उरेडा ने बृहस्पतिवार शाम यमुनोत्री धाम तक बिजली पहुंचाने में तो सफलता हासिल कर ली है, लेकिन अभी गंगोत्री धाम को रोशनी का इंतजार है।
जनरेटरों का सहारा
स्थिति यह है कि गंगोत्री में संचार सेवाएं चालू करने के लिए भी इस साल निगम को जनरेटरों का सहारा लेना पड़ेगा।
बीते साल की आपदा में बिजली की लाइनें क्षतिग्रस्त होने तथा 200 किलोवाट की जानकीचट्टी लघु जल विद्युत परियोजना ठप होने से धाम में विद्युत आपूर्ति बहाल नहीं हो पाई थी।
बीते दिनों जानकीचट्टी पावर हाउस में आई तकनीकी अड़चन दूर कर उरेडा ने विद्युत उत्पादन चालू कर दिया। साथ ही यमुनोत्री तक क्षतिग्रस्त पड़ी बिजली की लाइन भी दुरुस्त कर ली गई है।
इधर अभी तक रुद्रगैरा पर बनी 150 किलोवाट की लघु जल विद्युत परियोजना अभी तक चालू नहीं होने से गंगोत्री धाम में अंधेरा पसरा है।
व्यवसायी एवं तीर्थ पुरोहित भी परेशान
बिजली के अभाव में न सिर्फ यात्रा व्यवस्थाएं बहाल करने में दिक्कतें आ रही हैं, बल्कि यात्रा व्यवसायी एवं तीर्थ पुरोहित भी परेशान हैं।
बिजली नहीं मिलने पर बीएसएनएल के कर्मचारी अब जनरेटरों के भरोसे टेलीफोन एक्सचेंज एवं मोबाइल फोन टावर चालू करने की तैयारी कर रहे हैं।
दो मई को यमुनोत्री एवं गंगोत्री धाम के कपाट खुलने हैं। ऐसे में अभी तक यात्रा व्यवस्थाएं चाक चौबंद होने पर सवाल उठ रहे हैं।
यमुनोत्री धाम की बिजली व्यवस्था बृहस्पतिवार शाम चालू कर ली गई है। गंगोत्री में भी एक मई को परियोजना की टेस्टिंग की जाएगी। कपाट खुलने वाले दिन गंगोत्री धाम में भी बिजली से रोशन होगा।
- वंदना, परियोजना अधिकारी उरेडा