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बिना हड्डी के पकड़े गए 145 गुलदार!

Fri, 04 Apr 2014 04:47 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि गुलदार और बाघ बिना हड्डी के होते हैं! ऐसा कोई वन्य जीव विज्ञानी नहीं कह रहा है, बल्कि वन विभाग के आंकडे़ ऐसा सोचने पर मजबूर कर रहे हैं।
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पिछले पांच सालों में (वर्ष 2008 से 2012 तक) प्रदेश में वन्य जीव तस्करों से 149 गुलदार की खालें पकड़ी गईं, लेकिन इनमें से केवल तीन बार ही गुलदार के अस्थिपंजर और चार बार बड़ी मात्रा में हड्डियां मिलीं।

आश्चर्यजनक रूप से 142 बार गुलदार की खालें तो पकड़ी गईं लेकिन उनकी हड्डियों का अता-पता नहीं चला। इसी तरह वर्ष 2009 से 2012 तक चार बार बाघ की खाल पकड़ी गई, लेकिन केवल एक मामले में बाघ का अस्थिपंजर मिला। कई मामले वन विभाग ने विभिन्न एनजीओ की मदद से रंगेहाथ भी पकड़े, लेकिन हड्डियां नहीं मिलीं।
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कहां जा रहीं हैं बाघ, गुलदार की हड्डियां?

इसे वन विभाग की कामयाबी कहें या नाकामयाबी लेकिन यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब गुलदार और बाघों की खालें मिल रही हैं तो उनकी हड्डियां कहां जा रही हैं?

यह भी सवाल उठता है कि क्या जानबूझकर हड्डियां गायब की जा रही हैं और केवल खालें पकड़ी जा रही हैं? सूत्रों की मानें तो हड्डियों और अन्य अंगों की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में खालों से अधिक है।

सूत्र बताते हैं कि चीन की चिकित्सा पद्धति में गुलदार और बाघ की हड्डियों सहित अन्य अंगों की काफी मांग है। वन्य जीव तस्कर गुलदार और बाघों की हड्डियों, दांतों और नाखूनों को अलग-अलग सप्लाई करते हैं, जबकि खालों का अलग मार्केट है। जबकि वन विभाग की कार्रवाई खालें पकड़ने तक ही सीमित रहती है।

सूत्र यह भी बताते हैं कि वन्य जीव तस्कर मिलीभगत करके खालें तो पकड़वा देते हैं लेकिन वन्य जीवों के अन्य अंगों की आसानी से तस्करी कर देते हैं। इसमें कई एनजीओ की भूमिका भी संदिग्ध होती है।

25000 रुपये प्रति किलो बिकती हैं हड्डियां

सूत्रों के मुताबिक एक बाघ या गुलदार के शरीर में करीब 25 किलो हड्डियां निकलती हैं। ये हड्डियां 25000 रुपये प्रति किलो बिकती हैं। इसके अलावा नाखून और मूंछों के बाल भी काफी महंगे बिकते हैं।

गुड़ में रखकर तस्करी
सूत्र बताते हैं कि बाघ या गुलदार की हड्डियों की तस्करी, खाल की तुलना में ज्यादा आसान है। बताया जाता है कि चीन सीमा पर गुड़ के जरिये बाघों-गुलदारों के अंगों की तस्करी की जाती है।

गुड़ के बड़े-बड़े टुकड़े खच्चरों पर लाद सीमा पार भेजे जाते हैं। इनकी जांच नहीं होती। गुड़ के भीतर तस्कर वन्यजीवों की हड्डियां छिपा देते हैं।

ऐसे चलता है तस्करी का खेल

वन्य जीव तस्कर बाघ और गुलदार के अंगों की तस्करी के लिए एक प्लान चलाते हैं। वन्य जीव को मारने के बाद उसके शरीर से खाल अलग, मूंछ अलग, दांत अलग, नाखून अलग निकालने के अलावा हड्डियां अलग कर ली जाती हैं।

खाल की मांग भारत में ज्यादा होने के चलते इसकी सप्लाई को किसी व्यक्ति से करवाया जाता है, जिसे जरूरत पड़ने पर पकड़वा भी दिया जाता है। बाकी के अंगों को दूसरे रास्ते से चीन बार्डर पर पहुंचा दिया जाता है।

इस तरह वन विभाग का ध्यान केवल खाल पर रह जाता है जबकि अन्य अंग अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंच जाते हैं।
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हड्डियों का होता है सबसे ज्यादा महत्व

चीन की पूरी चिकित्सा पद्धति बाघ और गुलदार की हड्डियों पर केंद्रित है। जानकारों का कहना है कि इन हड्डियों का इस्तेमाल चीन में न केवल शक्तिवर्धक दवाओं बल्कि कई ऐसी दवाईयों को बनाने में इस्तेमाल होता है, जिनसे कई गंभीर बीमारियां ठीक हो जाती हैं।

इसके अलावा बाघ और गुलदार के नाखून और मूंछ के बालों का इस्तेमाल तंत्र प्रक्रिया में भी किया जाता है।

अधिकारियों का है कहना
यह बात सही है कि चीन में वन्यजीव अंगों और हड्डियों की सप्लाई होती है। प्रदेश के वन विभाग में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है। एक बार फिर वार्डन सिस्टम लागू करना है। स्थानीय पुलिस की सहायता की भी आवश्यकता है। जल्द ही इस पर नई कार्ययोजना बनाकर अमल में लाई जाएगी।
-एसएस शर्मा, प्रमुख वन संरक्षक
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