उन्होंने भी अपने पिताजी की तरह 11 गोरखा रेजिमेंट को चुना
1978 में आईएमए से पास आउट हुए तो स्वॉड आफ ऑनर लेने के बाद उन्होंने भी अपने पिताजी की तरह 11 गोरखा रेजिमेंट को चुना। अहम पदों पर रहते हुए और कई सफल मिशन को लीड करते हुए उन्होंने भारतीय सेना में अपनी वीरता से मिशाल पेश की। ब्रिगेडियर रहते हुए उन्होंने यूएन के शांति मिशन को भी कमांड किया। इसके बाद ब्रिगेडियर रहते हुए ही उन्होंने उरी में आतंकवाद के खिलाफ एक बड़े सफल अभियान को अंजाम दिया। मेजर जनरल रहते हुए बारामुला में भी आतंकियों के खात्मे के लिए एक बड़ा अभियान चलाते हुए क्रॉप कमांडर रहने के दौरान नार्थ ईस्ट इंडिया में चीन के खिलाफ एक सफलतापूर्वक अभियान चलाया।
बिपिन रावत पहले ऐसे सैन्य अधिकारी रहे जो तीन साल तक आर्मी चीफ रहे। जबकि आर्मी चीफ का कार्यकाल तकरीबन दो साल का होता है। इसके अलावा बड़ी सफलता तब मिली जब वे देश के पहले सीडीएस बने। देश के साथ उत्तराखंड का नाम भी रोशन किया। बिपिन रावत के साथ बिताए पलों का स्मरण करते हुए कोठियाल कहते हैं जब मैं मेजर के पद पर था। उस दौरान मेरी पहली मुलाकात बिपिन रावत से हुई थी। वे मेरे मेंटोर भी थे।
जब म्यांमार में इंटरनेशनल प्रोजेक्ट के दौरान हमारा किडनैप हुआ था, तब सीडीएस विपिन रावत ने ही मध्यस्थता करते हुए हमें दुश्मनों के चंगुल से बाहर निकलने में मदद की थी। उसके बाद उन्होंने भारत की सैन्य सुरक्षा हमें उपलब्ध कराई थी जिस वजह से हमारा प्रोजेक्ट पूरा हुआ था। मेरे आग्रह पर 2019 में वे अपनी पत्नी के साथ गंगोत्री आए। उन्होंने स्वामी सुंदरानंद आश्रम में लगभग पां घंटे व्यतीत किए। उनकी धर्मपत्नी मधुलिका रावत को गंगोत्री काफी पसंद आया था और उन्होंने इस जगह पर दोबारा एक हफ्ते रहने की बात कही थी। लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था। हेलीकाॅप्टर हादसे की घटना ने सबको अंदर तक झकझोर कर रख दिया।
अभी हफ्तेभर पहले ही तो गए थे सबसे मिलकर
भारत के रक्षा प्रमुख (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत का श्रीनगर क्षेत्र में दो बार आगमन हुआ है। साढ़े तीन साल पूर्व वह थल सेनाध्यक्ष रहते हुए राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के दौरे पर आए थे, जबकि इसी पहली दिसंबर को उन्होंने एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विवि के दीक्षांत समारोह में शिरकत की थी। जनरल रावत को अपनी जन्मभूमि की माटी से बहुत प्यार था। यह उनके भाषणों और लोगों से मिलते वक्त साफ झलकता था। आमतौर पर सेना के उच्चाधिकारियों के समीप जाना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन जनरल रावत किसी को रोकते नहीं थे और खुशी-खुशी फोटो खिंचवा देते थे।
भारतीय थल सेनाध्यक्ष बनने के बाद गृह जनपद में उनका प्रथम आगमन राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में हुआ था। दरअसल वर्ष 2017 में भाजपा सरकार आने के बाद श्रीनगर मेडिकल कॉलेज को सेना के हवाले करने की कवायद हुई। जनरल रावत ने भी इसमें रुचि ली। वह 25 मार्च 2018 को मेडिकल कॉलेज के निरीक्षण को पहुंचे थे। यहां उनकी इस मसले पर तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से भी वार्ता हुई थी। उन्होंने कॉलेज के लिए सहयोग करने की बात की थी। हालांकि बाद में प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया।
इसके बाद इसी एक दिसंबर को वह गढ़वाल विवि के दीक्षांत समारोह में बतौर विशिष्ट अतिथि पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने भाषणों से सभी को प्रभावित किया। गढ़वाली में उद्बोधन के बाद उन्होंने हिंदी और अंग्रेजी में भाषण दिए। अपने भाषणों में उन्होंने पहाड़ के सीमावर्ती क्षेत्रों से पलायन पर चिंता भी जाहिर की। वह उत्तराखंड में पर्यटन प्रदेश के रूप में देखना चाहते थे, जबकि उन्होंने युवाओं को मंत्र दिया कि वह दूसरे को रोजगार देने लायक बनें। कार्यक्रम के बाद उन्होंने लगभग 20 मिनट छात्र नेताओं से भी मुलाकात की। जिसमें उन्होंने छात्रों को दिल्ली आवास में आने का न्योता भी दिया था। जनरल रावत ने गढ़वाल विवि की कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल के अनुरोध पर विवि में चेयर ऑफ एक्सीलेंस पर विचार करने का भी आश्वासन दिया था।
सीडीएस जनरल विपिन रावत ने पर्वतीय क्षेत्रों में अंतर्राष्ट्रीय सीमा क्षेत्र से हो रहे पलायन को राष्ट्र की सुरक्षा के लिए खतरा बताया था। इसे रोकने के लिए उन्होंने पुलिस के सहयोग की अपील भी की थी। साथ ही उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर भी पुलिस की चौकियां आर्मी व आईटीबीपी के साथ बना जाने की बात भी कही थी।
इसी साल 20 अप्रैल को उत्तराखंड पुलिस के साथ बैठक में पहुंचे जनरल रावत ने रिवर्स पलायन पर जोर देते हुए उन्होंने विकास कार्यों को बढ़ाए जाने की वकालत की थी। उन्होंने कहा था कि अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर पुलिस का सहयोग भी मिलेगा तो सुरक्षा और भी ज्यादा सुदृढ़ हो सकेगी। जनरल ने कहा था कि उत्तराखंड पुलिस ने सुरक्षा का माहौल बनाया है।
इसी का कारण है कि यहां पर उद्योगों और पर्यटकों के लिए अच्छा माहौल है। पुलिस के अनुभव का लाभ सीमा क्षेत्रों में भी लिया जा सकता है। ऐसे में जरूरत है कि अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर पुलिस के सहयोग को बढ़ाया जाए। इसके लिए वहां पर आर्मी और आईटीबीपी के साथ पुलिस की चौकियां स्थापित करने को भी कहा था।
आर्मी की इनर लाइन बढ़ाने को भी कह गए थे रावत
रावत उत्तराखंड में पर्यटन गतिविधियां बढ़ाने पर भी जोर दे गए थे। इसके लिए उन्होंने कहा था कि वह आर्मी की इनर लाइन को बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। ताकि, बॉर्डर क्षेत्रों में पर्यटन के लिए अधिक क्षेत्रफल मिल सके। वहां सैलानी आएंगे तो लोगों को आजीविका का साधन बढ़ेंगे। इससे खुद ब खुद ही पलायन रुकने में मदद मिल सकेगी।