उत्तराखंड की तीन विधानसभाओं के उपचुनाव के लिए सोमवार को मतदान होगा। इस उपचुनाव के कई मायने हैं।
नए राजनैतिक समीकरण की जमीन होगी तैयार
लोकसभा चुनाव में दिखी मोदी लहर इस उपचुनाव के कितना कारगर है, अब यह भी पता लग जाएगा।
चुनाव नतीजे मुख्यमंत्री हरीश रावत समेत प्रदेश के दो पूर्व मंत्रियों त्रिवेंद्र सिंह रावत और हीरा सिंह बिष्ट के राजनैतिक भविष्य और प्रदेश के नए राजनैतिक समीकरण की जमीन तैयार करेंगे।
मुख्यमंत्री धारचूला से उम्मीदवार हैं उनकी जीत उन्हें विधानसभा की सदस्यता दिलाएगी। हालांकि उनकी अकेली जीत से अधिक महत्वपूर्ण अभी तक भाजपा के खाते में रही सोमेश्वर और डोईवाला सीट को छीनना होगा।
कांग्रेस एकतरफा बनाना चाहती है चुनाव
कांग्रेस धारचूला को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है। भाजपा नेता भी मानते हैं कि यह सीट कभी भाजपा के पास नहीं रही है। मुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी में लड़ा जा रहा चुनाव कांग्रेस एकतरफा बनाना चाहती है।
बावजूद भाजपा आसानी से धारचूला सीट छोड़ने को तैयार नहीं है। तीनों विधानसभाओं में सबसे दिलचस्प और कांटे की टक्कर वाला चुनाव डोईवाला का है।
जहां दो पूर्व मंत्री भाजपा से त्रिवेंद्र सिंह रावत और कांग्रेस से हीरा सिंह बिष्ट के बीच सीधा मुकाबला है। डोईवाल उपचुनाव में भाजपा को जितना डर अपनों के भितरघात से है उतना ही कांग्रेस को भी सता रहा है।
लिहाजा नेताओं के समर्थकों और मतदाताओं के बीच मैसेज देने का काम आखिरी दौर तक जारी है। एम्स से देहरादून पहुंचकर मुख्यमंत्री का डोईवाला बाजार में रोड शो काफी हद तक हीरा सिंह बिष्ट को राहत देने वाला रहा है।
दरअसल पहले मुख्यमंत्री खुद डोईवाला से भी लड़ना चाहते थे लेकिन हीरा सिंह बिष्ट उनका विरोध कर टिकट ले आए।
कहने को विजय बहुगुणा खेमे ने टिकट दिलाने में हीरा सिंह का समर्थन किया लेकिन इलाके में दखल रखने वाले बड़े नेता अभी नहीं पहुंचे हैं।
मंत्री इंदिरा हृदयेश आखिर समय तक हीरा सिंह को जिताने के लिए दोनों गुटों के नेताओं से सम्पर्क कर सेतु का काम कर रही हैं। डोईवाला में बड़ी संख्या टिहरी विस्थापित रह रहे हैं।
टिहरी विस्थापित मतदाताओं पर कांग्रेस का फोकस
लिहाजा कांग्रेस का फोकस इन्हीं मतदाताओं पर है और बहुगुणा खेमे के नेताओं को उनके सम्पर्क में लगाया जा रहा है। सरकार के सहयोगी मंत्री और डोईवाला में पैठ रखने वाले दिनेश धनै को इस क्षेत्र में सक्रिय किया गया है।
भाजपा उम्मीदवार त्रिवेंद्र सिंह रावत को टिकट के लिए उनके विरोधियों ने अंतिम समय तक फंसाये रखा। पार्टी केशीर्ष नेतृत्व की ओर से बार बार प्रयास किए गए कि सभी गुटों के नेता कम से कम एक बार डोईवाला में अपने कार्यक्रम लगाएं।
उसके बाद ही डोईवाला सीट छोड़कर संसद पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने इलाके में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
निशंक अपनी सीट से उत्तराधिकारी को लड़ाना चाहते थे। पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी भी अपने किसी की उम्मीदवारी चाह रहे थे।
पार्टी ने चुनाव केअंतिम चरण में शनिवार को खंडूड़ी का कार्यक्रम रखा था लेकिन खंडूड़ी डोईवाला नहीं पहुंचे। बताते हैं कि खंडूड़ी ने यह फैसला कांग्रेस की ओर से ढैंचा बीज को लेकर त्रिवेंद्र सिंह पर लगाए गए आरोप के बाद लिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी एक बार फिर त्रिवेंद्र केसाथ खड़े दिखे। दरअसल त्रिवेंद्र को चुनाव लड़ाने में कोश्यारी खेमा ही शुरू से लगा है।
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