एंबुलेंस के आने से पहले पुलिस ने अपनी जीप से बच्चों को रामनगर के सरकारी अस्पताल पहुंचाया। बाद में एंबुलेंस भी शेष बच्चों को लेकर अस्पताल पहुंची। यहां सभी बच्चों को भर्ती किया गया। इनमें से चार बच्चों की हालत गंभीर होने पर उन्हें हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।
तहसीलदार पूनम पंत, विधायक दीवान सिंह बिष्ट एवं कोतवाल रवि कुमार सैनी ने अस्पताल पहुंचकर घटना की जानकारी ली। देर शाम को सभी बच्चों को लेकर शिक्षक रुद्रपुर के लिए रवाना हो गए। उधर, बस चालक रुद्रपुर निवासी नसीम मौके से फरार हो गया।
इन बच्चों को आई चोटें
अभिषेक पाल (13), उदय (12), दीपक रस्तोगी (16), तपस मंडल (13), आशीष (12), मनीष (13), अनिकेत (12), प्रियांशु यादव (12), उत्कर्ष गंगवार (13), प्रतीक यादव (12), विशेष मंडल (11), देव वर्मा (9), चैयंक शर्मा (10), आकाश (10), विक्की मांझी (15), कपिल शर्मा (14)।
ये हुए रेफर
चैयंक शर्मा, आशीष, उत्कर्ष गंगवार और मनीष।
अस्पताल में भर्ती सभी बच्चों को इलाज के बाद शिक्षक दूसरी बस से रुद्रपुर ले गए हैं। सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं, जबकि गंभीर रूप से घायल चार बच्चों का हल्द्वानी में इलाज किया जा रहा है।
-पूनम पंत, तहसीलदार रामनगर
एसटीएच लाए गए चारों बच्चे खतरे से बाहर हैं और उनकी हालत स्थिर है।
-डॉ. अरुण जोशी, एमएस सुशीला तिवारी अस्पताल
गर्जिया घुमाने के नाम पर स्कूल प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को ताख पर रखा। बच्चों से 35 हजार से अधिक रुपये लिए और उन्हें खटारा बस से भेज दिया। टायर घिसे होने के कारण यह बस ढलान पर नहीं संभल पाई और पलट गई।
अस्पताल में दर्द से कराह रहे बच्चों से जब पूछा गया कि टूर के लिए कितने रुपये दिए तो उन्होंने बताया कि प्रति बच्चे ने तीन सौ रुपये दिए थे। यानी स्कूल प्रशासन ने 118 बच्चों से तीन सौ रुपये के हिसाब से 35 हजार 400 रुपये एकत्र किए, लेकिन जब घुमाने की बारी आई तो खटारा बसों से बच्चों को गर्जिया मंदिर भेज दिया।
गनीमत रही कि बस पलट कर रेलिंग से टकराकर रुक गई। यदि बस रेलिंग से नहीं टकराती तो शायद बस खाई में भी गिर सकती थी। अगर ऐसा होता तो हादसा और भी बड़ा हो सकता था। वहीं, बस पलटने के बाद चालक नसीम मौके से फरार हो गया और स्कूल प्रशासन उसे ही तलाशता रहा। इसके अलावा हादसा होने के बाद स्कूल प्रशासन पुलिस को जानकारी देने से बचता रहा, लेकिन जब गर्जिया चौकी इंचार्ज मनोज नयाल ने सख्ती से पूछताछ की, तब जाकर स्कूल प्रशासन ने सही जानकारी दी।
मौके पर पहुंचे एफएचओ किशोर उपाध्याय ने खटारा बसों से बच्चों को टूर पर लाने पर शिक्षकों को जमकर लताड़ लगाई। प्रधानाचार्य मनोज कुमार भी बच्चों के साथ आए थे, लेकिन वह हादसे के बाद गायब हो गए और बाद में अस्पताल में नजर आए।
बच्चों को पूरी सुरक्षा से ला रहे थे, लेकिन गर्जिया में आकर अचानक हादसा हो गया। उन्होंने रुद्रपुर के ट्रांसपोर्टर से बसें मंगाई थीं, उनके स्कूल की कोई बस नहीं है। -गोविंदधर, मैनेजिंग डायरेक्टर एडीएम पब्लिक स्कूल।
हादसा होने के बाद स्कूल के शिक्षक और शिक्षिकाओं ने सभी बच्चों को बस से तो निकाल लिया, लेकिन 108 एंबुलेंस के फोन करने के बजाय स्कूल के मैनेजिंग डायरेक्टर से संपर्क साधने में लगे रहे। ऐसे में 15 मिनट तक बच्चे सड़क पर खून से लथपथ खड़े थे। बाद में पुलिस ने बच्चों को अस्पताल भिजवाया।
जिस समय हादसा हुआ उस समय गर्जिया चौकी इंचार्ज सहित कई पुलिस कर्मी रामनगर कोतवाली में डीआईजी जगतराम जोशी के कार्यक्रम में मौजूद थे। जैसे ही घटना की जानकारी मिली तो सभी मौके की दौड़े। चौकी इंचार्ज मनोज नयाल ने बच्चों को सड़क पर घायल देखा तो उन्होंने पुलिस जीप से बच्चों को तत्काल अस्पताल भिजवाया। इसके बाद स्कूल के मैनेजिंग डायरेक्टर गोविंदधर सहित मौके पर मौजूद शिक्षकों को फटकार लगाई।
कहा कि एंबुलेंस को फोन क्यों नहीं किया गया। वहीं, अस्पताल में भर्ती बच्चों को देखने के लिए स्कूल प्रशासन की ओर से कोई नहीं पहुंचा। स्कूल स्टाफ की संवेदनाएं तब तार-तार हुईं, जब अस्पताल में भर्ती बच्चे इलाज के दौरान चिल्ला रहे थे। बताया जा रहा है कि स्कूल के प्रधानाचार्य एवं एक अन्य स्टॉफ रेफर हुए बच्चों के साथ रवाना हो गए थे। इसके बाद अस्पताल में भर्ती बच्चों की देखभाल के लिए स्कूल का कोई भी स्टॉफ नहीं था। अस्पताल के स्टाफ के अलावा एसआई अजेंद्र प्रसाद एवं तहसीलदार पूनम पंत ने बच्चों को संभाला।
बस पलटने के मामला गंभीर है। दुर्घटना के कारणों की गहनता से जांच की जाएगी। जांच में यदि बस में कमी या अन्य कोई तकनीकी कमी पाई गई तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी तथा रिपोर्ट डीएम को भी प्रेषित की जाएगी।
-हर गिरी, एसडीएम रामनगर
बस में फिटनेस संबंधी कोई कमी नहीं है, लेकिन बस पुरानी है और उसके टायर भी घिसे हैं। इस प्रकरण में तकनीकी अधिकारी से जांच कराकर रिपोर्ट रुद्रपुर आरटीओ को भेजी जाएगी।
-विमल पांडेय, एआरटीओ रामनगर