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उत्तराखंड से UP शिफ्ट हुई जातियां होंगी बाहर

Sun, 09 Nov 2014 04:30 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड की 32 जातियों को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की केंद्रीय सूची में शामिल किया जाना है, जबकि दस जातियों को सूची से बाहर करने का भी प्रस्ताव है।
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12 नवंबर को होगी सुनवाई
इस मसले पर 12 नवंबर को नगर निगम के टाउन हॉल में लोक सुनवाई होगी। शनिवार को राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के प्रदेश अध्यक्ष अशोक वर्मा ने बताया कि लोकसुनवाई सुबह दस बजे से शुरू होगी।

जिसमें राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष जस्टिस वी ईश्वरैया, कैबिनेट मंत्री स्तर के चार सदस्य एसके खारवेंथान, एके सैनी, डॉ. शकीलुज्जमान अंसारी और एके मंगोत्रा मौजूद रहेंगे।
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बताया कि जिन दस जातियों को बाहर करने का प्रस्ताव है, वे उत्तराखंड बनने के बाद यूपी में शिफ्ट हो चुकी हैं। वर्मा के मुताबिक 32 जातियों को सूची में शामिल करने के प्रयास वर्ष 2007 से चल रहे थे।

ये जातियां होंगी शामिल

1- चनऊ, पटेल, पटनवार, 2- छिपा, 3- दांगी, 4- घाकड़, 5- घृत बाहती, चाहंग, 6- ग्वाला, यदुवंशी, 7- इदरीसी, काकुत्स्थ, 8- जोरिया, 9- करन (कर्ण), 10- कशौधन, 11- कश्यप, 12- कटुआ, 13- खागी, 14- खुमरा, संग तराश, हंसीरी, 15- लोनिया चौहान, 16- महर/ गुजर महरा, 17- माहगीर, 18- मीर शिकार, 19- मोदनवा, 20- नानबाई, 21- निषाद, 22- पाल, बघेल, 23- राजभर, 24- रंकी और गुकेरानी, 25- रोड़, 26- रौनियार, गंधी, अर्रक, 27- सैफी, पांचाल, जागीर, धीमान, 28- सविता, श्रीवास, 29- स्वर्णकार, 30- स्वीपर (जो अनुसूचित जातियों की श्रेणी में न हों), 31- तंतवा, 32- तंवर सिंघाड़िया

ये जातियां हटेंगी
1- अहेरिया, 2- आतिशबाज, दारूगर, 3- भांड, 4- बोट, 5- दोहर, 6- हेला, लालबेगी, 7- मदारी, 8- नालबंस, सैस, 9- राज (मेमर), 10- उनाई साहू
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सूची में शामिल होने से होंगे लाभ

लाभ
- सरकारी नौकरियों में आरक्षण मिलेगा
- केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलेगा

जिलाधिकारियों से मांगी आबादी की जानकारी
उत्तराखंड में पिछड़े वर्ग की जातियों की आबादी करीब 16 लाख आंकी गई है। राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के प्रदेश अध्यक्ष अशोक वर्मा ने बताया कि प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखा गया है कि अपने जिले की विभिन्न जातियों की आबादी का सटीक आंकड़ा भेजें।

लोकसुनवाई में रखें पक्ष
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी में होने वाली लोक सुनवाई में विभिन्न पिछड़े वर्ग के लोग अपनी बात रख सकते हैं। जिन जातियों का नाम सूची में नहीं है, उन बिरादरियों के लोग भी अपना पक्ष रख सकते हैं।
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