शनिवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली के बजट के पिटारे से उत्तराखंड के लिए बहुत कुछ नहीं निकल पाया।
जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) को एक साल में लागू करने की बात से प्रदेश को राहत मिल सकती है। मध्यम उद्योगों को राहत मिलेगी पर प्रदेश की समस्याओं को सुलझाने में केंद्र का यह बजट राज्य की मदद करता नहीं दिखता।
पिछली बजट घोषणाओं को आगे बढ़ाने के बजाय चुप्पी ओढ़ने और ग्रीन बोनस से लेकर ऊर्जा, पर्यटन और अवस्थापना विकास पर स्पष्ट तस्वीर पेश न होने से राज्य को मायूसी होगी है।
केंद्रीय बजट से इस बार राज्य को ऊर्जा के क्षेत्र में प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद थी। जल विद्युत परियोजनाओं पर कुहासा साफ होता तो राज्य को फायदा होता। जलवायु परिवर्तन से निपटने पर जोर देने के बाद भी प्रदेश के हिस्से में इस क्षेत्र में कुछ नहीं आया।
बजट में सिर्फ कहा गया है कि लघु जल विद्युत परियोजनाओं से 5000 मेगावाट उत्पादन किया जाएगा। दूसरी ओर पर्यटन प्रदेश को भी राज्य के ही भरोसे ही छोड़ दिया गया। 2013 की जून आपदा के जख्म अभी भरे नहीं है। बावजूद इसके आपदा प्रबंधन और आपदा के कारण अवस्थापना विकास पर भी राज्य के हिस्से कुछ खास नहीं आया।
कुछ दिन पहले ही केंद्र सरकार ने 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों को स्वीकार किया था। इसके राज्यों की केंद्रीय करों में हिस्सेदारी 32 से बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दी गई है, पर आठ केंद्रीय योजनाओं से किनारा कर लिया गया। पिछड़ा क्षेत्र विकास निधि योजना में राज्य के टिहरी, चंपावत और चमोली जिले शामिल हैं।
बजट में उत्तराखंड के हिस्से महिला अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण संस्थान आया है। पर इसकी तस्वीर भी पूरी तरह से साफ नहीं है। उद्योगों के लिहाज से माइक्रो यूनिट डेवलपमेंट रिफाइनेंस एजेंसी (मुद्रा) की स्थापना का फायदा होगा। प्रदेश में 90 प्रतिशत मझौले उद्योग अपनी पूंजी के दम पर स्थापित हैं।
ऐसे में 20 हजार करोड़ रुपये से स्थापित मुद्रा से इन उद्योगों को रिफाइनेंस मिल पाएगा। नाबार्ड को अवस्थापना विकास निधि के तहत 25 हजार करोड़ देने का फायदा राज्य को होगा। पर्वतीय राज्यों के लिए अलग से 33 हजार करोड़ की व्यवस्था होने से राज्य को फायदा मिलेगा।
इन योजनाओं से काटी कन्नी
राष्ट्रीय ई शासन योजना
पिछड़ा क्षेत्र अनुदान कोष
राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान
निर्यात अवसंरचनाओं के लिए राज्यों को केंद्रीय सहायता
6000 मॉडल स्कूल
राष्ट्रीय खाद्य प्रसंस्करण स्कीम
पर्यटन अवसंरचना