केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ बुधवार को भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के नॉन एग्जीक्यूटिव कर्मचारी भी देशव्यापी हड़ताल पर हैं। 12 सूत्री मांगों को पूरा करवाने के लिए उत्तराखंड में बीएसएनएल कर्मी हड़ताल पर चले गए।
उनका कहना है कि सरकार उनकी मांगों को पूरा करने में कतई गंभीर नहीं है। एक दिवसीय हड़ताल में बीएसएनएलईयू, एनएफटीई बीएसएनएल, एनएफटीओ बीएसएनएल सहित तमाम ट्रेड यूनियनें शामिल हैं।
यह है मांगें
- सार्वजनिक जन वितरण प्रणाली के माध्यम से मूल्यवृद्धि पर रोक लगाने के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं। वस्तु बाजार में सट्टेबाजी के व्यापार पर प्रतिबंध लगाया जाए।
- रोजगार पैदा करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
- बिना अपवाद बुनियादी श्रम कानूनों को सख्ती से पालन और श्रम कानूनों के उल्लंघन के लिए सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
- सभी मजदूरों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा कवच दिया जाए।
- न्यूनतम मजदूर जनता के लिए प्रावधान के साथ 15 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाए।
- स्थायी काम में ठेकेदारी पर रोक लगे। ठेका मजदूरों को समान और उसी तरह के काम के लिए नियमित मजदूरी के बराबर वेतन और लाभों का भुगतान हो।
- ट्रेड यूनियनों को आवेदन सौंपने की तिथि से 45 दिन के भीतर अनिवार्य पंजीकरण और आईएलओ कन्वेंशन सी 87 और डी 98 की फौरन पुष्टि हो।
- श्रम कानून संशोधनों को रोका जाए।
- रेलवे, बीमा और प्रतिरक्षा में एफडीआई रोका जाए।