फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चारधाम यात्रा 2021: भैयादूज के पावन पर्व पर शीतकाल के लिए बंद हुए केदारनाथ और यमुनोत्री धाम के कपाट

Sat, 06 Nov 2021 05:35 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज ऐजेंसी, रुद्रप्रयाग/उत्तरकाशी

सार

Chardham Yatra 2021: सुबह 4 बजे से केदारनाथ मंदिर में बाबा की विशेष पूजा-अर्चना शुरू हुई। मुख्य पुजारी बागेश लिंग द्वारा बाबा केदार की विधि-विधान से अभिषेक कर आरती उतारी गई।
विज्ञापन
शीतकाल के लिए बंद हुए केदारनाथ धाम के कपाट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केदारनाथ और यमुनोत्री धाम के कपाट आज शनिवार को भैयादूज के पावन पर्व पर परंपरानुसार शुभ लग्न में शीतकाल के लिए बंद हो गए। केदारनाथ धाम के कपाट सुबह 8.00 बजे बंद कर दिए गए। बाबा की डोली धाम से अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान करते हुए रात्रि प्रवास के लिए रामपुर पहुंचेगी। जबकि 7 नवंबर को बाबा की डोली शीतकालीन गद्दीस्थल में विराजमान होगी। जहां छह माह तक श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन व पूजा-अर्चना कर सकेंगे।

विज्ञापन


चारधाम यात्रा 2021: आज शीतकाल के लिए बंद हुए गंगोत्री धाम के कपाट, बड़ी संख्या में मौजूद रहे भक्त

बाबा की विशेष पूजा-अर्चना हुई
सुबह 4 बजे से केदारनाथ मंदिर में बाबा की विशेष पूजा-अर्चना शुरू हुई। मुख्य पुजारी बागेश लिंग द्वारा बाबा केदार की विधि-विधान से अभिषेक कर आरती उतारी गई। साथ ही स्वयंभू ज्योतिर्लिंग को समाधि रूप देते हुए लिंग को भस्म से ढक दिया गया। इसके बाद बाबा केदार की पंचमुखी भोग मूर्ति का शृंगार कर चल विग्रह उत्सव डोली में विराजमान किया गया। परंपरानुसार बाबा केदार की मूर्ति को मंदिर परिसर में भक्तों के दर्शनार्थ रखा गया।
विज्ञापन


सुबह 8:00 बजे ऊखीमठ के एसडीएम जितेंद्र वर्मा व देवस्थानम बोर्ड के अपर कार्याधिकारी की मौजूदगी में केदारनाथ धाम के कपाट बंद कर दिए गए। साथ ही मंदिर के कपाट की चाबी एसडीएम को सौंप दी गई। इसके बाद बाबा केदार की डोली मंदिर की तीन परिक्रमा करते हुए श्रद्धालुओं के जयकारों के बीच अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान कर गई।

डोली रुद्रा प्वाइंट, लिनचोली, रामबाड़ा, भीमबली, जंगलचट्टी, गौरीकुंड, सोनप्रयाग में भक्तों को आशीर्वाद देते हुए रात्रि प्रवास के लिए पहले पड़ाव रामपुर पहुंचेगी। 6 नवंबर को डोली रामपुर से प्रस्थान करते हुए रात्रि प्रवास के लिए विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी पहुंचेगी। 7 नवंबर को बाबा केदार की पंचमुखी भोग मूर्ति को विधि-विधान के साथ शीतकालीन पंचकेदार गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में विराजमान कर दिया जाएगा। 

विज्ञापन

12:30 बजे बंद हुए यमुनोत्री धाम के कपाट

यमुनोत्री धाम - फोटो : अमर उजाला
वहीं शनिवार को दोपहर 12:30 बजे यमुनोत्री धाम के कपाट भी बंद हो गए। सुबह शीतकालीन पड़ाव खरसाली से समेश्वर देवता (शनि देव) की डोली अपनी बहन यमुना को लेने धाम पहुंची। पुरोहित प्यारेलाल उनियाल ने बताया कि खरसाली स्थित मां यमुना के मंदिर को सजाने के लिए फूल मंगाए गए हैं। मंदिर को भव्य तरीके से सजाया गया है। 

यमुनोत्री में 50 दिन तक चली यात्रा से यमुनोत्री मंदिर समिति को 5 लाख रुपये की आय हुई है। कोविड के कारण प्रभावित चारधाम यात्रा इस बार 18 सितंबर से शुरू हुई थी। शुक्रवार तक करीब 34 हजार श्रद्धालुओं ने मां यमुना के दर्शन किए। कपाट बंद होने से एक दिन पहले यमुनोत्री मंदिर समिति ने प्रशासन की मौजूदगी में यमुनोत्री धाम में लगा दानपात्र खोला। समिति के कोषाध्यक्ष प्यारे लाल उनियाल ने बताया कि दानपात्र से मंदिर समिति को पांच लाख 13 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई है। 

खरसाली में उत्सव जैसा माहौल 
मां यमुना के शीतकालीन पड़ाव में खरशाली गांव में उत्सव का माहौल है। यहां शाम को मां यमुना के आगमन से पूर्व उनके स्वागत में तांदी नृत्य आदि कार्यक्रम आयोजित किए गए। इससे पहले यहां कुलदीप उनियाल के यजमान अहमदाबाद निवासी राहुल माहेश्वरी ने भंडारे का आयोजन किया। 

भैया दूज पर यमुना में स्नान से मिलती है शनि की साढ़े साती से मुक्ति 
भैया दूज के दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा भी की जाती है, इसलिए इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है। यमराज मां यमुना के भाई हैं। इस कारण इस दिन यमुना नदी में स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन यमुना के भाई शनि देव जहां अपनी बहन यमुना को लेने यमुनोत्री धाम पहुंचते हैं। दूसरी तरफ यमराज भी उन्हें मिलने आते हैं। मान्यता है कि जो भी इस दिन यमुना नदी में स्नान करते हैं। उन्हें शनि की साढ़े साती के साथ यम यातनाओं से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही भाई-बहन रिश्ता मजबूत हो जाता है। साथ ही भाई-बहनों की मनोकामना भी पूर्ण होती है। 

मुखबा पहुंची मां गंगा की डोली, गंगा मंदिर में विराजी
शुक्रवार को गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद शनिवार को मां गंगा की डोली अपने मायके व शीतकालीन पड़ाव मुखबा (मुखीमठ) पहुंच गई। इससे पूर्व डोली यात्रा ने मार्कंडेयपुरी स्थित देवी मंदिर में रात्रि विश्राम किया। 
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें