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उत्तराखंडः धरती पर 'स्वर्ग' हैं शीतकालीन चारधाम

Sun, 16 Nov 2014 02:49 PM IST
रविंद्र थलवाल / अमर उजाला, उत्तरकाशी
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शीतकालीन चारधाम यात्रा की शुरुआत हो गई। सबसे पहले मुखबा की शीतकालीन यात्रा शुरू हो गई है। रविवार को लोगों के साथ पहुंचकर विधायक विजयपाल सजवाण ने यात्रा का शुभारंभ किया।
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मुखबा उत्तरकाशी से लगभग 80 किमी दूर है। यात्री पहले 70 किलोमीटर दूर हर्षिल पहुंचेंगे। यहां से थराली और फिर मुखबा पहुंचेंगे। गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद छह माह के लिए मां गंगा अपने मायके मुखबा में विराजमान हुई हैं।

मंदिर के साथ ताल-बुग्यालों की भी भरमार
शीतकालीन चारधाम यात्रा यदि ठीक-ठाक चली तो यहां आने वाले देश-विदेश के तीर्थयात्री एवं पर्यटकों को ‘धरती पर स्वर्ग’ का एहसास होगा। जिले में न केवल पौराणिक मंदिर एवं मठ हैं, बल्कि ताल और बुग्यालों की भी भरमार हैं।
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राज्य सरकार ने इस साल से शीतकालीन चारधाम यात्रा शुरू करने का बीड़ा उठाया है। गंगोत्री धाम की यात्रा का श्रीगणेश रविवार को मुखबा में गंगा के शीतकालीन प्रवास से होना है।

सरकार की यह पहल यदि रंग लाती है, तो जिले को न केवल धार्मिक पहचान बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। सर्दियों में बर्फीली चादर ओढ़े ताल और बुग्यालों का नजारा देखने लायक होता है।

यात्रा में करें इन कुदरती नजारों का दीदार

दयारा बुग्याल - मखमली घास से लबालब यह बुग्याल शीतकाल में दिसंबर से मार्च तक बर्फ से लकदक रहता है। यदि आप गंगोत्री यात्रा पर आ रहे हैं, तो गंगोत्री हाईवे के भटवाड़ी से रैथल या बार्सू गांव होते हुए यहां पहुंचा जा सकता है। यहां से दयारा की दूरी सात किमी वाहन तथा पांच किमी पैदल है।

डोडीताल- समुद्र तल से 3024 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह ताल भगवान गणेश की जन्म स्थली माना जाता है। शीतकाल में बर्फ से ढके रहने वाले इस ताल तक पहुंचने के लिए उत्तरकाशी मुख्यालय से 15 किमी वाहन से संगमचट्टी तथा इसके बाद 21 किमी की पैदल दूरी नापनी पड़ती है।

नचिकेता ताल- टिहरी और उत्तरकाशी जिले की सीमा पर स्थित नचिकेता ताल बांज-बुरांश के घने जंगल से घिरा हुआ है। गंगोत्री-यमुनोत्री धाम की शीतकाल यात्रा करने के बाद केदारनाथ जाते समय तीर्थयात्री चौरंगीखाल से दो किमी की पैदल दूरी तय कर इस ताल का दीदार कर सकते हैं।
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गंगा-यमुना का सुंदर संगम

गंगनानी- इस स्थान पर गंगा-यमुना का संगम माना जाता है। इसी कुंड के पास थान गांव में जमदगनी ऋषि ने तपस्या की थी। ऋषि की तपस्या के यहां पर गंगा की जलधारा निकली थी। यमुनोत्री धाम की शीतकाल यात्रा के दौरान तीर्थ यात्री इस कुंड का भी दर्शन कर करते हैं।

गर्मकुंड- शीतकाली में इस कुंड तक पहुंचने के लिए यात्रियों को यमुनोत्री की यात्रा के दौरान जंगलचट्टी से आधा किमी की पैदल दूरी तय कर बनास गांव पहुंचना पड़ेगा। इस स्थान माना जाता है यमुनोत्री यात्रा के दौरान ऋषि नारदमुनि ने एक रात विश्राम किया था।

मंदिरों की नगरी- शीतकाल में यात्री न केवल मुखबा एवं खरसाली में गंगा-यमुना मंदिर बल्कि उत्तरकाशी में विराजमान कई पैराणिक मंदिरों का दर्शन भी कर सकते हैं। यहां प्रसिद्ध विश्वनाथ मंदिर, शक्ति मंदिर, परशुराम मंदिर, कंडार देवता, कुटैटी देवी, नर्मदेश्वर मंदिर सहित अनेक मंदिर हैं।
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