जिले के वरिष्ठ औषधि निरीक्षक नीरज कुमार ने बताया कि ब्लैक फंगस के मामले अचानक आने के बाद डॉक्टरों ने इसके इंजेक्शन और एंटी फंगल दवा लिखनी शुरू कर दी है। पहले से विभिन्न गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाले यह इंजेक्शन और अन्य दवाएं मांग के हिसाब से कम पड़ रही हैं।
उच्चाधिकारियों के दिशा-निर्देशन में इन दवाओं की कमी जल्द दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ दिन में यह दिक्कत दूर हो जाएगी। दवाओं की कालाबाजारी किसी भी सूरत में नहीं होने दी जाएगी।
देश के विभिन्न क्षेत्रों में अप्रैल के अंतिम सप्ताह में ब्लैक फंगस के मामलों के आने से हम लोग भी अलर्ट हो गए थे। ब्लैक फंगस में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन अम्फोटेरीसीन-बी और अन्य एंटी फंगल दवाओं को एचआईवी संक्रमित और कैंसर आदि के मरीजों को दिया जाता रहा है। अचानक मांग बढ़ने पर हमने विभिन्न कंपनियों से संपर्क कर इन इंजेक्शन को उपलब्ध कराने के लिए डिमांड भेज दी है। उम्मीद है कि जल्द ही ये इंजेक्शन और दवाएं मिल जाएंगी।
-डॉ. केसी पंत, चिकित्सा अधीक्षक, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल