आशीष कुकसाल
दून कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी के डायरेक्टर आशीष कुकसाल की गिनती दून के युवा शिक्षाविदों में की जाती है। पर्यावरण को बचाते हुए युवाओं को रोजगार के बेहतर विकल्प उपलब्ध कराने के लिए अजय कुकसाल ने दून कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी में फायर सेफ्टी कोर्स की शुरूआत की। इसके जरिये उन्होंने पिछले आठ वर्षों में देश को 2200 से अधिक फायर फाइटर्स दिए हैं, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में रहकर सेवाएं दे रहे हैं।
प्रवेश गुरुंग
सिक्योरिटी इंडस्ट्री में 21 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले प्रवेश गुरुंग 12 वर्ष से अधिक अमेरिका में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। दुनिया टॉप सिक्योरिटी सर्विसेज में सेवाएं देने के बाद उन्होंने दून में आर्मर सिक्योरिट, हाउसकीपिंग एंड प्लेसमेंट सर्विसेज एजेंसी स्थापित की। वह सिक्योरिटी सर्विस, फायर फाइटिंग, फर्स्ट एड, सीसीटीवी मॉनिटरिंग, कस्टमर केयर, क्राउड मैनेजमेंट और डिजास्टर मैनेजमेंट की ट्रेनिंग के मास्टर माने जाते हैं। --
निर्मल काला
पिछले 27 वर्षों से डिफेंस सेक्टर की कोचिंग देने वाले निर्मल काला दून में काला ट्यूटोरियम के निदेशक हैं। 1993 में स्थापित उनके संस्थान से बड़ी संख्या में छात्र आरआईएमसी, आरएमएस, सैनिक स्कूल, एनडीए, सीडीएस में सफलता हासिल कर चुके हैं। वह दस हजार से अधिक छात्रों को डिफेंस, बैंकिंग, एसएससी समेत कई कंपटेटिव एग्जाम्स की तैयारी करवा चुके हैं।
कमल कृष्णा और संतोष कमल
नाइफ बैंकर्स कॉलेज के संस्थापक कमल कृष्णा और निदेशक संतोष कमल को बैंक पीओ, एसएससी, यूपीएससी समेत अन्य कंपटेटिव एग्जाम की कोचिंग का एक्सपर्ट जाता है। दोनों के पास 15 वर्षों से ज्यादा का कोचिंग का अनुभव है, जिसमें वह हजारों छात्रों को सफलता की राह दिखा चुके हैं।
एसएस रौतेला
वर्ष 2000 में एसएस रौतेला ने राज्य के युवाओं को सिविल सर्विसेज की बेहतर कोचिंग उपलब्ध कराने के लिए एकलव्य आईएएस अकादमी की स्थापना की। पिछले 19 वर्षों में सिविल सर्विसेज की कोचिंग के क्षेत्र में स्थापित नाम बन चुके एकलव्य अकादमी से कई गरीब छात्र भी सफलता हासिल कर उच्च पदों पर पहुंचे हैं।
नीलम शर्मा
द इंडियन एकेडमी की फाउंडर प्रिंसिपल नीलम शर्मा के नेतृत्व में उनका स्कूल आज दून के सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों में शामिल हो चुका है। विद्यालय का बोर्ड का रिजल्ट भी शानदार रहा है। उनकी और उनकी टीम के अथक प्रयासों और इनोवेटिव एप्रोच से स्कूल के छात्र हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं।
मंजू घई
अपनी बेबाकी और बातचीत के कौशल के लिए पहचानी जाने वाली मंजू घई सुरभि समूह की प्रबंध निदेशक हैं। उनके निर्देशन में रामाडा देहरादून शहर में लांच होने के बाद तेजी से आगे बढ़ रहा है। मंजू घई बाजार की जरूरतों के मुताबिक रामाडा को ग्राहकों की पहली पसंद बनाने की दिशा में कार्य कर रही हैं।
चंद्रशेखर मेहरवाल
अपने काम के प्रति जुनून और कारोबार से इश्क चंद्रशेखर मेहरवाल की सफलता का मूलमंत्र है। इसी मंत्र को दिमाग में रखकर एक छोटी सी दुकान से उन्होंने अपने करियर की शुरूआत की। आज उनकी गिनती दून के जाने-माने फैशन डिजाइनरों में होती है।
अवनीश सहगल
ग्राउंड जीरो डिफेंस इंस्टीट्यूट के निदेशक अवनीश सहगल भारतीय सेनाओं के लिए जांबाज युवा तैयार करते हैं। पिछले करीब 19 वर्षों से वह युवाओं को डिफेंस की कोचिंग दे रहे हैं। उनके संस्थान से निकलकर अब तक कई युवा भारतीय सेनाओं का हिस्सा बन चुके हैं।
मनीष तयाल
उत्तराखंड के आयरन किंग के नाम से मशहूर श्री दुर्गा लोहा भंडार के संस्थापक निदेशक मनीष तयाल संघर्षों से लड़ते हुए सफलता के शिखर पर पहुंचे हैं। छोटे स्तर से शुरूआत करने वाले तयाल का सालाना टर्नओवर 500 करोड़ से अधिक का है। उन्हें 2018 में स्टार ऑफ द ईयर अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है।
डा. देवेंद्र ढल्ला
भामेश्वरी क्लीनिक के माध्यम से 10 हजार से अधिक मनोरोगियों का सफल उपचार कर चुके डा. देवेंद्र ढल्ला की गिनती प्रदेश के प्रसिद्ध मनोचिकित्सकों में होती है। उत्तराखंड रत्न से सम्मानित डा. देवेंद्र ढल्ला 124 सुसाइड का प्रयास करने वाले रोगियों का भी सफल उपचार कर चुके हैं।
विजय भट्ट
मांगल डॉट कॉम के जरिये हजारों जोड़ियां बनाने वाले विजय भट्ट ने 2009 में दिल्ली की कारपोरेट लाइफ त्याग कर देहरादून को अपनी कर्मस्थली बनाया। अपनी मेहनत के दम पर 38 हजार से ज्यादा रिश्ते कराकर वह मांगल इंफोटेक को उत्तराखंड की सबसे बड़ी मेट्रीमोनियल कंपनी बना चुके हैं। देश ही नहीं दुनिया के कई देशों में उनकी वेबसाइट ग्राहकों के बीच लोकप्रिय है।
संदीप गुप्ता
पूर्व नौसेना अधिकारी संदीप गुप्ता ने दून डिफेंस एकेडमी की स्थापना के समय उत्तराखंड के ज्यादा से ज्यादा युवाओं को फौज में अफसर बनाने का सपना देखा था। अपनी मेहनत और बेहतरीन कोचिंग के दम पर उन्होंने हजारों युवाओं को भारतीय सेनाओं में अफसर बनाने में सफलता हासिल की है।
निशांत थपलियाल
2002 में प्रदेश के पहले आईटी इंस्टीट्यूट की स्थापना के साथ निशांत थपलियाल ने प्रदेश के युवाओं को बेहतर रोजगार उपलब्ध कराने की पहल की। दो दशक की मेहनत और संघर्ष के दम पर आज वह आईटीएम को उत्तराखंड के इंप्लॉयमेंट लीडर कॉलेज के रूप में स्थापित कर चुके हैं।
अंकुश वार्ष्णेय
टेक्नोग्रीन आर्किटेक्ट आज दून के डेवलपमेंट सेक्टर का जाना पहचाना नाम है। पंजाब टेक्नीकल यूनिवर्सिटी से आर्किटेक्चर की डिग्री लेने के बाद अंकुश वार्ष्णेय ने इसकी शुरूआत की। पिछले 10 वर्षों के दौरान दून में कई शानदार होटल, रिजॉर्ट, ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्, हॉस्पिटल जैसे बड़े निर्माण कर वह अपनी काबिलियत का लोहा मनवा चुके हैं। उन्होंने जीएमएस रोड पर नियश फर्नीचर एंड इंटीरियर स्टूडियो की स्थापना भी की है।
आशीष अग्रवाल
अग्रवाल डेवलपर के डायरेक्टर आशीष अग्रवाल की गिनती शहर के प्रमुख रियल एस्टेट कारोबारियों में होती है। शिमला रोड पर स्वास्तिक ग्रीन के नाम से आवासीय प्रोजेक्ट तैयार कर उन्होंने सैकड़ों लोगों के आशियाने का सपना पूरा किया है। वह अपनी छत अपनी जमीन के सिद्धांत पर काम करते हैं। पिछले 15 वर्षों में उन्होंने दून में 20 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स का सफलतापूर्वक तैयार कर आवंटित किए हैं।
पंकज कुमार सम्राट
अल्फा-बीटा-गामा की स्थापना सितंबर 2010 में पंकज कुमार सम्राट ने की। तब से यह मेडिकल और इंजीनियरिंग की कोचिंग का दून में प्रमुख संस्थान बन चुका है। यहां उत्तराखंड के साथ ही उत्तर प्रदेश, बिहार से भी बड़ी संख्या में छात्र अपने सपनों को पूरा करने के लिए आते हैं।
विकास कुकसाल
कुलनरी कॉलेज ऑफ होटल मैनेजमेंट के संस्थापक विकास कुकसाल हॉस्पिटेलिटी इंडस्ट्री के जरिये सैकड़ों युवाओं के हाथों को हुनर दे चुके हैं। 2001 में स्थापित कॉलेज से अब तक सैकड़ों छात्र निकल चुके हैं, जो देश-विदेश की हॉस्पिटेलिटी इंडस्ट्री में राज्य का नाम रोशन कर रहे हैं।
डा. प्रीत कोहली
जागृति फाउंडेशन के माध्यम से डा. प्रीत कोहली अब तक हजारों लोगों को नशे के दलदल से सुरक्षित बाहर निकाल चुके हैं। नशे की गिरफ्त में फंसे लोगों का वैज्ञानिक ढंग से उपचार कर उन्हें समाज की मुख्यधारा में दोबारा शामिल करने में डा. प्रीत कोहली का महत्वपूर्ण योगदान है।
हेमेंद्र सिंह दवांण
आईआईटी दिल्ली से मास्टर्स की डिग्री लेने के बाद हेमेंद्र सिंह दवांण ने देहरादून वर्ल्ड स्कूल की स्थापना की। पांच साल तक अमेरिकन कंपनी में सेवाएं देने के बाद उन्होंने चार कमरों से उन्होंने देहरादून वर्ल्ड स्कूल की शुरूआत की। कम फीस में गुणवत्तापरक और बेहतर शिक्षा देहरादून वर्ल्ड स्कूल की पहचान बन चुकी है।
अमन सक्सेना
अमन सक्सेना की गिनती दून के युवा शिक्षा व्यवसायियों में होती है। करीब 30 वर्ष पुराने टचवुड स्कूल के जरिये उन्होंने गुणवत्तापरक शिक्षा को आम आदमी की पहुंच में करने का काम किया है। वह युवाओं को क्रिएटिव और इनोवेटिव एजुकेशन से जोड़ने के हिमायती हैं।
अशोक कुमार बंसल
मूलतः पटियाला पंजाब निवासी अशोक कुमार बंसल का परिवार 1991 में दून आकर बस गया। बंसल ऑटो के रूप में उन्होंने अपने कारोबार की शुरूआत की। बाद में कोटद्वार, सहारनपुर में भी उन्होंने अपना कारोबार बढ़ाया और कई लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया।