बीमारी के लिए प्रोटोकॉल होगा तैयार
इस बीमारी के सर्विलांस का प्रोटोकॉल तैयार करने के लिए प्रोजेक्ट को बना है। इसमें बाघ, तेंदुए तो नहीं आए हैं, यह पता करने का प्रयास किया जाएगा। जो बाघ, तेंदुए हमारे यहां और प्रदेश में कहीं भी रेस्क्यू किए जाएंगे उनके ब्लड सैंपल को लेकर जांच के लिए इंडियन वेटनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट को भेजा जाएगा। एक बार बीमारी के प्रोटोकॉल तैयार हो जाएगा तो भविष्य में हम बीमारी को लेकर निगरानी उसकी रोकथाम संवेदनशील जगहों को चिन्हित करने जैसे काम और बेहतर ढंग से कर सकेंगे
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न्यूरोलाजिकल डिसआर्डर होता है
सीटीआर निदेशक पांडे कहते हैं कि सीडीवी एक न्यूरो लॉजिकल डिसआर्डर होता है। इससे कई बार बाघ, तेंदुए की मौत हो जाती है, कई बच भी जाते हैं। ब्लड की जांच में अगर एंटीबाडी मिलती है तो इससे यह पता चलेगा कि पहले यह वन्यजीव कभी वन्यजीव बीमारी की चपेट में आया होगा। देश में पूर्व में भी सीडीवी के मामले सामने आ चुके हैं।