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दुल्हन ने लगा दी शादी में शराब पर रोक

Tue, 11 Feb 2014 11:16 PM IST
कुलदीप खंडेलवाल/अमर उजाला, लैंसडौन
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कौन कहता है कि आसमान में सुराख हो नहीं सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों..,। समाज की रुढ़िवादी परंपराएं चाहे जितनी भी गहरी हों, दृढ़ निश्चय और मजबूत इच्छाशक्ति से इसके खिलाफ भी जीत हासिल हो सकती है। ऐसा ही कर दिखाया डेरियाखाल की उषा रावत ने।
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उसकी इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि उसकी शादी में किसी ने भी शराब का सेवन नहीं किया।

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ग्राम पंचायत बाडियूं के डेरियाखाल गांव की उषा रावत पुत्री स्व. दलवीर सिंह का विवाह चैलूसैंण के धारी गांव के वीरेंद्र सिंह के साथ तय हुआ। आठ फरवरी को शादी होनी थी। ऊषा ने अपने परिजनों से कहा कि उसकी शादी में शराब नहीं दी जाएगी।

'कोई आए या ना आए, शराब नहीं आएगी'

उषा ने जब अपना फैसला सुनाया तो परिजन सकते में आ गए। परिजनों ने ग्रामीण परिवेश के सामाजिक मान मर्यादा का वास्ता दिया। बिना शराब के शादी से ग्रामीणों के शामिल नहीं होने की बात कही।

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बावजूद इसके ऊषा ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया कि चाहे कोई शादी में आए या न आए, लेकिन शादी में शराब नहीं आएगी। आखिर बेटी की जिद के आगे परिजनों को झुकना पड़ा।

सभी शादी में शालीनता के साथ आए
शादी के दौरान कहीं ना शराब परोसी गई और ना कोई शराब में झूमता नजर आया। यही नहीं ग्रामीण, बाराती और घराती सभी शादी में शालीनता के साथ शामिल हुए।

पहाड़ के लिए मिसाल बनी ऊषा

वैसे तो शादी समारोह में शराब के खिलाफ कई गांव संकल्प लेते रहे हैं, लेकिन यह पहला उदाहरण है जब किसी वधू ने अपने विवाह में शराब के खिलाफ प्रतिबंध लगाने में कामयाबी पाई हो। ऊषा की पहल समाज को आईना दिखाने का काम किया है।

ग्रामीणों के साथ बाराती भी हुए खुश
ऊषा ने न केवल परिजनों और अपने गांव के लोगों को शराब के खिलाफ तैयार किया, बल्कि बारातियों को भी इसके लिए राजी कराया। इस व्यवस्था से ग्रामीण से लेकर बाराती सभी खुश हो गए।
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सैन्य पृष्ठभूमि का है परिवार

उषा मायके से सैन्य पृष्ठभूमि वाले परिवार से है। दादा और पिता सेना में थे, उनका निधन होने के बाद दादी और मां को पेंशन मिलती है।

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दो ताऊ सेना से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। दो चाचा वर्तमान में फौज में हैं। उषा के तीन भाई भी फौज में हैं।

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सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़े परिवारों में शराब की कमी नहीं होती है लेकिन इस विवाह में एक भी बोतल शराब न खुलना बड़ी उपलब्धि है। जबकि इस परिवार के सात लोग वर्तमान में सेना से जुड़े हैं।
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