वहीं शनिवार को दोपहर 12:30 बजे यमुनोत्री धाम के कपाट भी बंद हो गए। सुबह शीतकालीन पड़ाव खरसाली से समेश्वर देवता (शनि देव) की डोली अपनी बहन यमुना को लेने धाम पहुंची। पुरोहित प्यारेलाल उनियाल ने बताया कि खरसाली स्थित मां यमुना के मंदिर को सजाने के लिए फूल मंगाए गए हैं। मंदिर को भव्य तरीके से सजाया गया है।
यमुनोत्री में 50 दिन तक चली यात्रा से यमुनोत्री मंदिर समिति को 5 लाख रुपये की आय हुई है। कोविड के कारण प्रभावित चारधाम यात्रा इस बार 18 सितंबर से शुरू हुई थी। शुक्रवार तक करीब 34 हजार श्रद्धालुओं ने मां यमुना के दर्शन किए। कपाट बंद होने से एक दिन पहले यमुनोत्री मंदिर समिति ने प्रशासन की मौजूदगी में यमुनोत्री धाम में लगा दानपात्र खोला। समिति के कोषाध्यक्ष प्यारे लाल उनियाल ने बताया कि दानपात्र से मंदिर समिति को पांच लाख 13 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई है।
खरसाली में उत्सव जैसा माहौल
मां यमुना के शीतकालीन पड़ाव में खरशाली गांव में उत्सव का माहौल है। यहां शाम को मां यमुना के आगमन से पूर्व उनके स्वागत में तांदी नृत्य आदि कार्यक्रम आयोजित किए गए। इससे पहले यहां कुलदीप उनियाल के यजमान अहमदाबाद निवासी राहुल माहेश्वरी ने भंडारे का आयोजन किया।
भैया दूज पर यमुना में स्नान से मिलती है शनि की साढ़े साती से मुक्ति
भैया दूज के दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा भी की जाती है, इसलिए इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है। यमराज मां यमुना के भाई हैं। इस कारण इस दिन यमुना नदी में स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन यमुना के भाई शनि देव जहां अपनी बहन यमुना को लेने यमुनोत्री धाम पहुंचते हैं। दूसरी तरफ यमराज भी उन्हें मिलने आते हैं। मान्यता है कि जो भी इस दिन यमुना नदी में स्नान करते हैं। उन्हें शनि की साढ़े साती के साथ यम यातनाओं से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही भाई-बहन रिश्ता मजबूत हो जाता है। साथ ही भाई-बहनों की मनोकामना भी पूर्ण होती है।
मुखबा पहुंची मां गंगा की डोली, गंगा मंदिर में विराजी
शुक्रवार को गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद शनिवार को मां गंगा की डोली अपने मायके व शीतकालीन पड़ाव मुखबा (मुखीमठ) पहुंच गई। इससे पूर्व डोली यात्रा ने मार्कंडेयपुरी स्थित देवी मंदिर में रात्रि विश्राम किया।