प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमित मामले लगातार कम होने से सक्रिय मामलों में कमी आई है। लेकिन मैदानी जिलों की तुलना में पर्वतीय जिलों में सक्रिय मामले अधिक हैं। पिथौरागढ़, पौड़ी, अल्मोड़ा और चंपावत जिले में देहरादून, नैनीताल व ऊधमसिंह नगर जिले से ज्यादा सक्रिय मामले हैं।
कोरोना संक्रमण की पहली और दूसरी लहर में मैदानी जिलों में संक्रमित मामले तेजी से बढ़ने से सक्रिय मामलों का ग्राफ बढ़ा था। संक्रमण काबू में आने के बाद मैदानों में सक्रिय मामले कम हो गए हैं। जबकि पर्वतीय जिलों में अधिक सक्रिय मामले हैं। जिनका उपचार चल रहा है। सक्रिय मामलों में पिथौरागढ़ जिला पहले स्थान पर है, यहां 572 सक्रिय मरीजों का इलाज चल रहा है।
जिलावार कोरोना संक्रमण की स्थिति
जिला सक्रिय मरीज
अल्मोड़ा 300
बागेश्वर 273
चमोली 201
चंपावत 279
देहरादून 223
हरिद्वार 487
नैनीताल 226
पौड़ी 394
पिथौरागढ़ 572
रुद्रप्रयाग 161
टिहरी 254
यूएसनगर 119
उत्तरकाशी 153
हरिद्वार कुंभ के दौरान कोरोना जांचों में हुई गड़बड़ी को बड़ा घोटाला बताते हुए मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने तीरथ सरकार पर जोरदार हमला बोला है। कांग्रेस ने इसे शर्मनाक व सनातनी हिन्दू धर्म के लोगों के साथ विश्वासघात बताते हुए घोटाले की उच्च न्यायालय के सिटिंग न्यायाधीश से न्यायिक जांच कराने की मांग की है।
बुधवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से वार्ता करते हुए उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि अगर सरकार वास्तव में निष्पक्ष जांच कराना चाहती है तो बिना देरी किए इस मामले की न्यायिक जांच हाईकोर्ट के सिटिंग जज की देखरेख में करवाए। आरटीपीसीआर जांच के मामले में उच्च न्यायालय नैनीताल ने राज्य सरकार को स्पष्ट आदेश देकर कुंभ मेले के दौरान 50 हजार आरटीपीसीआर टेस्ट प्रतिदिन कराने के आदेश दिए थे। अत: इस मामले की जांच व समीक्षा उच्च न्यायालय की देखरेख में ही होनी चाहिए।
धस्माना ने कहा कि प्रथम दृष्टया ये एक बड़ा घोटाला प्रतीत हो रहा है, जिसमें बड़े लोगों के लिप्त होने की पूरी आशंका है। ऐसे में कोई सीडीओ स्तर का अधिकारी इसकी निष्पक्ष जांच नहीं कर सकता।
धस्माना ने कहा कि मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने स्वयं शपथ लेते ही हरिद्वार जाकर बेरोकटोक दिव्य व भव्य महाकुंभ के आयोजन की न सिर्फ घोषणा की थी, बल्कि श्रद्धालुओं को बेधड़क आने का खुला आमंत्रण भी दिया था। कहा कि राज्य सरकार ने कुंभ मेले की कोई व्यवस्था कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार नहीं की, जिसका परिणाम न केवल उत्तराखंड ने, बल्कि पूरे देश ने भुगता है। कांग्रेस इस घोटाले का पर्दाफाश होने तक खामोश नहीं बैठेगी। शीघ्र ही प्रदेश अध्यक्ष इस मुद्दे पर कोई बड़ा एलान करेंगे।
देहरादून में एसओपी पर असमंजस दूर होने के बाद आखिरकार बुधवार से ऑटो और विक्रमों का संचालन शुरू हो गया। हालांकि सिटी बसें फिलहाल नहीं चलेंगी। उधर, आरटीओ प्रवर्तन संदीप सैनी ने निर्देश दिए हैं कि संचालन में एसओपी के नियमों का पूर्ण पालन किया जाए।
विक्रम-ऑटो चले लेकिन नहीं मिली सवारियां
पहले दिन विक्रम और ऑटो का संचालन तो हुआ लेकिन सवारियां अपेक्षाकृत बेहद कम मिली। यूनियनों के पदाधिकारियों का कहना है कि बाजार में बाहर आने में लोग कतरा रहे हैं। इस वजह से कई ऑटो संचालकों को दिनभर में एक भी सवारी नहीं मिल पाई। विक्रम भी लगभग घाटे में ही चले।
आज से 25 जून तक नहीं चलेगी जनता एक्सप्रेस
लखनऊ-वाराणसी रेल खंड पर रेलवे लाइन के दोहरीकरण के चलते देहरादून-वाराणसी एक्सप्रेस (जनता एक्सप्रेस) का संचालन 17 से लेकर 25 जून तक बंद रहेगा। ट्रेन का संचालन ठप होने से मुरादाबाद, बरेली, लखनऊ, रायबरेली, प्रतापगढ़, वाराणसी जाने वाले यात्रियों को परेशानी होगी।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक लखनऊ-वाराणसी रेल खंड पर जायस और फुरसतगंज रेलवे स्टेशनों के बीच रेलवे लाइन के दोहरीकरण संबंधी कार्यों के चलते ट्रेन के संचालन पर रोक लगाई गई है।
स्टेशन अधीक्षक (परिचालन) सीताराम शंकर ने बताया कि देहरादून-वाराणसी जनता एक्सप्रेस का संचालन फिलहाल एक सप्ताह के लिए बंद किया गया है। जनता एक्सप्रेस का संचालन ठप होने के चलते देहरादून से मुरादाबाद, बरेली, शाहजहांपुर, हरदोई, लखनऊ, रायबरेली, अमेठी, प्रतापगढ़ और वाराणसी आने जाने वाले यात्रियों को दिक्कतें होंगी।