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ब्लैक फंगस: आंखों में लालिमा और तेज चुभन हो तो न करें नजर अंदाज, जानें विशेषज्ञों की सलाह 

Tue, 18 May 2021 06:18 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

कोरोना वायरस के बाद अब लोगों के मन में ब्लैक फंगस को लेकर कई सवाल हैं। विशेषज्ञों ने इसी भ्रम को दूर करने के लिए कुछ सुझाव बताए हैं।
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ब्लैक फंगस - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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कोरोना महामारी के दौर में अगर आपकी आंखों में बहुत अधिक लालिमा है और तेज चुभन के साथ दर्द का एहसास हो रहा है तो इसे किसी भी सूरत में नजर अंदाज न करें। वैसे तो राजधानी दून में ब्लैक फंगस के बहुत अधिक मामले नहीं आए हैं। फिर भी लक्षण आते ही इलाज जरूरी है। 

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स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ 17 मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है। इनमें से कुछ मरीजों को ब्लैक फंगस के चलते आंखों में भी गंभीर शिकायतें हुई हैं और  सर्जरी करनी पड़ी है। दृष्टि आई इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. गौरव लूथरा के मुताबिक उन्हें एक निजी अस्पताल में फिलहाल ब्लैक फंगस से संक्रमित दो मरीजों के आंखों की सर्जरी करनी पड़ी। डॉ. लूथरा के मुताबिक यदि आंखों में लालिमा के साथ ही तेज चुभन, साथ ही नाक के साथ ही जबड़े में दर्द है। तो यह ब्लैक फंगस के लक्षण हैं

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ऐसे में तत्काल किसी कुशल नेत्र रोग विशेषज्ञ को दिखाने की जरूरत है। वरिष्ठ नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश शर्मा के अनुसार अभी तक उनके पास ऐसा कोई मरीज नहीं आया है, लेकिन जिस तरीके से ब्लैक फंगस का खतरा बढ़ रहा है उसको देखते हुए एहतियात बरतने की जरूरत है

स्टेरॉयड,  एंटीबायोटिक, एंटीफंगल  दवाओं के अत्यधिक इस्तेमाल से खतरा ज्यादा
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार शरीर में बहुत अधिक स्टेरॉयड, एंटीबायोटिक व एंटीफंगल दबाव के होने से ब्लैक फंगस का खतरा ज्यादा हो रहा है। ब्लैक फंगस के बैक्टीरिया हवा में मौजूद हैं जो नाक के जरिए पहले फेफड़े, आंखों और फिर खून के जरिए मस्तिष्क से तक पहुंच रहे हैं। जो मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. गौरव लूथरा के मुताबिक कोरोना संक्रमित उन मरीजों के ब्लैक फंगस से संक्रमित होने का खतरा ज्यादा है जो लंबे समय तक ऑक्सीजन के सहारे आईसीयू में हैं।

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ब्लैक फंगस बीमारी के लक्षण

-मरीज की आंखों, नाक के पास लालिमा के साथ दर्द होता है।
-मरीज को आंखों में तेज चुभन के साथ ही दर्द होता है।
-मरीज को सांस लेने में तकलीफ होती है।
-खून की उल्टी होने के साथ सिर दर्द और बुखार होता है।
-मरीज को चेहरे में दर्द और सूजन का एहसास होता है।
-दांतों और जबड़ों में ताकत कम महसूस होने लगती है।
-कई मरीजों को धुंधला दिखाई देता है। सीने में दर्द होता है।
-स्थिति बिगड़ने पर मरीज बेहोश हो जाता है।

ऑक्सीजन मास्क की सफाई और समय-समय पर बदलें पानी 
आईसीयू में भर्ती मरीजों व घरों में आइसोलेट मरीजों के ऑक्सीजन मास्क को समय-समय पर सफाई करने के साथ ही फ्लोमीटर में लगी बोतल के पानी को नियमित अंतराल पर बदलते रहें। पानी की जगह डिस्टिल्ड वाटर का इस्तेमाल करें। मरीजों के साथ ही सामान्य लोग भी अत्यधिक स्टेरॉयड के इस्तेमाल से बचें।

घबराए नहीं, एहतियात बरतने की जरूरत 
नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव लूथरा व वरिष्ठ नेत्रसर्जन डॉ. दिनेश शर्मा का एक साथ कहना है कि ब्लैक फंगस बीमारी को लेकर बहुत अधिक घबराने की जरूरत नहीं है। बीमारी से संबंधित लक्षण दिखाई देते ही विशेषज्ञों को दिखाएं। ब्लैक फंगस कोई पहली बार दिखने वाली बीमारी नहीं है। लंबे समय से इसका इलाज किया जा रहा है। ब्लैक फंगस का इलाज कर मरीजों को स्वस्थ किया जा सकता है। ब्लैक फंगस को लेकर बहुत अधिक तनाव पालने की जरूरत नहीं है। जो लोग कोरोना संक्रमण के लंबे इलाज के बाद घरों को आए हैं। उन्हें-थोड़ा एहतियात बरतने की जरूरत है। घरों से बहुत अधिक बाहर न निकलें।
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