प्रचार के मामले में सबसे आगे रहने का दावा कर रही बसपा अल्मोड़ा सुरक्षित सीट से ही अपना प्रत्याशी तय नहीं कर पा रही है।
दूसरी ओर बसपा को भी संगठन और विधायक दल के झगड़े से फुर्सत नही मिल पा रही है। संगठन ने पार्टी से निलंबित विधायकों के खिलाफ फिर मोरचा खोलकर साफ संकेत दे दिया है कि सुलह समझौते के आसार कम ही हैं।
सुरक्षित सीट है अल्मोड़ा
बसपा इस समय चार सीटों पर अपने 2014 लोक सभा चुनाव के लिए प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। पर प्रत्याशी घोषित करने के मामले में आगे रहने वाली बसपा को सुरक्षित सीट अल्मोड़ा से ही कोई प्रत्याशी नहीं मिल पा रहा है।
उतार सकती है पैराशूट प्रत्याशी
बसपा प्रदेश अध्यक्ष मेघराज जरावरे का कहना है कि अल्मोड़ा से शनिवार शाम तक बसपा का प्रत्याशी तय हो जाएगा। बसपा फिलहाल तीन नामों पर विचार कर रही है।
बसपा ने अभी तक इन तीन नामों का खुलासा नहीं किया है। ऐसे में बसपा का ही एक धड़ा यह भी मान रहा है कि अल्मोड़ा में पार्टी किसी पैराशूट प्रत्याशी को भी मैदान में उतार सकती है।
हरिद्वार में मची है खींचतान
हरिद्वार में बसपा को अपने विधायक दल से ही लोहा लेना पड़ रहा है। इस खींचतान में बसपा के कोटे से मंत्री बने सुरेंद्र राकेश तक पार्टी से निलंबित किए जा चुके हैं। इसी तरह बसपा विधायक दल के नेता हरिदास भी पार्टी से निलंबित हैं। सरबत करीम अंसारी जरूर पार्टी के साथ नजर आ रहे हैं।
पार्टी विरोधी गतिविधियों के नाम पर विधायकों के निलंबन का शोर अभी थम भी नहीं पाया है कि बसपा अब एक और झगड़े में उलझ गई है।
निलंबित विधायकों के खिलाफ पार्टी के ही एक पदाधिकारी ने चुनाव आयोग से शिकायत की है। इस शिकायत के बाद यह भी साफ हो गया है कि दोनों ही धड़े सुलह समझौते के मूड में बिलकुल नही है।
आपसी खींचतान नुकसानदेह
आपस की इस खींचतान का नुकसान बसपा को होना तय भी है। हालांकि पार्टी पदाधिकारी यह मानने को बिल्कुल भी तैयार नही हैं। जरावरे का ही कहना है कि बसपा कैडर बेस पार्टी है और विधायकों की वजह से पार्टी को कोई नुकसान नहीं होने जा रहा है।
कांग्रेस-भाजपा के बाद बसपा ही प्रदेश में तीसरी ताकत बनकर उभर रही है। 2009 में बसपा ने टिहरी संसदीय सीट पर भी खासे वोट हासिल किए थे।