं और चार धाम यात्रा को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर कोर्ट में पेश हुए। चार धाम यात्रा के संबंध में उनकी ओर से पेश किए गए शपथपत्र से कोर्ट संतुष्ट नहीं हुई। कोर्ट ने कहा कि सरकार ने सिर्फ यह बताया है कि 22 जून तक चार धाम यात्रा पर सरकार ने रोक लगा रखी है और उसके बाद चरणबद्ध तरीके से चार धाम यात्रा शुरू होगी या नहीं यह अभी तय नहीं किया है।
पैदल मार्ग रोज सैनिटाइज करें, कितने पुलिस तैनात करेंगे
सुनवाई के दौरान पर्यटन सचिव ने कोर्ट को बताया कि सरकार लॉकडाउन में 22 जून तक चारधाम यात्रा शुरू नहीं कर रही है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से इसे शुरू कर सकती है। इस पर कोर्ट ने पूछा कि अभी वहां पर मेडिकल और अन्य व्यवस्थाएं क्या हैं। वहां पर रह रहे स्थानीय लोगों और व्यवसायियों का टीकाकरण हुआ या नहीं।
कोर्ट ने यह भी जानकारी देने के लिए कहा कि चार धाम यात्रा की तैयारियों के निरीक्षण के दौरान क्या क्या खामियां पाईं गईं और चार धाम यात्रा के लिए कितने पुलिस जवानों को तैनात किया जाएगा। कोर्ट ने चार धाम यात्रा के पैदल मार्ग को रोजाना सैनिटाइज करने पर विचार करने के लिए भी कहा। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि 2020 में चार धाम में तीन लाख 10 हजार 568 श्रद्धालु दर्शन के लिए गए थे लेकिन इस वर्ष कोविड की दूसरी लहर काफी भयावह है। ऐसे में सरकार को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का ध्यान रखने की जरूरत है।