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ब्लैक फंगस: संक्रमण रोकने के लिए समिति ने सरकार को सौंपे सुझाव, एंटीफंगल थेरेपी की सिफारिश

Mon, 17 May 2021 11:24 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति हेम चंद्रा और दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना की अध्यक्षता में गठित तकनीकी समिति से सरकार ने ब्लैक फंगस संक्रमण रोकने के सुझाव मांगे थे। 
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ब्लैक फंगस - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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उत्तराखंड में ब्लैक फंगस संक्रमण (म्यूकर माइकोसिस) की रोकथाम के लिए तकनीकी समिति ने सरकार को सुझाव सौंप दिए हैं। सचिव स्वास्थ्य डॉ. पंकज कुमार पांडेय ने सभी जिलाधिकारियों व मुख्य चिकित्साधिकारियों को समिति की सिफारिशों के आधार पर ब्लैक फंगस संक्रमण रोकने को उचित कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। 

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उत्तराखंड: एम्स में 24 घंटे के अंदर ब्लैक फंगस के आठ नए मरीज मिले, 25 हुई संक्रमितों की संख्या  

समिति ने सरकार को सुझाव दिया है कि ब्लैक फंगस संक्रमण से बचाव के बारे में लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। इसके साथ ही अस्पतालों में कोविड मरीजों को दी जा रही ऑक्सीजन की ट्यूब को बार-बार इस्तेमाल न किया जाए। ऑक्सीजन की पाइप में नमी नहीं होनी चाहिए। अस्पतालों या घरों में शीलन या नमी नहीं होनी चाहिए। कोविड मरीजों में स्टेरॉयड का इस्तेमाल तर्कसंगत होना चाहिए। इसके साथ एंटीबायोटिक व एंटीफंगल दवाइयों का प्रयोग नियंत्रण में हो।
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समिति ने कहा कि जो कोरोना मरीज ठीक हो गए और उनमें ब्लैक फंगस के लक्षण हैं तो उन्हें अस्पताल में भर्ती किया जाए। ब्लैक फंगस की जांच और पहचाने के लिए टीम वर्क से काम करने की जरूरत है।  किया जाए। जिसमें माइक्रो बायोजिस्ट न्यूरोलॉजिस्ट, ईएनटी विशेषज्ञ, नेत्र विशेषज्ञ, दांतों, बायो केमिस्ट को टीम वर्क में काम करना होगा। 

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समिति ने ये दिए सुझाव 

- संक्रमित मरीजों को लगी ऑक्सीजन ट्यूब का बार-बार इस्तेमाल न करना और ट्यूब में नमी न होने दें।
- ऑक्सीजन थेरेपी के दौरान ह्यूमिडिफायर के लिए स्वच्छ पानी का प्रयोग करें।
- कोरोना मरीजों को स्टेरॉयड का प्रयोग तर्कसंगत किया जाए।
- एंटीबायोटिक व एंटीफंगल दवाइयों का प्रयोग सही ढंग से करें।
- अस्पताल या घरों में सीलन या नमी न होने दें।
- कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों की विशेष निगरानी की जाए।
- कोविड मरीज अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद भी शुगर से नियमित जांच करें।
- धूल व मिट्टी के संपर्क में आने से बचें।
- मधुमेह को नियंत्रण करना।
- शरीर में लोहे तत्व की मात्रा ज्यादा न होने दें।
- नाक के आसपास जमा ब्लैक फंगस को सर्जरी से निकाला जाए।

ब्लैक फंगस संक्रमण के लक्षण
- आंख, नाक के पास लालिमा और चेहरे पर एकतरफा सूजन।
- नाक व मुंह से बलगम में खून निकलना।
- मुंह से दुर्गंध आना।
- आंखों, पलकों में सूजन के साथ आंखों की रोशनी कम होना। 
- बुखार, खांसी, सिरदर्द, सांस लेने में तकलीफ, दर्द। 
- मानसिक स्थिति में बदलाव
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