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अब सघन आबादी वाले क्षेत्र हो गए आवासीय

Fri, 29 Nov 2013 02:40 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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गुरुवार को शासन ने दून के मास्टर प्लान में बदलाव कर दिया। शासन द्वारा संशोधित फाइनल ड्राफ्ट जारी हो गया है।
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जोनल प्लान भी तैयार
शहरी विकास प्रमुख सचिव एमएच खान ने संशोधित प्रारूप जारी किया। प्रमुख सचिव के मुताबिक तीन माह के अंदर-अंदर जोनल प्लान भी तैयार कर लिया जाएगा। संशोधित प्रारूप को देर रात अधिसूचित भी कर दिया गया।

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सचिवालय में मीडिया से मुखातिब प्रमुख सचिव ने कहा कि संशोधित प्रारूप में उन क्षेत्रों को शामिल किया गया है जो पहले कृषि भूमि थी पर अब वहां सघन आबादी है। ऐसे 22 कलस्टर चिह्नित किए गए हैं। महायोजना 2025 तक के लिए हैं।
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महायोजना के तहत पूरे क्षेत्र को नौ जोन में बांटा गया है। तीन माह के अंदर-अंदर जोनल प्लान भी जारी कर दिए जाएंगे। महायोजना देहरादून में 19 नंवबर 2008 को लागू कर दी गई थी। पर कई आपत्तियां मिलने के बाद इसमें संशोधन की जरूरत महसूस हुई।

महायोजना में संशोधन
शासन की ओर से गठित समिति की संस्तुतियों का परीक्षण करने के बाद महायोजना में संशोधन किया गया। महायोजना में सबसे बड़ा बदलाव 22 कलस्टर को आवासीय श्रेणी का दर्जा देना है। ऐसे में करीब 257 हेक्टेयर है जो आवासीय भूमि में है। पहले यह क्षेत्र कृषि या फिर गैर आवासीय क्षेत्र में था।

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महायोजना में एफआरआई सहित अन्य कई संस्थानों के परिसर को भी स्पष्ट कर दिया गया है। पहले परिसर सीमा से बाहर का भू उपयोग भी संस्थानों के परिसर के हिसाब से ही था। देर रात संशोधित प्रारूप को अधिसूचित भी कर दिया गया।

खान के मुताबिक जोनल प्लान के लिए भी पूरी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसका ड्राप्ट जारी होगा और लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगी जाएंगी। इन आपत्तियों का निस्तारण होने के बाद जोनल प्लान अधिसूचति किया जाएगा।

महायोजना में बदलाव
इन क्षेत्रों को घोषित किया आवासीय
- बदरीपुर, मोहकमपुर, माजरी माफी, हरीपुर, नवादा, इंद्रपुर, मोथरोवाला, बंजारावाला, पथरीबाग, देहराखास, अजबपुर खुर्द, कारगी ग्रांट, ब्राह्मणवाला, अस्थल, सुद्धोवाला, दानियों का डांडा, आजाद कालोनी, बाबा नामदेव एन्क्लेव, बिष्ट गांव, जमुनिवाला, कुंआवाला, कैंट से पृथक क्षेत्र। इन क्षेत्रो के करीब 257 हेक्टेयर को आवासीय भू उपयोग के तहत रखा गया है।
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-स्पोर्ट्स कॉलेज के नजदीक की रायपुर में करीब 200 हेक्टेयर भूमि विधानसभा, सचिवालय आदि के लिए आरक्षित कर दिया गया है।

-एफआरआई जैसे संस्थानों के परिसर का भू उपयोग परिसर की सीमा तक ही रखा गया है।
-महायोजना में निजी वन में दर्शाए गए क्षेत्रों का भू अभिलेख वन विभाग के प्रमाणित अभिलेख के अनुसार नजदीक के भू उपयोग के आधार पर होंगे।

अब ये होंगी भू उपयोग की श्रेणियां
आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक, सार्वजनिक/अर्द्ध सार्वजनिक, यातायात, मनोरंजन, कृषि और विशेष उपयोग(पर्यटन)। पहले यह श्रेणिया 68 थीं।

अब तक क्या हुआ
- देहरादून का मास्टर प्लान 2005 से लेकर 2025 तक के लिए 19 नंवबर 2008 में स्वीकृत हुआ।
- मास्टर प्लान केजारी होते ही कई शिकायतें शासन को मिली।
- 21 दिसंबर, 2011 को केंद्र सरकार ने नए दिशा निर्देश जारी किए।
- नई नीति के अनुसार मार्च 2012 में शासन ने जून 2012 तक तीन माह में संशोधित प्रारूप पर आपत्तियां मांगी।
- शासन को करीब  714 आपत्तियां मिलीं। शासन ने एमडीडीए उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया। 155 संस्तुतियां नीतिगत और 52 संस्तुतियां आबादी क्षेत्र से संबंधित कमेटी ने दीं। समिति ने 30 मई को संस्तुतियां शासन को भेजी।
- शासन ने 28 नवंबर को संशोधित प्रारूप जारी किया।

अब क्या होगा
- सघन आबादी वाले 22 कलस्टर में अब एमडीडीए नक्शा पास कर सकेगा।
- तीन माह में जोनल प्लान तैयार किया जाएगा।

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