-मरीज की आंखों, नाक के पास लालिमा के साथ दर्द होता है।
-मरीज को आंखों में तेज चुभन के साथ ही दर्द होता है।
-मरीज को सांस लेने में तकलीफ होती है।
-खून की उल्टी होने के साथ सिर दर्द और बुखार होता है।
-मरीज को चेहरे में दर्द और सूजन का एहसास होता है।
-दांतों और जबड़ों में ताकत कम महसूस होने लगती है।
-कई मरीजों को धुंधला दिखाई देता है। सीने में दर्द होता है।
-स्थिति बिगड़ने पर मरीज बेहोश हो जाता है।
ऑक्सीजन मास्क की सफाई और समय-समय पर बदलें पानी
आईसीयू में भर्ती मरीजों व घरों में आइसोलेट मरीजों के ऑक्सीजन मास्क को समय-समय पर सफाई करने के साथ ही फ्लोमीटर में लगी बोतल के पानी को नियमित अंतराल पर बदलते रहें। पानी की जगह डिस्टिल्ड वाटर का इस्तेमाल करें। मरीजों के साथ ही सामान्य लोग भी अत्यधिक स्टेरॉयड के इस्तेमाल से बचें।
घबराए नहीं, एहतियात बरतने की जरूरत
नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव लूथरा व वरिष्ठ नेत्रसर्जन डॉ. दिनेश शर्मा का एक साथ कहना है कि ब्लैक फंगस बीमारी को लेकर बहुत अधिक घबराने की जरूरत नहीं है। बीमारी से संबंधित लक्षण दिखाई देते ही विशेषज्ञों को दिखाएं। ब्लैक फंगस कोई पहली बार दिखने वाली बीमारी नहीं है। लंबे समय से इसका इलाज किया जा रहा है। ब्लैक फंगस का इलाज कर मरीजों को स्वस्थ किया जा सकता है। ब्लैक फंगस को लेकर बहुत अधिक तनाव पालने की जरूरत नहीं है। जो लोग कोरोना संक्रमण के लंबे इलाज के बाद घरों को आए हैं। उन्हें-थोड़ा एहतियात बरतने की जरूरत है। घरों से बहुत अधिक बाहर न निकलें।