सैकड़ों सालों से विवादों की जड़ बने मानव जाति के इस सवाल का जवाब शिवालिक रेंज से मिल सकता है।
मानव का निकटतम पूर्वज कौन है? इस रहस्य के पर्दा उठाने के लिए मानव विज्ञानी अभी तक आदि मानव, कपि मानव से मनुष्य के क्रमिक विकास को जोड़ रहे हैं, लेकिन कुछ हाथ नहीं लग पाया है।
एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया (एएसआई) में आयोजित ‘शिवालिक उत्खनन-होमोसैपियंस की यात्रा’ कार्यशाला के अंतिम दिन विज्ञानियों ने उम्मीद जाहिर की है कि इस सवाल का जवाव 2400 किमी लंबी शिवालिक रेंज में मिल सकता है। इस रेंज में जीवाश्म बड़ी मात्रा में उपलब्ध हैं और सुरक्षित हैं। इसी रेंज में शिवापिथिकस, रामापिथिकस आदि के जीवाश्म मिले।
शिवालिक रेंज में सबसे अधिक जीवाश्म मिलने की गुंजाइश
यहां मिट्टी का कम्पोजीशन ऐसा है कि इसमें जीवाश्म सुरक्षित रहते हैं
कार्यशाला में बताया गया कि हिमालय की तलहटी शिवालिक रेंज में सबसे अधिक जीवाश्म मिलने की गुंजाइश है। यहां की मिट्टी का कम्पोजीशन ऐसा है कि इसमें जीवाश्म सुरक्षित रहते हैं। यहां वातावरण वन्य जीवों और मानवों दोनों के लिए उपयुक्त रहा है।
यहां न अधिक ठंड रही है और न अधिक गर्मी। अधिक ठंड और अधिक गर्म इलाकों में जीवाश्म नष्ट हो जाते हैं। सबसे अधिक जीवाश्म मिलने की उम्मीद शिवालिक और नर्मदा घाटी में बताई गई। इन दोनों स्थानों पर मानव, स्तनपायी तथा अन्य जीवों के जीवाश्म मिले।
कार्यशाला में चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के मानव विज्ञानी प्रोफेसर राजन गौड़, वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के डॉ. आरके सहगल ने अपनी शोध प्रस्तुति दी। हाल में ही नैनीताल के कालागढ़ से एक जीवाश्म मिला है। इसकी जांच कराई जा रही है। माना जा रहा है कि यह जीवाश्म नर वानर का हो सकता है। इस मौके पर एएसआई के रीजन आफिस प्रभारी डॉ. हर्षवर्धन ने शिवालिक क्षेत्र में जीवाश्मों की खोज और उत्खनन के संबंध में भावी कार्ययोजना के संबंध में बताया। इस मौके पर जीवाश्म के संबंध में पता करने के लिए टेफोनोमी, इंडीकेटर स्पेसीज मेथड, प्रोक्सीमिटी मेथड, इकोलोजिकल डायवर्सिटी समेत विभिन्न जांच तकनीक के संबंध में जानकारी दी गई।
पैनल डिस्कशन में दिए सुझाव
जीवाश्म महत्व के स्थानों की सुरक्षा हो
- फोटो : amar ujala
-शिवालिक क्षेत्र में तत्काल जीवाश्म के लिए उत्खनन शुरू किया जाए।
-देश के विभिन्न हिस्सों में देशों में उत्खनन किया जाए जिससे मानव क्रमिक विकास, जलवायु अनुकूलन का पता चले।
-जीवाश्म महत्व के स्थानों की सुरक्षा हो, अवैध कब्जों को रोका जाए।
-ऐसे स्थानों पर म्यूजियम स्थापित किए जाएं।
-एएसआई मानव विज्ञान के क्षेत्र में काम कर रहे अन्य संस्थानों को साथ ले।