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हरिद्वार कुंभ घोटाले में CBI जांच की सिफारिश

Wed, 01 Apr 2015 10:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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2010 के हरिद्वार कुंभ के लिए हुए निर्माण कार्यों में अनियमितताओं का जिन्न एक बार फिर से बोतल से बाहर निकल आया है। सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी न मिलने पर राज्य सूचना आयोग ने इस मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति की है।
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राज्य सूचना आयुक्त अनिल कुमार शर्मा ने मुख्यमंत्री को फैसले की प्रति भेजकर सीबीआई जांच का आग्रह किया है। सूचना आयुक्त ने फैसले में महालेखाकार की गोपनीय जांच का हवाला देते हुए कहा है कि 180.7 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य का कोई हिसाब नहीं मिल रहा है। आरटीआई के तहत कोई विभाग और संबंधित एजेंसी जानकारी भी नहीं दे रही है।

महालेखाकार की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए ही माई गिंदा कुंवर बरेली ट्रस्ट हरिद्वार के प्रबंधक रमेश चंद्र शर्मा ने आरटीआई के तहत 2010 कुंभ में निर्माण कार्यों की तफ्सील मांगी थी। जानकारी नहीं मिली तो मामला राज्य सूचना आयोग तक पहुंचा।
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राज्य सूचना आयुक्त अनिल कुमार शर्मा ने सुनवाई में जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। बताया गया कि यह जानकारी लोक सूचना अधिकारी के पास नहीं है और इसे 17 संबंधित लोक सूचना अधिकारियों को भेजा गया है। आयोग के निर्देश पर 91 पेज की जानकारी अपीलार्थी को दे दी गई पर आधी-अधूरी थी।

कैग रिपोर्ट का हवाला, 180 करोड़ का हिसाब नहीं

आयोग ने पाया कि 180.7 करोड़ रुपये का हिसाब न तो आरटीआई के तहत शासन दे रहा है और न ही मेलाधिकारी हरिद्वार कार्यालय। आयुक्त ने 16 संलग्नकों सहित मूल रूप में मुख्यमंत्री को भेजकर इस मामले में सीबीआई जांच कराने का आग्रह किया है।

क्या था कैग रिपोर्ट में
केंद्र सरकार ने वर्ष 2010 में कुंभ मेला, हरिद्वार के निर्माण के लिए 565 करोड़ रुपया दिया था। इस राशि से कुंभ मेला क्षेत्र निर्माण कार्य कराने के लिये 17 नोडल विभाग के निर्माण कार्यदायी विभागों से मेला शुरू होने से पहले अनुबंध किया गया।

मेला समाप्ति 31 मई, 2010 को हो जाने के बाद भी जन उपयोगी 54 निर्माण कार्य अधूरे थे। इशारा यह भी किया गया कि अपूर्ण निर्माण कार्यों के कारण ही ललतारो पुल पर त्रासदी हुई जिसमें कई घायल हुए और कई जानें गईं।

केंद्र सरकार के नियंत्रक महालेखा परीक्षक की ओर से कराई जांच में यह तथ्य सामने आया कि 34 विभागों के 565 करोड़ की लागत से 311 कार्य कराए गए थे। 12 विभागों-खंडों के अभिलेखों की जांच में पाया गया कि 180.7 करोड़ लागत के 54 निर्माण कार्य मेला अवधि समाप्त होने के बाद भी पूरे नहीं हो पाए थे।
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स‌ियासी जंग की शक्ल ले चुका है यह मामला

2010 में कुंभ का आयोजन प्रदेश में भाजपा बनाम कांग्रेस की सियासी जंग का रूप ले चुका है। उस समय भाजपा के रमेश पोखरियाल निशंक मुख्यमंत्री थे। 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने इसे मुद्दा भी बनाया था।

खुद मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि 2010 से सबक लेकर प्रदेश सरकार इस बात पर जोर दे रही है कि हरिद्वार में 2016 के अर्द्ध कुंभ से पहले निर्माण कार्य पूरे हो जाएं और निर्माण कार्य स्थायी हों।

त्रिपाठी आयोग ने भी की थी जांच
कुंभ 2010 में अनियमितता के मामले की जांच कांग्रेस सरकार ने त्रिपाठी जांच आयोग को सौंपी थी। आयोग ने इस मामले में जांच के बाद रिपोर्ट सरकार को बीती जनवरी में सौंप भी दी है। पर अब तक इस रिपोर्ट को न तो सार्वजनिक ही किया गया है और न ही सरकार ने इस पर किसी तरह का कोई फैसला लिया है।

सरकार के स्तर से इतना जरूर कहा गया था कि रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखा जाएगा, लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ।
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