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सीएयू ने सभी आरोपों को किया खारिज, कानूनी कार्रवाही की दी चेतावनी

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खिलाड़ियों को सौ रुपये डीए समेत कई तरह की कथित गड़बड़ियों के आरोपों से घिरे क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (सीएयू) के सचिव और अध्यक्ष ने प्रेसवार्ता करके एक-एक आरोपों पर सफाई दी। हालांकि इस दौरान कुछ सवालों को जहां बड़ी खूबसूरती से टाल दिया गया, जबकि हितों के टकराव के मामले में प्रवक्ता संजय गुसाईं को क्लीन चिट दे दी गई। हालांकि कार्यविरत कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी की माने तो बीसीसीआई नियमों के तहत प्रवक्ता संजय गुसाईं के ऊपर हितों के टकराव का मामला बनता है।
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रणजी के क्वार्टर फाइनल में टीम की 725 रनों की शर्मनाक हार के बाद सोशल मीडिया से लेकर कई न्यूज पोर्टल पर सीएयू के भीतर जारी कथित गड़बड़ी को लेकर सचिव महिम वर्मा और अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला पर निशाना साधा जा रहा है। इन्हीं सारे मुद्दों को लेकर सीएयू ने मंगलवार राजपुर रोड के एक होटल में पत्रकार वार्ता बुलाईं, जिसमें सचिव महिमा वर्मा, अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला, प्रवक्ता संजय गुसाईं, कार्यवाहक कोषाध्यक्ष दीपक मेहरा, ऑपरेशन मैनेजर अमित पांडे भी मौजूद रहे। सचिव महिम वर्मा ने कहा कि रणजी ट्राफी के क्वार्टर फाइनल में टीम 41 बार की चैंपियन मुंबई के हाथों 725 रनों की हार झेलनी पड़ी। यह टीम के लिए बुरा दिन था, लेकिन खेल प्रेमी ये क्यों भूल जाते हैं कि यही टीम हमें रणजी के क्वार्टर फाइनल तक लेकर गई। एसोसिएशन का पूरा ध्यान उत्तराखंड में क्रिकेट को ऊंचाईयों तक ले जाने में है और सोशल मीडिया पर चल रही भ्रमक खबरें हमारे हौसलों को तोड़ नहीं सकती हैं। उन्होंने खिलाड़ियों के खाने पर खर्च किए 1.74 करोड़ पर कहा कि यह बिल एक टीम पर खर्च नहीं किया गया है, बल्कि उस दौरान प्रदेश के अलग-अलग मैदानों पर बोर्ड के अलग-अलग टूर्नामेंट के मैच, कैंप के दौरान हुए खर्चे भी इसमें शामिल है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के बिलों का भुगतान खुद बीसीसीआई करता है, ऐसे में वित्तीय अनियमितताओं का सवाल ही नहीं उठता है। सीएयू अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला ने सीएयू की सदस्यों के लिए आयोजित लंच में डेढ़ करोड़ के बिल के आरोप को निराधार बताया। सीएयू के प्रवक्ता संजय गुसाईं पर हितों के टकराव के आरोप को एसोसिएशन ने खारिज किया है। इस बारे में जब कार्यविरत कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि बीसीसीआई की नियमावली 38 (1)(5) के तहत संजय गुसाईं पर हितों के टकराव का मामला बनता है।
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