चैंपियन की मानें तो वह पद छिने जाने से पहले ही सीएम को इस्तीफा दे चुके थे। अगर ऐसा था तो बात-बात पर ढिंढोरा पीटने वाले चैंपियन अब तक चुप क्यों थे?
खबर है कि अपनी दबंगई और तीखे तेवरों से सुर्खियों में आए खानपुर के विधायक चैंपियन ने 14 अक्टूबर को ही इस्तीफा दे दिया था।
सीएम ने स्वीकारी इस्तीफे की बात
सूत्रों की मानें तो कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन की इस्तीफे की बात को सीएम विजय बहुगुणा ने भी स्वीकारा है। गुरुवार को चैंपियन सीएम से मिलने दिल्ली पहुंचे, जिसके बाद इस बात का खुलासा हुआ। चैंपियन का कहना है कि वह कांग्रेस की छवि धूमिल नहीं करना चाहते इसलिए उन्होंने इस्तीफा दिया है।
इन सबके बीच अब यह सवाल उठता है कि अगर चैंपियन ने पहले ही इस्तीफा दे दिया था तो यह बात क्यों छिपाई गई।
इसके साथ ही एक सवाल यह भी है कि अगर पहले ही इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया था तो फिर बहुगुणा सरकार ने बाद में नोटिस क्यों दिया। बता दें कि बुधवार को खानपुर के विधायक पद से हटा दिया गया है।
कुर्सी गंवानी पड़ी
खानपुर के कांग्रेस विधायक प्रणव सिंह को आखिरकार अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी। पीडीएफ के दबाव और कांग्रेस संगठन के आगे सरकार को यह फैसला करना पड़ा।
बुधवार देर शाम प्रणव सिंह को वन विकास निगम के अध्यक्ष पद से हटाने का आदेश भी बैक डेट में जारी कर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक इतनी रियायत जरूर बरती गई है कि इस पद को फिलहाल खाली रखा जाएगा।
मुख्यमंत्री निशाने पर आ गए
कुछ समय पहले ही प्रणव सिंह हरिद्वार में बसपा मंत्री सुरेंद्र राकेश से उलझ पड़े थे। सुरेंद्र राकेश के खिलाफ बयानबाजी ने बाद में तूल भी पकड़ लिया था।
यह मामला संभलता इससे पहले ही प्रणव सिंह ने कांग्रेस के पांचों सीटे हारने का बयान जारी किया। उनके एक और बयान से खुद मुख्यमंत्री निशाने पर आ गए। इससे पहले कृषि मंत्री हरक सिंह के आवास पर आयोजित समारोह में गोली चलाने पर भी प्रणव कई कांग्रेसी नेताओं की आंखों में खटक रहे थे।
मंत्री भी लगातार सरकार पर दबाव बनाए हुए
सुरेंद्र राकेश के मामले में सरकार के सहयोगी मंत्री भी लगातार सरकार पर दबाव बनाए हुए थे। पीडीएफ ने सरकार को दस दिन का समय भी दिया हुआ था।
बुधवार को दिल्ली जाने से पहले मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने प्रणव सिंह को वन विकास निगम के पद से हटाने का निर्देश जारी कर दिया था।
प्रमुख सचिव वन एस रामास्वामी ने 15 अक्टूबर की तिथि से प्रणव को हटाने का आदेश भी जारी किया। मंगलवार को कृषि मंत्री हरक सिंह, परिवहन मंत्री सुरेंद्र राकेश और मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बीच में बातचीत भी हुई थी। सुरेंद्र राकेश इस मामले माने नहीं।
प्रणव सिंह के खिलाफ सख्त कार्यवाही
दूसरी ओर कांग्रेस संगठन भी प्रणव सिंह के खिलाफ सख्त कार्यवाही के लिए अड़ गया था। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य का साफ कहना था कि प्रणव के खिलाफ नरम रुख अपनाया गया तो पार्टी को इसका नुकसान होगा।
माना जा रहा है कि गोली कांड के बाद के इस विवाद से हाईकमान भी प्रणव से खासा नाराज था। हाईकमान का संकेत मिलने के बाद यह प्रणव सिंह को हटाने का फैसला किया गया। कांग्रेस की वर्तमान सरकार में किसी को पद से हटाने का यह पहला मामला है।
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