यूं तो पूरा गुजरात मोदी को प्रधानमंत्री बनाए जाने को उतावला बताया जा रहा है लेकिन हालात इतने भी हलुआ नहीं हैं।
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राज्य की 26 में से करीब 10 सीटों पर कांग्रेस अपने को फाइट में देख रही है। गुजरात के 60 फीसदी से ज्यादा हिस्से का शहरीकरण हो चुका है।
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यहां विकास की कुछ हद तक दस्तक भी हो चुकी है, लेकिन बाकी हिस्से आदिवासी बहुल और ग्रामीण क्षेत्र हैं, जहां कांग्रेस का पारंपरिक आधार आज भी बचा है और मोदी का विकासवादी मॉडल नहीं पहुंचा है।
नौ जिलों में चमक-दमक बाकी के गुजरात जैसी नहीं
गुजरात की पूर्वी आदिवासी पट्टी के नौ जिलों में चमक दमक बाकी गुजरात जैसी नहीं है। यहां किसानों की हालत बाकी हिस्से के लोगों से मेल नहीं खाती है।
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इस क्षेत्र के बनासकांठा, साबरकांठा, छोटा उदयपुर, बारदोली, भरूच, वलसाड आदि संसदीय सीटों पर कांग्रेस अपनी हालत बेहतर मानकर चल रही है।
कांग्रेस के पारंपरिक आधार में सेंधमारी का भाजपा ने अचूक फार्मूला यह निकाला है कि यहां के मजबूत आधार वाले कांग्रेसी नेताओं को तोड़कर उन्हें भाजपा का टिकट थमा दिया है।
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बारदोली में कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे पूर्व मुख्यमंत्री अमर सिंह चौधरी के बेटे व केंद्रीय मंत्री तुषार चौधरी के मुकाबले कांग्रेस से तोड़कर लाए गए प्रभुभाई वासवा को भाजपा ने उतार दिया है।
कांग्रेस तोड़ चुकी भाजपा के छह विधायक
पिछले सवा साल में भाजपा कांग्रेस के छह विधायक तोड़ चुकी है। कांग्रेस जिन सीटों पर जीत को लेकर मुतमईन है, उनमें साबरकांठा सबसे ऊपर है।
यहां से उसके धुरंधर और धाकड़ क्षत्रिय नेता शंकर सिंह वाघेला मैदान में उतरे हैं। उनके मुकाबले दीप सिंह चौहान हैं। वाघेला का यहां की प्रभावशाली क्षत्रिय जाति पर अच्छा खासा असर है।
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राज्य में एकमात्र साबरकांठा ऐसी सीट है जहां वाघेला कई हफ्ते पहले ही सक्रिय हो गए थे। उनके हौसले इस बात से भी बुलंद हैं कि इस संसदीय सीट के ज्यादातर विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस का कब्जा है।
इसका इस चुनाव में उन्हें फायदा मिल सकता है। वाघेला पिछली बार पंचमहल सीट से हारे थे, लिहाजा इस बार वे अपनी जाति पर भरोसा जताते हुए साबरकांठा आ गए हैं।
इस सीट पर होगी मोदी की अग्नि परीक्षा
मोदी लहर की सबसे अहम परीक्षा है मेहसाणा सीट। ये वही मेहसाणा है जिसने इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उपजी सहानुभूति लहर के बावजूद 1984 में जब भाजपा ने देश भर में महज दो सीटें जीती थीं, उनमें से एक मेहसाणा थी।
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तब से आज तक भाजपा यहां कभी नहीं हारी लेकिन इस बार भाजपा ने जिन जयश्री बेन को यहां रिपीट किया है उनके खिलाफ नाराजगी यहां कांग्रेस के जीवाभाई पटेल उन्हें कड़ी चुनौती दे रहे हैं।
उनके साथ प्लस प्वाइंट ये है कि वे यहां के मजबूत पटेल वोट बैंक के हिसाब से पैदाइशी पटेल हैं तो जयश्री शादी के बाद पटेल बनीं।
इनको टिकट देने पर उठ रहे सवाल
इसके अलावा राजकोट, भावनगर, वलसाड आर बनासकांठा में भी भाजपा आंतरिक गुटबाजी का शिकार है। पाटन में 80 साल के लीलाधर ठाकुर को भाजपा का टिकट देने पर सवाल उठ रहे हैं।
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यहां कांग्रेस के प्रत्याशी भाउसिंह राठौड़ बाहुबली होने के साथ ही छलबल के हर खेल में माहिर होने से वोटर उनकी तरफ आकर्षित हो सकते हैं। इसी तरह आणंद में कांग्रेस प्रत्याशी भरत सिंह सोलंकी भाजपा के दिलीप पटेल को चुनौती दे रहे हैं।
खेड़ा में दिनशा पटेल भाजपा के देवू सिंह चौहान, दाहोद में डॉ. प्रभा तायवाड़ भाजपा के जसवंत सिंह भाभोर, वलसाड में किशन पटेल भाजपा के डॉ. केसी पटेल को टक्कर दे रहे हैं।
कुछ ऐसे रहे चुनाव नतीजे
चुनाव नतीजे (विधानसभा)
वर्ष 2007182 में से भाजपा को 111वर्ष 2012182 में से भाजपा को 115चुनाव नतीजे (लोकसभा)
वर्ष 2004भाजपा-14 कांग्रेस-12वर्ष 2009भाजपा-15 कांग्रेस-11विधानसभा जैसा लोकसभा चुनाव नहीं
दिसंबर 12 में हुए राज्य विधानसभा चुनावों के नतीजों पर लोकसभा सीटों को तौलें तो भाजपा के खाते में 20 सीटें जाती हैं, लेकिन तथ्य यह है कि गुजरात में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के नतीजों का आपस में मेल नहीं बैठता रहा है।