राष्ट्रीय अध्यक्ष के आक्रामक तेवरों के बाद उत्तराखंड भाजपा में एक बार फिर उथल पुथल का माहौल व्याप्त हो गया है।
कुमाऊं-गढ़वाल के समीकरणों में जकड़ी BJP
फिलहाल हरियाणा व महाराष्ट्र के विधानसभा केचुनाव सम्पन्न होने का इंतजार हो रहा है। इसी बीच धुरंधरों ने अपनी फिल्डिंग भी लगानी शुरू कर दी है।
बदलाव कैसा होगा, इसे लेकर भी कयासबाजियों का दौर जारी है। फिलहाल तो प्रदेश में भाजपा कुमाऊं-गढ़वाल व ठाकुर-ब्राहमण के समीकरणों में जकड़ी हुई है।
हर बार यही दबाव होता था कि एक पद कुमाऊं को मिले तो संतुलन बनाने के लिए एक गढ़वाल को भी मिले। इसी तरह का गणित ठाकुर ब्राहमण का भी था। लेकिन इस बार किसी तरह का दबाव होगा इसकी उम्मीद कम ही है।
क्योंकि एक तो इस बार केंद्रीय नेतृत्व को कोई दबाव में ले सकेगा यह संभावना नहीं के बराबर है। दूसरा पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने भी उदाहरण पेश कर दिया है।
इस समय केंद्र में भाजपा की सरकार है और प्रधानमंत्री व भाजपा के राष्ट्रीय अघ्यक्ष दोनों ही पद गुजरात के पास है। संभावित बदलाव को लेकर सभी ने अपने अपने ढंग से जोर लगाया हुआ है।
ज्यादातर लोगों का मानना है कि त्रिवेंद्र सिंह रावत को यह जिम्मेदारी मिल सकती है। लेकिन उधर, धनसिंह रावत ने भी पूरा होमवर्क कर लिया है। मौजूदा समय में प्रदेश उपाध्यक्ष मदन कौशिक को भी उम्मीद है कि हरिद्वार से टिकट नहीं मिला तो प्रदेश अध्यक्ष बनने के रास्ते तो खुले है।