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कैग रिपोर्ट में खुलासा: उत्तराखंड में वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन विभागों ने सरेंडर कर दिए 259 करोड़ 

Sat, 28 Aug 2021 09:53 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2019-20 में कई विभागों ने 259 करोड़ रुपये बगैर इस्तेमाल किए ठीक वित्तीय वर्ष की समाप्ति वाले दिन सरेंडर कर दिए। इस तरह जो धनराशि विकास कार्यों पर इस्तेमाल होनी थी, वह वापस खजाने में चली गई।
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रुपये(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
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विस्तार
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विकास कार्यों की मांग पर अकसर बजट का रोना रोने वाले विभागों की कैग ने कलई खोली है। पूरे साल बजट की लड़ाई लड़ने वाले विभागों को शासन से जो धनराशि जारी हुई, उसे वह साल भर विकास योजनाओं पर खर्च करने से डरते रहे। नतीजा यह हुआ कि वित्तीय वर्ष समाप्ति के आखिरी दिन 259 करोड़ की धनराशि समर्पित (सरेंडर) कर दी गई। 

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भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक ने सरकारी तंत्र की इस सच्चाई से पर्दा उठाया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2019-20 में कई विभागों ने 259 करोड़ रुपये बगैर इस्तेमाल किए ठीक वित्तीय वर्ष की समाप्ति वाले दिन सरेंडर कर दिए। इस तरह जो धनराशि विकास कार्यों पर इस्तेमाल होनी थी, वह वापस खजाने में चली गई। मजेदार बात यह है कि प्रदेश सरकार के कई ऐसे विभाग हैं जो विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के बजट के लिए शासन से खूब लड़ाई लड़ते हैं। यह तथ्य हैरान करने वाला है कि वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर कुल 3,225 करोड़ रुपये सरेंडर किए गए। इसमें से 261 करोड़ रुपये वित्तीय वर्ष समाप्ति से पूर्व है। 

100 करोड़ खर्च का हिसाब भी नहीं दिया
कैग ने सरकारी तंत्र की एक और गंभीर खामी को उजागर किया है। यह खामी उपयोगिता प्रमाण पत्रों को देने में विभागीय हीलाहवाली से जुड़ी है। कैग ने खुलासा किया कि प्रदेश सरकार के विभागों को अलग अलग कार्यों के लिए मार्च 2019 तक 99.44 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया। इस धनराशि के सापेक्ष विभागों को महालेखाकार के लेखा एवं हकदारी को 52 उपयोगिता प्रमाण पत्र देने थे। लेकिन उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं दिए गए। वित्तीय मामलों के जानकारों के मुताबिक, उपयोगिता प्रमाण पत्र समय पर न देने से अनुदान की अगली किस्त रुक जाती है। 100 करोड़ अनुदान के मामले में भी यही हुआ। विभागीय लापरवाही की वजह से जिन योजनाओं पर अनुदान की धनराशि खर्च होनी थी, उन पर या तो काम शुरू नहीं हुआ या काम अधूरा रह गया।
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बेकार साबित हुआ अनुपूरक प्रावधान
प्रदेश सरकार ने अपने बजट में अनुपूरक धनराशि का प्रावधान तो कर दिया, लेकिन यह प्रावधान अनावश्यक सिद्ध हुआ। ऐसे 25 विभाग थे, जहां 50 लाख व उससे अधिक धनराशि बचत में चली गई।
वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान 45 प्रकरणों में 2,481.20 करोड़ के अनुपूरक प्रावधान बेकार साबित हुआ। रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार ने15 मामलों में धनराशि का पुनर्विनियोग अविवेकपूर्ण ढंग से किया।

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