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Bipin Rawat: निधन की खबर सुनते ही फफक पड़े चाचा, कहा- ‘सड़क तो बनेगी, पर बिपिन गांव नहीं आ पाएगा’ 

Thu, 09 Dec 2021 06:49 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal चंद्रमोहन शुक्ला, संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार

सार

29 अप्रैल, 2018 के दौरे के बाद परिजनों और ग्रामीणों की मांग पर जनरल रावत ने राज्य सरकार से गांव तक सड़क सुविधा उपलब्ध कराने का आग्रह किया था, जिसे सरकार ने स्वीकार करते हुए सड़क की स्वीकृति प्रदान की।
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सीडीएस बिपिन रावत के चाचा भरत सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तराखंड के अन्य गांवों की तरह जनरल रावत का गांव सैंण भी पलायन से अछूता नहीं है। द्वारीखाल ब्लाॅक की विरमोली ग्राम पंचायत के अंतर्गत पड़ने वाले उपग्राम सैंण तक पहुंचने के लिए मुख्य मोटर मार्ग से एक किमी पैदल रास्ता तय करना पड़ता है।

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29 अप्रैल, 2018 के दौरे के बाद परिजनों और ग्रामीणों की मांग पर जनरल रावत ने राज्य सरकार से गांव तक सड़क सुविधा उपलब्ध कराने का आग्रह किया था, जिसे सरकार ने स्वीकार करते हुए सड़क की स्वीकृति प्रदान की। सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है। बुधवार शाम को उनके निधन पर उनके चाचा फफक कर रो पड़े। बोले गांव तक सड़क तो पहुंच जाएगी, लेकिन बिपिन अब कभी गांव नहीं आ पाएगा। 

जनरल रावत ने तत्कालीन मुख्यमंत्री से किया था गांव को सड़क से जोड़ने का आग्रह

उत्तराखंड के अन्य गांवों की तरह पलायन की मार झेल रहे सैंण (विरमोली) गांव को सड़क से जोड़ने की कवायद जनरल बिपिन रावत के 29 अप्रैल, 2018 के भ्रमण के बाद शुरू हुई। परिजनों और ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग को तब गांव पहुंचे जनरल रावत के समक्ष उठाया था।

जनरल रावत ने तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से गांव को सड़क से जोड़ने का आग्रह किया था, जिस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए सीएम ने लोनिवि के अधिकारियों को दिशा निर्देश जारी किए थे। लोनिवि दुगड्डा के अधिशासी अभियंता निर्भय सिंह ने बताया कि सैंण गांव के लिए डाडामंडी-मदनपुर मार्ग का विस्तार किया गया है। सैंण गांव के लिए 4.750 किमी सड़क की स्वीकृति मिली है, जिसमें से तीन किमी सड़क कटान का कार्य हो चुका है। बाकी सड़क का निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। 

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अब बिपिन गांव कभी नहीं आएगा

बुधवार को जनरल रावत की हादसे में मौत की खबर से पूरा गांव स्तब्ध है। उनके चाचा भरत सिंह बताते हैं कि सड़क तो बनेगी, लेकिन अब बिपिन गांव कभी नहीं आएगा। द्वारीखाल के ब्लाॅक प्रमुख महेंद्र सिंह राणा का कहना था कि जनरल रावत केवल उत्तराखंड ही नहीं पूरे भारत का गौरव थे। उनके निधन से देश ने एक वीर सपूत खो दिया है।

वन एवं पर्यावरण मंत्री डा. हरक सिंह रावत, पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी, पूर्व विधायक शैलेंद्र सिंह रावत, यमकेश्वर की विधायक ऋतु खंडूड़ी, महिला कांग्रेस की प्रांतीय महामंत्री रंजना रावत, अधिवक्ता जगमोहन भारद्वाज समेत कई सामाजिक संगठनों ने उनके निधन को देश की बड़ी क्षति बताया है।  

सैनिकों के लिए आवास योजना फेज-2 का किया था शिलान्यास
जनरल बिपिन रावत ने थल सेना अध्यक्ष रहते हुए 30 अप्रैल, 2018 को कोटद्वार के एमटी कैंप में गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर लैंसडौन की ओर से सैनिकों के परिवारों के लिए परिवार आवास योजना फेज-3 का शिलान्यास किया था। तब गढ़वाल राइफल्स के कर्नल ऑफ रेजीमेंट उपसेना प्रमुख लेफ्टीनेंट जनरल शरत चंद और लेफ्टिनेंट जनरल हरीश ठुकराल भी इस कार्यक्रम में शामिल रहे थे।

उनका मानना था कि देश की रक्षा करते समय गढ़वाली सैनिक अपने घर परिवार को भूलकर देश की रक्षा में जुटा रहता है, ऐसे में सैनिकों के परिवार को सुरक्षा और सुविधाएं मुहैया कराने के लिए आवास योजना बनाई गई थी। शुरुआत में कोटद्वार में 250 फेमली क्वाटर बनाने प्रस्तावित किए गए थे। 
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